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Chapter 18

🎓 Class 11📖 Jeev Vigyan📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
Chapter 17अध्याय 18 / 19Chapter 19

Chapter 18अध्ययन नोट्स

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18.1 तंत्रिकीय तंत्र

व्याख्या

18.1 तंत्रिकीय तंत्र

तंत्रिकीय तंत्र जीवों के शरीर में त्वरित समन्वय स्थापित करने वाला एक जाल तंत्र होता है, जो विशेष प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है जिन्हें तंत्रिकोशिका (न्यूरॉन) कहा जाता है। ये कोशिकाएं विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों को पहचानने, ग्रहण करने और संचरित करने में सक्षम होती हैं। सरल जीवों जैसे हाइड्रा में तंत्रिकीय तंत्र जाल के रूप में पाया जाता है, जबकि कीटों में यह अधिक व्यवस्थित होता है और मस्तिष्क तथा तंत्रिकीय गुच्छिकाओं से मिलकर बनता है। क्षेत्रकी प्राणियों में तंत्रिका तंत्र अधिक विकसित होता है, जिससे वे जटिल क्रियाएं कर पाते हैं। तंत्रिकीय तंत्र का कार्य शरीर के विभिन्न अंगों और तंत्रों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान कर समन्वय स्थापित करना है। यह त्वरित प्रतिक्रिया के लिए उपयुक्त होता है, जिससे जीव पर्यावरणीय परिवर्तनों के अनुसार उचित क्रियाएं कर पाते हैं। तंत्रिकीय तंत्र के साथ-साथ अंतःस्रावी तंत्र भी शरीर में समन्वय स्थापित करता है, लेकिन वह हार्मोन के माध्यम से रासायनिक समन्वय करता है, जो अपेक्षाकृत धीमा होता है। इस अध्याय में तंत्रिकीय तंत्र की संरचना, कार्य, तंत्रिका आवेग का संचरण, सिनेप्स की भूमिका तथा मानव मस्तिष्क और मेरूरज्जु की संरचना का अध्ययन किया जाएगा।

  • तंत्रिकीय तंत्र त्वरित समन्वय के लिए विशेष कोशिकाओं (न्यूरॉन) से बना होता है।
  • सरल जीवों में तंत्रिकीय तंत्र जाल के रूप में होता है, जटिल जीवों में अधिक संगठित।
  • तंत्रिकीय तंत्र शरीर के अंगों के कार्यों में समन्वय स्थापित करता है।
  • अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन द्वारा रासायनिक समन्वय करता है, जो धीमा होता है।
  • तंत्रिकीय तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र मिलकर शरीर की क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
  • 📌 तंत्रिकीय तंत्र: तंत्रिका कोशिकाओं का जाल जो त्वरित समन्वय करता है।
  • 📌 न्यूरॉन: तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई।
  • 📌 अंतःस्रावी तंत्र: हार्मोन के माध्यम से रासायनिक समन्वय करने वाला तंत्र।

18.2 मानव का तंत्रिकीय तंत्र

व्याख्या

18.2 मानव का तंत्रिकीय तंत्र

मानव का तंत्रिकीय तंत्र दो मुख्य भागों में विभाजित होता है: (क) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) और (ख) परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS)। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और मेरूरज्जु शामिल होते हैं, जो सूचनाओं का संसाधन और नियंत्रण करते हैं। परिधीय तंत्रिका तंत्र केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े तंत्रिकाओं का समूह है, जो संवेदी (अभिवाही) और चालक (अपवाही) तंत्रिकाओं से मिलकर बनता है। संवेदी तंत्रिकाएं उद्दीपनों को शरीर के अंगों से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुंचाती हैं, जबकि चालक तंत्रिकाएं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से अंगों तक आदेश पहुंचाती हैं। परिधीय तंत्रिका तंत्र को दो भागों में बांटा गया है: कायिक तंत्रिका तंत्र और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र। कायिक तंत्रिका तंत्र शरीर की स्वैच्छिक मांसपेशियों और अनैच्छिक अंगों को नियंत्रित करता है। स्वायत्त तंत्रिका तंत्र शरीर के स्वचालित कार्यों जैसे हृदय गति, पाचन आदि को नियंत्रित करता है और इसे अनुकंपी (पैरासिंपैथेटिक) और परानुकंपी (सिंपैथेटिक) तंत्रिका तंत्र में विभाजित किया गया है। यह तंत्रिका तंत्र केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से आवेगों को अंगों तक और अंगों से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक संचरित करता है। इस प्रकार मानव तंत्रिकीय तंत्र जटिल और सुव्यवस्थित है, जो शरीर के समस्त कार्यों का समन्वय करता है।

