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Chapter 3

🎓 Class 9📖 Ganga📖 9 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~14 min
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Chapter 3Study Notes

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शेखर जोशी

Explanation

शेखर जोशी

शेखर जोशी हिंदी के समकालीन साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि, कहानीकार, आलोचक और लेखक थे। उनका जन्म सन 1932 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में हुआ था, जो उस समय उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी गहरी पैठ बनाई और विभिन्न विधाओं में सक्रिय रहे। उनकी पहली कहानी संग्रह 'कोसी का घटवार' 1958 में प्रकाशित हुई। इसके बाद उन्होंने कई कहानी संग्रह, कविता संग्रह, संस्मरण और आलोचनात्मक ग्रंथ लिखे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'साथ के लोग', 'दाज्यू', 'हलवाहा', 'नौरंगी बीमार है', 'आदमी का डर', 'डांगरी वाले', 'मेरा पहाड़', 'एक पेड़ की याद', 'स्मृति में रहें वे', 'न रोको उन्हें शुभ्रा', और 'मेरा ओलिया गाँव' शामिल हैं। शेखर जोशी की कहानियाँ ग्रामीण और शहरी मध्यवर्गीय समाज के जीवन मूल्यों को उजागर करती हैं, साथ ही कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन संघर्षों को भी उन्होंने अपनी कहानियों में प्रमुखता से दर्शाया है। उनकी साहित्यिक यात्रा में उन्हें कई पुरस्कार मिले, जैसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का 'महावीर प्रसाद द्विवेदी पुरस्कार' और 'साहित्य भूषण सम्मान', मध्य प्रदेश शासन का 'अखिल भारतीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' तथा 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य पुरस्कार'। 2022 में उनका निधन हो गया। शेखर जोशी की रचनाएँ सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं, और जीवन के जटिल पहलुओं को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करती हैं। उनकी कहानियाँ और कविताएँ जीवन के विभिन्न रंगों को दर्शाती हैं, जिनमें प्रेम, संघर्ष, अकेलापन, आशा, और सामाजिक विसंगतियाँ प्रमुख हैं। उनकी साहित्यिक दृष्टि में समाज और मनुष्य की गहरी समझ झलकती है।

  • शेखर जोशी का जन्म 1932 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ।
  • उनकी पहली कहानी संग्रह 'कोसी का घटवार' 1958 में प्रकाशित हुई।
  • उन्होंने कविता, कहानी, संस्मरण और आलोचना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • उनकी कहानियाँ ग्रामीण-शहरी मध्यवर्गीय जीवन और मजदूरों के संघर्षों पर केंद्रित हैं।
  • उन्हें कई साहित्यिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
  • उनकी भाषा शैली सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली है।
  • 📌 कहानी संग्रह: कहानीओं का संग्रह जो किसी लेखक की रचनाओं का समूह होता है।
  • 📌 संस्मरण: लेखक के जीवन के अनुभवों और यादों का लेखन।
  • 📌 आलोचना: साहित्य की समीक्षा और विश्लेषण।

