NCERTCh 3निःशुल्क

Chapter 3

🎓 Class 12📖 Manovigyan📖 11 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~17 मिनट
Chapter 2अध्याय 3 / 7Chapter 4

Chapter 3अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय की शुरुआत एक जीवंत उदाहरण से होती है जिसमें राज नामक छात्र अपनी अंतिम परीक्षा की तैयारी के दौरान अत्यधिक तनावग्रस्त है। राज की स्थिति से हम समझ सकते हैं कि जीवन में हर व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की चुनौतियों और दबावों का सामना करना पड़ता है। राज की परीक्षा की तैयारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति, शारीरिक लक्षण जैसे सिर भारी होना, नाश्ता न कर पाना, हाथों का पसीना आना आदि, दबाव के प्रभावों को दर्शाते हैं। जीवन की चुनौतियाँ केवल परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर व्यक्ति के जीवन में विभिन्न रूपों में आती हैं, जैसे कि माता-पिता की मृत्यु, परिवार की आर्थिक समस्याएँ, शारीरिक या मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बच्चे का पालन-पोषण, या काम के दबाव। यह अध्याय यह समझने का प्रयास करता है कि कैसे व्यक्ति इन चुनौतियों और दबावपूर्ण परिस्थितियों का सामना करता है। दबाव न केवल नकारात्मक होता है, बल्कि उचित प्रबंधन से यह व्यक्ति की क्षमता और प्रदर्शन को बढ़ावा भी दे सकता है। इस प्रकार, जीवन की चुनौतियाँ और दबाव व्यक्ति और उसके पर्यावरण के बीच एक सतत संवाद प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

  • राज का उदाहरण जीवन में दबाव की वास्तविकता को दर्शाता है।
  • जीवन की चुनौतियाँ हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होती हैं।
  • दबाव केवल नकारात्मक नहीं होता, बल्कि यह ऊर्जा और प्रेरणा भी प्रदान करता है।
  • व्यक्ति की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण दबाव के प्रभाव को निर्धारित करता है।
  • जीवन की चुनौतियाँ व्यक्ति और पर्यावरण के बीच निरंतर संवाद की प्रक्रिया हैं।
  • 📌 दबाव (Stress): व्यक्ति और पर्यावरण के बीच उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति।
  • 📌 चुनौतियाँ: जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ जो दबाव उत्पन्न करती हैं।

दबाव की प्रकृति, प्रकार एवं स्रोत

व्याख्या

दबाव की प्रकृति, प्रकार एवं स्रोत

दबाव (Stress) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति और उसके पर्यावरण के बीच निरंतर संवाद होता है। यह न केवल बाहरी घटनाओं के कारण उत्पन्न होता है, बल्कि व्यक्ति की उन घटनाओं को कैसे देखता है और उनसे निपटने की उसकी क्षमता पर भी निर्भर करता है। दबावकारक (Stressor) वे घटनाएँ या परिस्थितियाँ होती हैं जो व्यक्ति में दबाव उत्पन्न करती हैं, जैसे शोर, भीड़, खराब संबंध, या रोज़ाना की दिनचर्या। दबाव के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं: भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव, मनोवैज्ञानिक दबाव, और सामाजिक दबाव। भौतिक दबाव में शारीरिक परिश्रम, चोट, पोषण की कमी, और पर्यावरणीय कारक जैसे शोर, प्रदूषण, गर्मी या ठंड शामिल हैं। मनोवैज्ञानिक दबाव वे होते हैं जो व्यक्ति के मन में उत्पन्न होते हैं, जैसे कुंठा, दूंढ, आंतरिक दबाव और सामाजिक दबाव। सामाजिक दबाव वे होते हैं जो अन्य लोगों के साथ हमारी अंतःक्रियाओं से उत्पन्न होते हैं, जैसे परिवार में तनाव, मित्रों से संबंध टूटना आदि। दबाव का अनुभव व्यक्ति की संज्ञानात्मक मूल्यांकन प्रक्रिया पर निर्भर करता है, जिसमें प्राथमिक मूल्यांकन (घटना का सकारात्मक, तटस्थ या नकारात्मक मूल्यांकन) और द्वितीयक मूल्यांकन (संसाधनों और सामना करने की क्षमता का मूल्यांकन) शामिल हैं। यदि व्यक्ति को लगता है कि वह दबावपूर्ण स्थिति से निपट सकता है तो दबाव कम अनुभव होता है। दबाव के संकेत और लक्षण व्यक्ति-व्यक्ति भिन्न होते हैं और शारीरिक, संवेगात्मक तथा व्यवहारात्मक हो सकते हैं।