  • मानव तंत्रिका तंत्र दो भागों में विभाजित: केंद्रीय और परिधीय।
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और मेरूरज्जु शामिल।
  • परिधीय तंत्रिका तंत्र में संवेदी और चालक तंत्रिकाएं होती हैं।
  • परिधीय तंत्रिका तंत्र के दो भाग: कायिक और स्वायत्त।
  • स्वायत्त तंत्रिका तंत्र अनुकंपी और परानुकंपी तंत्रिका तंत्र में विभाजित।
  • 📌 केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS): मस्तिष्क और मेरूरज्जु।
  • 📌 परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS): केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े तंत्रिकाएं।
  • 📌 संवेदी तंत्रिका: उद्दीपनों को CNS तक पहुंचाती हैं।

18.3 तंत्रिकोशिका

व्याख्या

18.3 तंत्रिकोशिका

तंत्रिकोशिका या न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई होती है। न्यूरॉन तीन मुख्य भागों से मिलकर बनता है: कोशिका काय (सॉमा), द्व्राह्य (डेंड्राइट्स) और तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन)। कोशिका काय में कोशिका द्रव्य, प्रारूपिक कोशिकांग और निसेल

अभ्यास प्रश्नChapter 18

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.१.आइरिस किसका भाग है
A.क) सक्लेरा
B.ख) कोरॉइड
C.ग) सक्लेरा और कोरॉइड
D.घ) मध्य पटल

उत्तर:

ख) कोरॉइड

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Q2.इनमें से क्या तंत्रिका संचारी नहीं है ?
A.क) असेटाइल कोलीन
B.ख) एपिनेफ्रीन
C.ग)नॉर एपिनेफ्रीन
D.घ )कॉर्टिसोन

उत्तर:

घ )कॉर्टिसोन

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Q3.1. निम्नलिखित संरचना का संक्षेप में वर्णन कीजिए- (अ) मस्तिष्क

उत्तर:

मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र का प्रमुख भाग है जो शरीर के विभिन्न कार्यों का नियंत्रण करता है। यह तीन भागों में विभाजित होता है: अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं का जाल होता है जो संवेदी जानकारी प्राप्त कर उसे संसाधित करता है और प्रेरक संकेत भेजता है। यह सोच, स्मृति, भावना, और समन्वय के लिए जिम्मेदार होता है।

व्याख्या:

मस्तिष्क की संरचना और कार्यों का संक्षिप्त वर्णन करते हुए बताया गया है कि यह शरीर के विभिन्न तंत्रों के समन्वय और नियंत्रण में कैसे भूमिका निभाता है।

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Q4.2. निम्नलिखित की तुलना कीजिए- (अ) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और परिधीय तंत्रिका तंत्र (ब) स्थिर विभव और सक्रिय विभव

उत्तर:

(अ) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) में मस्तिष्क और मेरुदंड शामिल हैं, जो शरीर के संवेदी और प्रेरक कार्यों का नियंत्रण करते हैं। परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) में तंत्रिकाएं होती हैं जो CNS को शरीर के अन्य भागों से जोड़ती हैं। (ब) स्थिर विभव (Resting Potential) वह विद्युत विभव है जो तंत्रिका तंतु की झिल्ली पर आराम की स्थिति में होता है, लगभग -70mV। सक्रिय विभव (Action Potential) वह विद्युत आवेग है जो तंत्रिका तंतु में उत्तेजना के कारण उत्पन्न होता है और संकेत के रूप में संचरित होता है।