संवादहीन कहानी का परिचय और पात्र

Explanation

संवादहीन कहानी का परिचय और पात्र

कहानी 'संवादहीन' शेखर जोशी की एक संवेदनशील रचना है जो ग्रामीण वृद्ध स्त्री ताई और उसके तोते मिट्टू के बीच के संबंध को दर्शाती है। यह कहानी अकेलेपन, संवाद की आवश्यकता, और मानवीय ममता के भावों को गहराई से उजागर करती है। ताई और मिट्टू के बीच संवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक गहरा भावनात्मक बंधन है जो जीवन के सुख-दुख में सहारा बनता है। कहानी में ताई के जीवन के अच्छे दिन याद किए गए हैं जब परिवार बड़ा था, घर में बहू-बेटियाँ, नौकर-चाकर, पशु-पक्षी सब थे। धीरे-धीरे परिवार के सदस्य शहरों की ओर चले गए और घर सूना पड़ गया। ताई अकेली रह गईं और उनके अकेलेपन को मिट्टू नामक तोते ने सहारा दिया। मिट्टू ताई के लिए संवाद का माध्यम, ममता का केंद्र और जीवन का सहारा बन गया। कहानी में मिट्टू की बुद्धिमत्ता और ताई के प्रति उसकी वफादारी को भी दर्शाया गया है। मिट्टू ताई के कहे हुए शब्दों को याद रखता है और समय-समय पर उनका जवाब भी देता है। यह संवाद ताई के सूने घर को जीवन्त बनाता है। साथ ही कहानी में ताई और मिट्टू के बीच कभी-कभी नोक-झोंक भी होती है, जो उनके संबंध की वास्तविकता को दर्शाती है। यह कहानी पलायन, वृद्धावस्था में अकेलेपन, सामाजिक विसंगतियों, और आदर्श एवं यथार्थ के द्वंद्व को भी अभिव्यक्त करती है। ताई और मिट्टू के बीच का संवाद जीवन की गहराई और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

  • कहानी के मुख्य पात्र ताई और तोता मिट्टू हैं।
  • ताई के परिवार के सदस्य शहरों की ओर चले गए, जिससे घर सूना पड़ गया।
  • मिट्टू ताई के अकेलेपन का सहारा और संवाद का माध्यम है।
  • मिट्टू ताई के कहे हुए शब्दों को याद रखता है और संवाद करता है।
  • कहानी में सामाजिक विसंगतियाँ, अकेलापन और संवाद की कमी को दर्शाया गया है।
  • ताई और मिट्टू के बीच प्रेम और कभी-कभी नोक-झोंक भी होती है।
  • 📌 पलायन: किसी स्थान से दूसरे स्थान पर जाना।
  • 📌 अकेलापन: अकेले रहना, समाज से कट जाना।
  • 📌 संवाद: बातचीत या संवाद करना।

कहानी संवादहीन का विस्तृत वर्णन

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कहानी संवादहीन का विस्तृत वर्णन

कहानी में ताई के जीवन के सुख-दुख का चित्रण विस्तार से किया गया है। ताई ने अपने जीवन में अच्छे दिन देखे थे, जिसमें परिवार बड़ा था, नौकर-चाकर थे, और घर में रौनक थी। लेकिन समय के साथ परिवार के सदस्य शहरों की ओर चले गए और घर सूना पड़ गया। ताई अकेली रह गई

Practice QuestionsChapter 3

Includes NCERT exercise questions with answers

Q1.1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है? (क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता 2. जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है? (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता 3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है? (क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति 4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था? (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद 5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है? (क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता
A.1. (क) परोपकार और त्याग (ख) ममता और स्नेह (ग) करुणा और क्रोध (घ) जिज्ञासा और सहायता
B.2. (क) अनुशासन और परंपरा (ख) उदासीनता और असावधानी (ग) आत्मगौरव और विद्रोह (घ) करुणा और नैतिकता
C.3. (क) भोजन की खोज (ख) प्रेम की आकांक्षा (ग) स्वतंत्रता की चाह (घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति
D.4. (क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव (ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता (घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद
E.5. (क) मजबूरी (ख) कर्मपरायणता (ग) अकेलापन (घ) संवादधर्मिता

Answer:

1. (ख) ममता और स्नेह: ताई और मिट्टू के बीच गहरा स्नेह और ममता का संबंध है, जो कहानी में प्रमुख भाव है। 2. (घ) करुणा और नैतिकता: जगन मास्टर की करुणा से मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकाला गया। 3. (ग) स्वतंत्रता की चाह: मिट्टू का उड़ जाना स्वतंत्रता की आकांक्षा को दर्शाता है। 4. (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव: ताई के दुख का मुख्य कारण परिवार से दूरी और संवादहीनता है। 5. (ग) अकेलापन: कहानी में मानव समाज में व्याप्त अकेलापन उजागर किया गया है।

Explanation:

प्रत्येक प्रश्न के विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कहानी के भाव और पात्रों के व्यवहार के आधार पर किया गया है। ताई और मिट्टू के बीच ममता का संबंध स्पष्ट है। जगन मास्टर की करुणा से मिट्टू को आज़ादी मिली। मिट्टू की उड़ान स्वतंत्रता की चाह को दर्शाती है। ताई के दुख का कारण परिवार से दूरी है। अंत में कहानी समाज में व्याप्त अकेलेपन को उजागर करती है।

EasyNCERT
Q2.1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं? 2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया!” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है? 3. “ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी!” क्यों? 4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं!” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है? 5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे!” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। 6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है— ताई, जगन मास्टर, मिट्टू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए। 7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे!” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

Answer:

1. ताई यहाँ अपने जीवन की कठिनाइयों और समस्याओं को पार करने के लिए ‘नैया’ का रूपक इस्तेमाल कर रही हैं। वे कह रही हैं कि जीवन की परेशानियाँ कैसे खत्म होंगी। 2. यह वाक्य ताई के जीवन में सब कुछ पराए, यानी दूसरों के नियंत्रण में चले जाने की ओर संकेत करता है। 3. ताई की सारी ममता मिट्टू पर इसलिए बरस पड़ी क्योंकि मिट्टू ही ताई का एकमात्र सहारा और स्नेह का स्रोत था। 4. यह वाक्य ताई के जागरूक और सूक्ष्म दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिससे पता चलता है कि वह अब अपने परिवेश से जुड़ी हुई है और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देती है। 5. जगन मास्टर एक संवेदनशील और करुणामय व्यक्ति थे, जो मिट्टू की आज़ादी के लिए प्रयास करते हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालने की कोशिश की। 6. शीर्षक ‘संवादहीन’ ताई के लिए सबसे सार्थक है क्योंकि वह अपने परिवार और समाज से संवादहीन है, जिससे उसका अकेलापन बढ़ता है। 7. ताई के बड़े घर को सूना खंडहर इसलिए कहा गया क्योंकि वह घर अब खाली और वीरान हो गया है, जहाँ कोई नहीं रहता और जो ताई के अकेलेपन को दर्शाता है।

Explanation:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर कहानी के भाव, पात्रों के व्यवहार और कथानक के आधार पर दिया गया है। ताई की व्यथा और अकेलापन, जगन मास्टर की करुणा, और कहानी के शीर्षक का अर्थ स्पष्ट किया गया है।

MediumNCERT
Q3.1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया। प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था? 2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था? प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? 3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे? 4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है? प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

Answer:

1. प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? — उत्तर उपयुक्त है क्योंकि यह ताई के अकेलेपन में सहारा देने वाले का पता लगाता है। प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था? — यह उत्तर से मेल नहीं खाता क्योंकि यह ताई के अकेलेपन के सहारे से संबंधित नहीं है। 2. प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? — उत्तर के अनुसार सही प्रश्न है क्योंकि यह मिट्टू के उड़ जाने की घटना से जुड़ा है। प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था? — यह प्रश्न उत्तर के विपरीत है। 3. प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? — यह प्रश्न उत्तर के अनुरूप है क्योंकि गाँववालों के डर का कारण जानना है। प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे? — यह प्रश्न उत्तर से मेल नहीं खाता। 4. प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? — यह प्रश्न उत्तर के अनुरूप है क्योंकि यह शीर्षक के अर्थ को समझने के लिए है। प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है? — यह प्रश्न उत्तर के विपरीत है।

Explanation:

प्रत्येक उत्तर के लिए उपयुक्त प्रश्न का चयन किया गया है जो उत्तर के भाव और विषय से मेल खाता है। गलत प्रश्नों को असंगत पाया गया।

MediumNCERT
Q4.1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं...” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है? 2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए। 3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके...” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए। 4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए। 5. “मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

Answer:

यह प्रश्न विद्यार्थियों के अनुभवों पर आधारित हैं, अतः इनके उत्तर व्यक्तिगत होंगे। उदाहरण स्वरूप— 1. जब हम अपने परिवार से दूर होते हैं, तो किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति की चिंता हमें मानसिक रूप से व्यथित कर सकती है, जिससे मन बेचैन रहता है। 2. पशु-पक्षियों में संवेदनाएँ होती हैं, जैसे मैंने देखा है कि मेरा कुत्ता दुखी होने पर रोता है या खुशी में पूंछ हिलाता है। 3. ताई को भ्रम में रखना उचित नहीं था क्योंकि इससे उनकी भावनाओं के साथ अन्याय हुआ। ईमानदारी से स्थिति बताना बेहतर था। 4. कभी-कभी हम कुछ सोचते हैं, पर परिणाम अलग होता है, जैसे परीक्षा की तैयारी अच्छी थी पर परिणाम अपेक्षा के विपरीत आया। 5. प्राणी पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं, जैसे पालतू पक्षी या जानवर जो लंबे समय तक पिंजरे में रहने के बाद बाहर जाने से डरते हैं।

Explanation:

प्रश्न विद्यार्थियों के अनुभव और विचारों पर आधारित हैं, इसलिए उत्तर व्यक्तिगत और तर्कसंगत होने चाहिए।

MediumNCERT
Q5.कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए— विशेष बिंदु: 1. चित्रात्मकता (दृश्य बिंब): शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना। 2. संवादात्मकता: कथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग। 3. पुनरुक्ति: शब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता। 4. अतिशयोक्ति: किसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे। 5. लोकधर्मी भाषा: ग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा। 6. प्रश्नोत्तर शैली: पात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना।

Answer:

विद्यार्थी कहानी से प्रत्येक विशेष बिंदु के लिए उपयुक्त उदाहरण स्वयं खोजकर लिखेंगे। उदाहरण स्वरूप— 1. चित्रात्मकता: मिट्टू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे। 2. संवादात्मकता: “राम-राम कहो, सीताराम कहो।” 3. पुनरुक्ति: “कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!!” 4. अतिशयोक्ति: रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है। 5. लोकधर्मी भाषा: भगवान! कैसे नैया पार लगेगी? 6. प्रश्नोत्तर शैली: मिट्टू! अब कैसे कटेगी?

Explanation:

यह प्रश्न कहानी के साहित्यिक तत्वों को समझने और पहचानने के लिए है। विद्यार्थी को कहानी से उदाहरण लेकर प्रत्येक बिंदु स्पष्ट करना होगा।

MediumNCERT
Q6.आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

Answer:

‘संवादहीन’ कहानी का अंत यथार्थवादी और दुखांत श्रेणी में रखा जा सकता है क्योंकि यह जीवन की सच्चाई और ताई के अकेलेपन को दर्शाता है। कहानी का अंत स्पष्ट नहीं है, परन्तु ताई और मिट्टू के बीच संवादहीनता और दूरी को उजागर करता है। नया अंत इस प्रकार हो सकता है कि ताई और गाँव के लोग संवाद स्थापित करें, मिट्टू की आज़ादी और ताई के अकेलेपन का समाधान हो, जिससे कहानी में सकारात्मकता और संवाद की महत्ता सामने आए।

Explanation:

कहानी के अंत की श्रेणी उसके भाव और कथानक के अनुसार निर्धारित की जाती है। यहाँ अंत दुखांत और यथार्थवादी है क्योंकि यह जीवन की कठिनाइयों को दर्शाता है। नया अंत सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करता है।

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Q7.शेखर जोशी का जन्म कब हुआ था?
A.A) 1938
B.B) 1945
C.C) 1925
D.D) 1950

Answer:

1938

Explanation:

शेखर जोशी का जन्म वर्ष 1938 में हुआ था, जो हिंदी के समकालीन कवि, लेखक और आलोचक हैं।

Easy
Q8.शेखर जोशी की रचनाओं में किन विषयों को प्रमुखता से छुआ गया है?
A.A) सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विषय
B.B) केवल धार्मिक विषय
C.C) विज्ञान और तकनीक
D.D) खेल और मनोरंजन

Answer:

सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विषय

Explanation:

शेखर जोशी की रचनाएँ सामाजिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विषयों को छूती हैं, जो उनके साहित्य की विशेषता है।

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