Chapter 3
Chapter 3 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
गोदोहनम् - परिचय
व्याख्यागोदोहनम् - परिचय
‘गोदोहनम्’ संस्कृत नाटकांश 'चतुर्व्यूहम्' से संक्षिप्त रूप में लिया गया एक महत्वपूर्ण पाठ है। इस पाठ का मुख्य कथानक एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमता है जो धनवान् और सुखी बनने की इच्छा से अपनी गाय से एक महीने तक दूध निकालना बन्द कर देता है। उसका उद्देश्य होता है कि वह पूरे महीने का दूध एकत्रित कर अंत में एक बार में बेचकर अधिक लाभ अर्जित करे। परन्तु, जब वह महीने के अंत में दुग्ध दोहन के लिए प्रयास करता है, तो उसे दूध की एक बूंद भी नहीं मिलती, बल्कि गाय उसके प्रति क्रोधित होकर अपने पैरों से प्रहार करती है जिससे वह रक्तरंजित होकर गिर पड़ता है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि यदि कार्य नियत समय पर न किया जाए तो लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। इस पाठ में नाटकीय रूप में यह संदेश दिया गया है कि जीवन में कार्यों को समय पर करना आवश्यक है। विलंब से कार्य करने पर न केवल लाभ कम होता है, बल्कि हानि भी हो सकती है। इसके अतिरिक्त, पाठ में उस समय की सामाजिक व्यवस्था, स्त्री-पुरुष के पारस्परिक संबंध, और स्त्री की स्वतंत्रता का भी परिचय मिलता है। चन्दन और मल्लिका के संवादों से पता चलता है कि घर की व्यवस्था स्त्री-पुरुष मिलकर करते हैं तथा स्त्री को भी निर्णय लेने का अधिकार है।
- गोदोहनम् पाठ एक नाट्यांश 'चतुर्व्यूहम्' से लिया गया है।
- मुख्य कथानक एक व्यक्ति का है जो महीने भर दूध न निकालकर अंत में एक साथ बेचने का प्रयास करता है।
- महीने के अंत में दूध न मिलने पर वह गाय के प्रहार से आहत होता है।
- पाठ का मुख्य संदेश है कि कार्यों को नियत समय पर करना चाहिए।
- पाठ में सामाजिक और पारिवारिक जीवन की झलक भी मिलती है।
- स्त्री-पुरुष के सहयोग और स्त्री की स्वतंत्रता पर प्रकाश डाला गया है।
- 📌 गोदोहनम् - गाय से दूध निकालने की प्रक्रिया।
- 📌 नाट्यांश - नाटक का एक भाग।
- 📌 दुग्धदोहनम् - दूध दुहना।
प्रथमं दृश्यम्
व्याख्याप्रथमं दृश्यम्
प्रथमं दृश्यम् में मल्लिका मोदक (मिठाई) बना रही है और चन्दन उनका स्वाद लेना चाहता है। मल्लिका उसे रोकती है क्योंकि ये मोदक पूजन के लिए बनाए गए हैं। चन्दन मल्लिका से पूछता है कि वह कहाँ जा रही है, तो मल्लिका बताती है कि वह अपनी सहेलियों के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर गंगा स्नान और धर्मयात्रा करेगी। चन्दन को यह बात पसंद नहीं आती क्योंकि वह चाहता है कि मल्लिका उसके साथ रहे और घर की व्यवस्था तथा गायों की देखभाल करे। मल्लिका बताती है कि सभी सहेलियाँ जा रही हैं, इसलिए वह भी जाएगी और सप्ताहांत में वापस आएगी। तब चन्दन मल्लिका को घर की व्यवस्था और गायों के दुग्ध दोहन की जिम्मेदारी सौंपता है। इस दृश्य से पता चलता है कि मल्लिका धार्मिक कर्तव्यों को महत्व देती है और चन्दन घरेलू कार्यों की चिंता करता है। दोनों के बीच संवाद से सामाजिक और पारिवारिक जीवन की झलक मिलती है।
- मल्लिका मोदक बनाती है जो पूजन के लिए हैं।
- चन्दन मोदक का स्वाद लेना चाहता है पर मल्लिका उसे रोकती है।
- मल्लिका काशी विश्वनाथ मंदिर गंगा स्नान और धर्मयात्रा के लिए जा रही है।
