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Chapter 4

🎓 Class 9📖 Arthashastra📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 4

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

खाद्य सुरक्षा का अर्थ है कि देश के सभी नागरिकों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। यह एक ऐसा सामाजिक और आर्थिक मुद्दा है जो किसी भी देश के विकास और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में खाद्य सुरक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ की जनसंख्या बहुत बड़ी है और विभिन्न क्षेत्रों में भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक असमानताएँ विद्यमान हैं। इतिहास में भारत को कई बार अकाल और भुखमरी जैसी आपदाओं का सामना करना पड़ा है, जिनमें 1943 का बंगाल अकाल एक प्रमुख उदाहरण है। इस अकाल में लाखों लोग भूख से मरे और यह घटना भारत में खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य न केवल भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि भोजन सभी तक पहुँच सके और वह पौष्टिक भी हो। इस अध्याय में हम खाद्य सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं, भारत में इसकी स्थिति, सरकार द्वारा किए गए प्रयासों और आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

  • खाद्य सुरक्षा का मतलब है सभी नागरिकों को पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना।
  • भारत में खाद्य सुरक्षा का मुद्दा ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
  • 1943 का बंगाल अकाल खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता को दर्शाता है।
  • खाद्य सुरक्षा केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि भोजन की पहुँच और पौष्टिकता भी शामिल है।
  • 📌 खाद्य सुरक्षा: सभी नागरिकों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होना।
  • 📌 अकाल: भोजन की अत्यंत कमी की स्थिति जिसमें जनसंख्या को भूखमरी का सामना करना पड़ता है।

खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता

व्याख्या

खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता

खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि देश के सभी नागरिकों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में प्राकृतिक आपदाएँ, सूखा, बाढ़, आर्थिक असमानताएँ और सामाजिक भेदभाव जैसे कारणों से भोजन की उपलब्धता और पहुँच प्रभावित होती है। यदि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो इससे भुखमरी, कुपोषण, सामाजिक अस्थिरता और आर्थिक विकास में बाधाएँ उत्पन्न होती हैं। खाद्य सुरक्षा का अभाव बच्चों और वृद्धों जैसे कमजोर वर्गों को विशेष रूप से प्रभावित करता है। इसलिए, खाद्य सुरक्षा केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि एक सामाजिक न्याय का विषय भी है। इसके अलावा, खाद्य सुरक्षा से देश की राजनीतिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा भी प्रभावित होती है। इसलिए, खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। **Table on page 2 (7×5)** | वर्ष | उत्पादन (लाख टन) | आयात (लाख टन) | निर्यात (लाख टन) | कुल उपलब्धता (लाख टन) | | --- | --- | --- | --- | --- | | 1938 | 85 | – | – | 85 | | 1939 | 79 | 04 | – | 83 | | 1940 | 82 | 03 | – | 85 | | 1941 | 68 | 02 | – | 70 | | 1942 | 93 | – | 01 | 92 | | 1943 | 76 | 03 | – | 79 |

  • प्राकृतिक आपदाएँ और सूखा खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
  • भोजन की कमी से भुखमरी और कुपोषण बढ़ता है।
  • खाद्य सुरक्षा सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
  • कमजोर वर्गों जैसे बच्चे और वृद्ध खाद्य सुरक्षा के अभाव में अधिक प्रभावित होते हैं।
  • खाद्य सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता से जुड़ी है।
  • 📌 कुपोषण: पोषण की कमी की स्थिति जिसमें शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
  • 📌 भुखमरी: भोजन की अत्यंत कमी की स्थिति जिसमें व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है।

खाद्य सुरक्षा के घटक

व्याख्या

खाद्य सुरक्षा के घटक

खाद्य सुरक्षा के तीन मुख्य घटक होते हैं: (1) भोजन की उपलब्धता, (2) भोजन की पहुँच, और (3) भोजन की वहन क्षमता। 1. भोजन की उपलब्धता: इसका अर्थ है देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न का उत्पादन या आयात होना ताकि सभी नागरिकों की आवश्यकताओं को पूरा किया

अभ्यास प्रश्नChapter 4

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.खाद्य सुरक्षा का क्या अर्थ है और यह क्यों किसी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है?