  • दबाव व्यक्ति और पर्यावरण के बीच एक सतत संवाद प्रक्रिया है।
  • दबावकारक वे घटनाएँ हैं जो दबाव उत्पन्न करती हैं।
  • दबाव के तीन प्रकार हैं: भौतिक एवं पर्यावरणीय, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक।
  • दबाव का अनुभव संज्ञानात्मक मूल्यांकन पर निर्भर करता है।
  • प्राथमिक और द्वितीयक मूल्यांकन दबाव की तीव्रता निर्धारित करते हैं।
  • दबाव के लक्षण शारीरिक, संवेगात्मक और व्यवहारात्मक हो सकते हैं।
  • 📌 दबावकारक (Stressor): दबाव उत्पन्न करने वाली घटनाएँ या परिस्थितियाँ।
  • 📌 प्राथमिक मूल्यांकन (Primary Appraisal): घटना के सकारात्मक, तटस्थ या नकारात्मक होने का मूल्यांकन।
  • 📌 द्वितीयक मूल्यांकन (Secondary Appraisal): संसाधनों और सामना करने की क्षमता का मूल्यांकन।

दबाव के प्रकार

व्याख्या

दबाव के प्रकार

दबाव के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं: भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव, मनोवैज्ञानिक दबाव, और सामाजिक दबाव। 1. भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव: ये वे दबाव हैं जो हमारे शरीर की शारीरिक दशा को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, अत्यधिक शारीरिक परिश्रम, चोट लगना, पोषण

अभ्यास प्रश्नChapter 3

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.क्रियाकलाप 3.2 ऐसी दबावपूर्ण घटनाओं की पहचान कीजिए, जिनको आपने तथा आपके दो सहपाठियों ने पिछले एक वर्ष में अनुभव किया हो। दबावपूर्ण घटनाओं को सूचीबद्ध कीजिए तथा उन्हें 1 से 5 तक इस प्रकार कोटि-क्रम में रखिए जितना उन्होंने आपके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाला हो। इसके पश्चात उन घटनाओं का चयन कीजिए जो आपमें तथा आपके दोनों सहपाठियों में एक समान हों। ज्ञात कीजिए कि आपको तथा आपके मित्रों को किस सीमा तक इसमें से प्रत्येक दबाव का सामना करने के लिए योग्यता, कौशल तथा पारिवारिक सहायता उपलब्ध है। इन परिणामों पर अपने अध्यापक के साथ विचार-विमर्श कीजिए।

उत्तर:

यह क्रियाकलाप एक अनुभवात्मक अभ्यास है जिसमें विद्यार्थी स्वयं और उनके दो सहपाठी पिछले एक वर्ष में अनुभव की गई दबावपूर्ण घटनाओं की पहचान करते हैं। वे उन घटनाओं को सूचीबद्ध करते हैं और उन्हें 1 से 5 तक कोटि-क्रम में रखते हैं, जहाँ 1 सबसे कम और 5 सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव दर्शाता है। इसके बाद वे उन घटनाओं का चयन करते हैं जो तीनों में समान हों और चर्चा करते हैं कि प्रत्येक दबाव का सामना करने के लिए उनके पास कितनी योग्यता, कौशल और पारिवारिक सहायता उपलब्ध है। अंत में, वे अपने अध्यापक के साथ इन परिणामों पर विचार-विमर्श करते हैं।