- चन्दन को मल्लिका का जाना पसंद नहीं आता।
- मल्लिका सप्ताहांत में वापस आने का आश्वासन देती है।
- चन्दन घर की व्यवस्था और गायों की देखभाल का प्रबंध करता है।
- 📌 मोदक - मिठाई।
- 📌 पूजन - धार्मिक अनुष्ठान।
- 📌 धर्मयात्रा - धार्मिक यात्रा।
द्वितीयं दृश्यम्
व्याख्याद्वितीयं दृश्यम्
द्वितीयं दृश्यम् में मल्लिका धर्मयात्रा पर चली जाती है और चन्दन घर पर रहकर गायों की सेवा करता है। वह दुग्ध दोहन करता है और घर के अन्य कार्यों का प्रबंध करता है। उमा, चन्दन की भतीजी, आती है और बताती है कि पितामह ने एक महीने बाद घर में महोत्सव आयोजित क
अभ्यास प्रश्न — Chapter 3
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. एकपदेन उत्तरं लिखत- (क) मल्लिका पूजार्थ सखीभिः सह कुत्र गच्छति स्म? (ख) उमायाः पितामहेन कतिसेटकमितं दुग्धम् अपेक्ष्यते स्म? (ग) कुम्भकारः घटान् किमर्थ रचयति? (घ) कानि चन्दनस्य जिह्वालोलुपतां वर्धयन्ति स्म? (ङ) नन्दिन्याः पादप्रहारैः कः रक्तरञ्चितः अभवत्?
उत्तर:
उत्तर: (क) काशीविश्वनाथमन्दिरम्। (ख) त्रिसेटकमितं दुग्धम्। (ग) पूजानिमित्तम्। (घ) मोदकानि। (ङ) चन्दनः।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार एक शब्द में दिया गया है: (क) मल्लिका अपनी सखियों के साथ पूजार्थ काशीविश्वनाथमन्दिर जाती थी। (ख) उमायाः पितामहेन त्रिसेटकमितं दुग्धम् अपेक्ष्य था। (ग) कुम्भकारः घटों को पूजन के लिए बनाता है। (घ) मोदक चन्दन की जिह्वा की लोलुपता को बढ़ाते हैं। (ङ) नन्दिनी के पाँव के प्रहार से चन्दन रक्तरञ्जित हुआ।
Q2.2. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत- (क) काल: कस्य रसं पिबति? (ख) घटमूल्यार्थ यदा मल्लिका स्वाभूषणं दातुं प्रयतते तदा कुम्भकारः किं वदति? (ग) मल्लिका चन्दनश्च मासपर्यन्तं धेनोः सेवां कथम् अकुरुताम्? (घ) मल्लिकया किं दृष्ट्रा धेनोः ताडनस्य वास्तविक कारणं ज्ञातम्? (ङ) मासपर्यन्तं धेनोः अदोहनस्य कि कारणमासीत्?
उत्तर:
उत्तर: (क) कालः सर्वस्य रसं पिबति। (ख) कुम्भकारः कहता है कि मूल्य तो दूध बेचकर ही दिया जा सकता है। (ग) मल्लिका और चन्दन दोनों ने मासपर्यन्तं धेनु की सेवा की। (घ) मल्लिका ने देखा कि धेनु के ताड़न का वास्तविक कारण मासपर्यन्तं दूध न दुहना था। (ङ) मासपर्यन्तं धेनु का अदोहन इसलिए किया गया क्योंकि उत्सव के लिए अधिक दूध एकत्र करना था।
व्याख्या:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार पूर्ण वाक्य में दिया गया है। (क) काल (समय) सबका रस पी जाता है, अर्थात् समय के साथ सबका महत्व कम हो जाता है। (ख) जब मल्लिका अपने आभूषण घट के मूल्य में देना चाहती है, तो कुम्भकार कहता है कि मूल्य तो दूध बेचकर ही दिया जा सकता है। (ग) मल्लिका और चन्दन दोनों ने मासभर गाय की सेवा की थी। (घ) मल्लिका ने देखा कि गाय के ताड़न का असली कारण मासभर दूध न दुहना था। (ङ) उत्सव के लिए अधिक दूध एकत्र करने हेतु मासभर गाय का दूध नहीं दुहा गया।
Q3.3. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत - (क) मल्लिका सखीभिः सह धर्मयात्रायै गच्छति स्म। (ख) चन्दन: दुग्धदोहनं कृत्वा एवं स्वप्रातराशस्य प्रबन्धम् अकरोत्। (ग) मोदकानि पूजानिमित्तानि रचितानि आसन्? (घ) मल्लिका स्वपतिं चतुरतमं मन्यते? (ङ) नन्दिनी पादाभ्यां ताडयित्वा चन्दनं रक्तरज्जितं करोति?