उत्तर:

खाद्य सुरक्षा का अर्थ है कि देश के सभी नागरिकों को हर समय पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो। यह किसी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भुखमरी, कुपोषण और सामाजिक अस्थिरता को रोका जा सकता है। उदाहरण के लिए, भारत में खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता विशाल जनसंख्या और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक असमानताओं के कारण अधिक है।

व्याख्या:

खाद्य सुरक्षा का अर्थ है सभी नागरिकों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना। यह देश के विकास के लिए आवश्यक है क्योंकि भोजन की कमी से स्वास्थ्य समस्याएँ, भुखमरी और सामाजिक अस्थिरता होती है। भारत में खाद्य सुरक्षा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ जनसंख्या बहुत अधिक है और विभिन्न क्षेत्रों में असमानताएँ हैं।

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Q2.नीचे दिए गए चित्र 4.1 में राहत केंद्र पर भुखमरी से पीड़ित लोगों की स्थिति दिखाई गई है। इस चित्र में भुखमरी की समस्या का कौन सा पहलू स्पष्ट होता है?
A.A) भुखमरी के कारण सामाजिक अस्थिरता
B.B) कृषि उत्पादन में वृद्धि
C.C) खाद्य सुरक्षा की उपलब्धता
D.D) प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव

उत्तर:

भुखमरी के कारण सामाजिक अस्थिरता

व्याख्या:

चित्र 4.1 में राहत केंद्र पर भुखमरी से पीड़ित लोग दिखाए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि भोजन की कमी से सामाजिक अस्थिरता और मानव जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह खाद्य सुरक्षा की कमी का एक स्पष्ट उदाहरण है।

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Q3.1938 से 1943 तक भारत में खाद्यान्न की कुल उपलब्धता में किस वर्ष सबसे अधिक कमी आई और इसके मुख्य कारण क्या थे? नीचे दी गई तालिका देखें: | वर्ष | उत्पादन (लाख टन) | आयात (लाख टन) | निर्यात (लाख टन) | कुल उपलब्धता (लाख टन) | | --- | --- | --- | --- | --- | | 1938 | 85 | – | – | 85 | | 1939 | 79 | 04 | – | 83 | | 1940 | 82 | 03 | – | 85 | | 1941 | 68 | 02 | – | 70 | | 1942 | 93 | – | 01 | 92 | | 1943 | 76 | 03 | – | 79 |

उत्तर:

1941 में खाद्यान्न की कुल उपलब्धता सबसे कम 70 लाख टन थी। इसका मुख्य कारण उस वर्ष कृषि उत्पादन में भारी गिरावट और आयात में कमी थी, जिससे कुल उपलब्धता प्रभावित हुई। उदाहरण के लिए, 1941 में उत्पादन 68 लाख टन था जो पिछले वर्षों की तुलना में कम था।

व्याख्या:

तालिका के अनुसार, 1941 में कुल उपलब्धता 70 लाख टन थी जो सबसे कम है। इस वर्ष उत्पादन भी 68 लाख टन था जो पिछले वर्षों से कम था। आयात भी केवल 2 लाख टन था। इन कारणों से खाद्यान्न की कुल उपलब्धता में कमी आई।

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Q4.खाद्य सुरक्षा के तीन मुख्य घटक कौन-कौन से हैं और प्रत्येक का संक्षिप्त अर्थ लिखिए।

उत्तर:

खाद्य सुरक्षा के तीन मुख्य घटक हैं: 1. भोजन की उपलब्धता: देश में पर्याप्त खाद्यान्न उत्पादन या आयात होना। 2. भोजन की पहुँच: भोजन का लोगों तक सही तरीके से पहुँचाना। 3. भोजन की वहन क्षमता: लोगों के पास भोजन खरीदने के लिए आर्थिक संसाधन होना। उदाहरण के लिए, यदि भोजन उपलब्ध है लेकिन गरीब के पास पैसे नहीं हैं तो वह भूखा रह सकता है।

व्याख्या:

खाद्य सुरक्षा के तीन घटक हैं जो मिलकर सुनिश्चित करते हैं कि सभी को भोजन मिले। उपलब्धता का मतलब है पर्याप्त उत्पादन, पहुँच का मतलब वितरण और वहन क्षमता का मतलब आर्थिक सामर्थ्य। इन तीनों का संतुलन जरूरी है।

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Q5.चित्र 4.3 में पंजाब के एक किसान को एच.वाई.वी. प्रकार के गेहूँ के खेत के सामने दिखाया गया है। यह चित्र खाद्य सुरक्षा के किस पहलू को दर्शाता है?
A.A) हरित क्रांति के माध्यम से उत्पादन वृद्धि
B.B) वितरण प्रणाली की समस्याएँ
C.C) खाद्य सुरक्षा में आर्थिक असमानता
D.D) प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव

उत्तर:

हरित क्रांति के माध्यम से उत्पादन वृद्धि

व्याख्या:

चित्र 4.3 में किसान एच.वाई.वी. (हाई यील्डिंग वेरायटी) गेहूँ के खेत के सामने खड़ा है, जो हरित क्रांति के दौरान कृषि उत्पादन में वृद्धि का प्रतीक है। इससे खाद्य सुरक्षा में सुधार हुआ।

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Q6.1983 से 1999-2000 तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भुखमरी के प्रकारों में क्या परिवर्तन हुआ? नीचे दी गई तालिका देखें: | वर्ष | भुखमरी के प्रकार | | | | --- | --- | --- | --- | | | मौसमी | दीर्घकालिक | कुल | | ग्रामीण | | | | | 1983 | 16.2 | 2.3 | 18.5 | | 1993-94 | 4.2 | 0.9 | 5.1 | | 1999-2000 | 2.6 | 0.7 | 3.3 | | शहरी | | | | | 1983 | 5.6 | 0.8 | 6.4 | | 1993-94 | 1.1 | 0.5 | 1.6 | | 1999-2000 | 0.6 | 0.3 | 0.9 |

उत्तर:

1983 से 1999-2000 तक ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भुखमरी के मौसमी और दीर्घकालिक प्रकारों में काफी कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्र में कुल भुखमरी 18.5 से घटकर 3.3 हो गई, जबकि शहरी क्षेत्र में 6.4 से घटकर 0.9 हो गई। यह सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों का परिणाम है।

व्याख्या:

तालिका में स्पष्ट है कि समय के साथ भुखमरी के दोनों प्रकारों में कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्र में मौसमी भुखमरी 16.2 से 2.6 और दीर्घकालिक 2.3 से 0.7 हो गई। शहरी क्षेत्र में भी इसी तरह कमी देखी गई।

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Q7.भारत सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A.A) किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देना
B.B) गरीब और वंचित वर्गों को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराना
C.C) खाद्यान्न का निर्यात बढ़ाना
D.D) कृषि उत्पादन में वृद्धि करना

उत्तर:

गरीब और वंचित वर्गों को सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराना

व्याख्या:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का मुख्य उद्देश्य गरीब और वंचित वर्गों को गेहूँ, चावल आदि अनाज सस्ते दामों पर उपलब्ध कराना है ताकि उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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Q8.नीचे दी गई तालिका में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अन्नपूर्णा योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की जानकारी दी गई है। निम्नलिखित में से किस योजना के तहत योग्य परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज दिया जाता है? | योजना का काम | आरंभ का वर्ष | लक्षित समूह | अद्यतन मात्रा | निर्गम कीमत (रु. प्रति कि.) | | --- | --- | --- | --- | --- | | सार्वजनिक वितरण प्रणाली | 1992 तक | सर्वजनीन | - | गेहूँ - 2.34 | | अन्नपूर्णा योजना | 2000 | दीन वरिष्ठ नागरिक | 10 कि. खाद्यान्न | निःशुल्क | | राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम | 2013 | योग्य परिवार | 5 कि. प्रति व्यक्ति प्रति माह | गेहूँ - 2.00 |
A.A) सार्वजनिक वितरण प्रणाली
B.B) अन्नपूर्णा योजना
C.C) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम
D.D) न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना

उत्तर:

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

व्याख्या:

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) के तहत योग्य परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज दिया जाता है, जो इस योजना की मुख्य विशेषता है।

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