व्याख्या:

यह क्रियाकलाप विद्यार्थियों को स्वयं के अनुभवों के माध्यम से दबावपूर्ण जीवन घटनाओं को समझने और उनका विश्लेषण करने में मदद करता है। कोटि-क्रम में घटनाओं को रखना उनके प्रभाव की तुलना करने में सहायक होता है। सहपाठियों के साथ साझा करना और अध्यापक से चर्चा करना उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है और दबाव से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों की पहचान करता है।

MediumNCERT
Q2.राज नामक छात्र अपनी अंतिम परीक्षा के लिए अत्यधिक तनावग्रस्त है। परीक्षा के दौरान उसके शरीर में कौन-कौन से शारीरिक लक्षण प्रकट होते हैं जो दबाव के प्रभाव को दर्शाते हैं?
A.A) सिर भारी होना, नाश्ता न कर पाना, हाथों का पसीना आना
B.B) भूख लगना, उत्साह बढ़ना, नींद आना
C.C) शरीर में गर्मी महसूस होना, हँसना, ध्यान केंद्रित करना
D.D) आराम महसूस करना, ऊर्जा में वृद्धि, हल्का मूड

उत्तर:

सिर भारी होना, नाश्ता न कर पाना, हाथों का पसीना आना

व्याख्या:

राज के अनुभव में सिर भारी होना, नाश्ता न कर पाना और हाथों का पसीना आना दबाव के शारीरिक लक्षण हैं। ये लक्षण तनाव के दौरान शरीर की प्रतिक्रिया को दर्शाते हैं, जैसे हृदय की धड़कन तेज होना और पसीना आना।

Easy
Q3.दबाव (Stress) की परिभाषा क्या है और यह व्यक्ति के व्यवहार और स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करता है?

उत्तर:

दबाव वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति और उसके पर्यावरण के बीच निरंतर संवाद होता है और जो व्यक्ति की साम्यावस्था में व्यवधान उत्पन्न करता है। यह व्यक्ति के व्यवहार, संवेगात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, अत्यधिक दबाव से अवसाद और शारीरिक रोग हो सकते हैं।

व्याख्या:

दबाव का अर्थ है किसी भी माँग के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया जो व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। दबाव के कारण व्यक्ति में नकारात्मक भावनाएँ, शरीरक्रियात्मक परिवर्तन और व्यवहार में बदलाव आते हैं, जो स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।

Medium
Q4.निम्नलिखित में से कौन-से दबाव के प्रकार हैं जो व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं?
A.A) भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव
B.B) संवेगात्मक दबाव
C.C) संज्ञानात्मक दबाव
D.D) व्यवहारात्मक दबाव

उत्तर:

भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव

व्याख्या:

भौतिक एवं पर्यावरणीय दबाव वे दबाव हैं जो व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, जैसे अत्यधिक परिश्रम, चोट, पोषण की कमी, वायु प्रदूषण, शोर आदि। संवेगात्मक, संज्ञानात्मक और व्यवहारात्मक दबाव व्यक्ति के मानसिक और व्यवहारिक पहलुओं से संबंधित हैं।

Easy
Q5.चित्र 3.1 में दबाव का मनोवैज्ञानिक अर्थ दर्शाया गया है। इस चित्र के अनुसार, दबावकारक और तनाव के बीच क्या संबंध होता है? कृपया चित्र का वर्णन करते हुए समझाइए।

उत्तर:

चित्र 3.1 में दबावकारक (stressor) वे घटनाएँ हैं जो व्यक्ति में दबाव उत्पन्न करती हैं, जैसे शोर, भीड़, खराब संबंध। व्यक्ति की प्रतिक्रिया को तनाव (strain) कहा जाता है जो दबावकारक के प्रति होती है। इस प्रकार, दबावकारक तनाव उत्पन्न करते हैं और व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक प्रतिक्रियाएँ तनाव के रूप में प्रकट होती हैं।