उत्तर:
उत्तर: (क) मल्लिका सखीभिः सह धर्मयात्रायै कुत्र गच्छति स्म? (ख) चन्दनः दुग्धदोहनं कृत्वा किं प्रबन्धम् अकरोत्? (ग) मोदकानि किमर्थ रचितानि आसन्? (घ) मल्लिका स्वपतिं किमर्थ चतुरतमं मन्यते? (ङ) नन्दिनी पादाभ्यां कं ताडयित्वा रक्तरज्जितं करोति?
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य में रेखांकित पद के आधार पर प्रश्न बनाए गए हैं। (क) 'धर्मयात्रायै' के आधार पर प्रश्न: मल्लिका सखीभिः सह धर्मयात्रायै कुत्र गच्छति स्म? (ख) 'दुग्धदोहनं' के आधार पर: चन्दनः दुग्धदोहनं कृत्वा किं प्रबन्धम् अकरोत्? (ग) 'पूजानिमित्तानि' के आधार पर: मोदकानि किमर्थ रचितानि आसन्? (घ) 'चतुरतमं' के आधार पर: मल्लिका स्वपतिं किमर्थ चतुरतमं मन्यते? (ङ) 'रक्तरज्जितं' के आधार पर: नन्दिनी पादाभ्यां कं ताडयित्वा रक्तरज्जितं करोति?
Q4.5. घटनाक्रमानुसारं लिखत - (क) सा सखीभिः सह तीर्थयात्रायै काशीविश्वनाथमन्दिरं गच्छति। (ख) उभौ नन्दिन्याः सर्वविधपरिचर्या कुरुतः। (ग) उमा मासान्ते उत्सवार्थ दुग्धस्य आवश्यकताविषये चन्दनं सूचयति। (घ) मल्लिका पूजार्थ मोदकानि रचयति। (ङ) उत्सवदिने यदा दोग्धुं प्रयत्नं करोति तदा नन्दिनी पादेन प्रहरति। (च) कार्याणि समये करणीयानि इति चन्दनः नन्दिन्याः पादप्रहारेण अवगच्छति। (छ) चन्दन: उत्सवसमये अधिकं दुग्धं प्राप्तुं मासपर्यन्तं दोहनं न करोति। (ज) चन्दनस्य पत्नी तीर्थयात्रां समाप्य गृहं प्रत्यागच्छति।
उत्तर:
उत्तर: घटनाओं का सही क्रम: (1) सा सखीभिः सह तीर्थयात्रायै काशीविश्वनाथमन्दिरं गच्छति। (2) चन्दन: उत्सवसमये अधिकं दुग्धं प्राप्तुं मासपर्यन्तं दोहनं न करोति। (3) उभौ नन्दिन्याः सर्वविधपरिचर्या कुरुतः। (4) उमा मासान्ते उत्सवार्थ दुग्धस्य आवश्यकताविषये चन्दनं सूचयति। (5) मल्लिका पूजार्थ मोदकानि रचयति। (6) उत्सवदिने यदा दोग्धुं प्रयत्नं करोति तदा नन्दिनी पादेन प्रहरति। (7) कार्याणि समये करणीयानि इति चन्दनः नन्दिन्याः पादप्रहारेण अवगच्छति। (8) चन्दनस्य पत्नी तीर्थयात्रां समाप्य गृहं प्रत्यागच्छति।
व्याख्या:
प्रत्येक घटना को पाठ के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित किया गया है। पहले मल्लिका तीर्थयात्रा पर जाती है, फिर चन्दन दूध एकत्र करने के लिए मासभर दोहन नहीं करता, दोनों गाय की सेवा करते हैं, उत्सव के लिए दूध की आवश्यकता बताई जाती है, मोदक बनते हैं, उत्सव के दिन गाय चन्दन को मारती है, चन्दन को समय पर कार्य करने का महत्व समझ आता है, और अंत में मल्लिका लौटती है।
Q5.6. अधोलिखितानि वाक्यानि कः कं प्रति कथयति इति प्रदत्तस्थाने लिखत- उदाहरणम्- कः/का कं/काम् स्वामिन्! प्रत्यागता अहम्। आस्वादय प्रसादम्। (क) धन्यवाद मातुल! याम्यधुना। (ख) त्रिसेटकमितं दुग्धम्। शोभनम्। व्यवस्था भविष्यति। (ग) मूल्यं तु दुग्धं विक्रीयैव दातुं शक्यते। (घ) पुत्रिके! नाहं पापकर्म करोमि। (ङ) देवि! मयापि ज्ञातं यदस्माभिः सर्वथानुचितं कृतम्।