व्याख्या:

चित्र 3.1 में दिखाया गया है कि दबावकारक वे बाह्य या आंतरिक घटनाएँ हैं जो व्यक्ति में दबाव उत्पन्न करती हैं। व्यक्ति इन दबावकारकों के प्रति तनाव की प्रतिक्रिया देता है, जो शारीरिक, संवेगात्मक और व्यवहारिक हो सकती है। यह चित्र दबाव और तनाव के बीच के संबंध को स्पष्ट करता है।

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Q6.लेजारस के संज्ञानात्मक सिद्धांत के अनुसार, दबावपूर्ण परिस्थिति के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया किन दो प्रकार के मूल्यांकन पर निर्भर करती है? प्रत्येक का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:

लेजारस के अनुसार, दबावपूर्ण परिस्थिति के प्रति प्रतिक्रिया दो प्रकार के मूल्यांकन पर निर्भर करती है: 1. प्राथमिक मूल्यांकन: घटना के सकारात्मक, तटस्थ या नकारात्मक होने का मूल्यांकन। 2. द्वितीयक मूल्यांकन: व्यक्ति की सामना करने की क्षमता और संसाधनों का मूल्यांकन। उदाहरण के लिए, यदि व्यक्ति समझता है कि वह स्थिति से निपट सकता है तो दबाव कम होगा।

व्याख्या:

प्राथमिक मूल्यांकन में व्यक्ति यह निर्णय करता है कि कोई घटना खतरा, नुकसान या चुनौती है या नहीं। द्वितीयक मूल्यांकन में व्यक्ति अपने संसाधनों और क्षमताओं का आकलन करता है कि क्या वह उस स्थिति से निपट सकता है। ये दोनों मूल्यांकन मिलकर दबाव की अनुभूति को निर्धारित करते हैं।

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Q7.कौन-से कारक दबाव के अनुभव को प्रभावित करते हैं? निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:
A.A) पूर्व अनुभव, परिस्थिति का नियंत्रण, शारीरिक स्वास्थ्य
B.B) केवल व्यक्ति की उम्र
C.C) केवल सामाजिक समर्थन
D.D) केवल आर्थिक स्थिति

उत्तर:

पूर्व अनुभव, परिस्थिति का नियंत्रण, शारीरिक स्वास्थ्य

व्याख्या:

दबाव के अनुभव को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं: व्यक्ति का पूर्व अनुभव, परिस्थिति पर उसका नियंत्रण या प्रभुत्व, और उसका शारीरिक स्वास्थ्य। ये कारक निर्धारित करते हैं कि व्यक्ति दबाव को कैसे महसूस करता है। केवल एक कारक दबाव अनुभव को पूरी तरह प्रभावित नहीं करता।

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Q8.दबाव के शारीरिक, संवेगात्मक और व्यवहारिक लक्षणों में कौन-कौन से शामिल हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

(a) शारीरिक लक्षण: सिरदर्द, कमर दर्द, पेट खराब होना आदि। (b) संवेगात्मक लक्षण: भय, क्रोध, अवसाद, दुर्शिचता। (c) व्यवहारिक लक्षण: ध्यान केंद्रित न कर पाना, स्मृति ह्रास, औषधियों का दुरुपयोग, अनियमित नींद। उदाहरण के लिए, परीक्षा के समय विद्यार्थी को भय और ध्यान की कमी हो सकती है, जो उसके प्रदर्शन को प्रभावित करती है।

व्याख्या:

दबाव के शारीरिक लक्षणों में सिरदर्द, पेट खराब होना, कमर दर्द शामिल हैं। संवेगात्मक लक्षणों में भय, अवसाद, क्रोध आते हैं। व्यवहारिक लक्षणों में ध्यान की कमी, स्मृति ह्रास, औषधि दुरुपयोग आदि आते हैं। ये लक्षण दबाव की तीव्रता और प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

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