उत्तर:
उत्तर: (क) मल्लिका — चन्दनं प्रति (ख) उमा — चन्दनं प्रति (ग) कुम्भकारः — मल्लिकां प्रति (घ) चन्दनः — मल्लिकां प्रति (ङ) चन्दनः — उमां प्रति
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य के अनुसार कौन किससे कह रहा है, यह पाठ के संवादों के आधार पर लिखा गया है। (क) धन्यवाद मातुल! — मल्लिका अपने पति चन्दन से कहती है। (ख) त्रिसेटकमितं दुग्धम् — उमा चन्दन से कहती है। (ग) मूल्यं तु दुग्धं विक्रीयैव — कुम्भकार मल्लिका से कहता है। (घ) पुत्रिके! नाहं पापकर्म करोमि — चन्दन मल्लिका से कहता है। (ङ) देवि! मयापि ज्ञातं — चन्दन उमा से कहता है।
Q6.7. पाठस्य आधारेण प्रदत्तपदानां सन्धिं/सन्धिच्छेदं वा कुरूत - (क) शिवास्ते = + (ख) मनः हरः = + (ग) सप्ताहान्ते + (घ) नेच्छामि + (ङ) अत्युत्तमः + (अ) पाठाधारेण अधोलिखितपदानां प्रकृतिं प्रत्ययं च संयोज्य/विभाज्य वा लिखत- (क) करणीयम् = + (ख) वि+क्री+ल्यप् = (ग) पठितम् = + (घ) तड्य+क्त्वा = (ङ) दोग्धुम् = +
उत्तर:
उत्तर: (क) शिवास्ते = शिवाः + ते (ख) मनः हरः = मनः + हरः (ग) सप्ताहान्ते = सप्ताह + अन्ते (घ) नेच्छामि = न + इच्छामि (ङ) अत्युत्तमः = अति + उत्तमः (अ) करणीयम् = कृ (प्रकृति) + णीय (प्रत्यय) (ख) विक्रीत = वि (उपसर्ग) + क्री (धातु) + ल्यप् (प्रत्यय) (ग) पठितम् = पठ् (धातु) + क्त (प्रत्यय) (घ) ताडयित्वा = ताडय् (धातु) + क्त्वा (प्रत्यय) (ङ) दोग्धुम् = दुह् (धातु) + तुमुन् (प्रत्यय)
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द का सन्धि/सन्धिच्छेद और प्रकृति-प्रत्यय पाठ के अनुसार विभाजित किया गया है। सन्धि: (क) शिवास्ते = शिवाः + ते (ख) मनः हरः = मनः + हरः (ग) सप्ताहान्ते = सप्ताह + अन्ते (घ) नेच्छामि = न + इच्छामि (ङ) अत्युत्तमः = अति + उत्तमः प्रकृति-प्रत्यय: (क) करणीयम् = कृ + णीय (ख) विक्रीत = वि + क्री + ल्यप् (ग) पठितम् = पठ् + क्त (घ) ताडयित्वा = ताडय् + क्त्वा (ङ) दोग्धुम् = दुह् + तुमुन्
Q7.गोदोहनम् एकांकी में मुख्य पात्र कौन है, जो धनवान बनने की इच्छा से मासपर्यन्त दुग्धदोहन से विराम लेता है?
उत्तर:
चन्दन
व्याख्या:
चन्दन मुख्य पात्र है, जो मासपर्यन्त दुग्धदोहन से विराम लेकर अधिक धन अर्जित करने की इच्छा रखता है।
Q8.मल्लिका मोदक किस उद्देश्य से बनाती है?
उत्तर:
पूजन के लिए
व्याख्या:
मल्लिका मोदक पूजन के लिए बनाती है, जैसा कि पाठ में स्पष्ट है।
Shemushi Prathmo Bhag के सभी 16 अध्याय
Sanskrit · Class 9
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