व्याख्या:

केंद्रीय और परिधीय तंत्रिका तंत्र के कार्य और संरचना में अंतर तथा स्थिर और सक्रिय विभव की परिभाषा और महत्व को स्पष्ट किया गया है।

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Q5.3. निम्नलिखित प्रक्रियाओं का वर्णन कीजिए- (अ) तंत्रिका तंतु की झिल्ली का धूवीकरण (ब) तंत्रिका तंतु की झिल्ली का विधुवीकरण (स) रासायनिक सिनेप्स द्वारा तंत्रिका आवेगों का संवहन

उत्तर:

(अ) धूवीकरण (Polarization): तंत्रिका तंतु की झिल्ली पर आराम की स्थिति में विद्युत विभव होता है, जिसमें झिल्ली के अंदर नकारात्मक आवेश और बाहर सकारात्मक आवेश होता है। इसे धूवीकरण कहते हैं। (ब) विधुवीकरण (Depolarization): जब तंत्रिका तंतु उत्तेजित होता है, तो Na⁺ आयन झिल्ली के अंदर प्रवेश करते हैं जिससे झिल्ली का आंतरिक भाग सकारात्मक हो जाता है, इसे विधुवीकरण कहते हैं। (स) रासायनिक सिनेप्स द्वारा संवहन: तंत्रिका आवेग सिनेप्स पर न्यूरोट्रांसमीटर के मुक्त होने से एक तंत्रिका कोशिका से दूसरी कोशिका में रासायनिक संकेतों के माध्यम से संचारित होता है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रक्रिया का तंत्रिका तंतु की क्रियाविधि में महत्व और तंत्रिका आवेग के संचरण में भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।

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Q6.4. निम्नलिखित का नामांकित चित्र बनाइए- (अ) न्यूरॉन (ब) मस्तिष्क

उत्तर:

छात्रों को न्यूरॉन और मस्तिष्क के नामांकित चित्र बनाना चाहिए, जिसमें न्यूरॉन के भाग जैसे कोशिका शरीर, डेंड्राइट्स, एक्सॉन, मायलिन शीथ आदि और मस्तिष्क के अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क, पश्च मस्तिष्क आदि भाग स्पष्ट रूप से अंकित हों।

व्याख्या:

चित्र बनाते समय प्रत्येक भाग का नामांकन और उसकी भूमिका को समझना आवश्यक है। यह तंत्रिका तंत्र की संरचना को बेहतर समझने में मदद करता है।

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Q7.5. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए- (अ) तंत्रीय समन्वयन (ब) अग्र मस्तिष्क (स) मध्य मस्तिष्क (द) पश्च मस्तिष्क

उत्तर:

(अ) तंत्रीय समन्वयन: यह तंत्रिका तंत्र की वह प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न अंगों और तंत्रों के कार्यों का समन्वय किया जाता है ताकि शरीर की क्रियाएं सुचारू रूप से चल सकें। (ब) अग्र मस्तिष्क: मस्तिष्क का वह भाग जो सोच, स्मृति, निर्णय और संवेदी जानकारी के प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार होता है। (स) मध्य मस्तिष्क: यह मस्तिष्क का वह भाग है जो दृष्टि और श्रवण से संबंधित तंत्रों का नियंत्रण करता है और शारीरिक गतिविधियों का समन्वय करता है। (द) पश्च मस्तिष्क: यह मस्तिष्क का वह भाग है जो श्वसन, हृदय गति और अन्य स्वायत्त कार्यों को नियंत्रित करता है।

व्याख्या:

प्रत्येक भाग और प्रक्रिया का संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट वर्णन दिया गया है जिससे छात्र विषय को समझ सकें।

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Q8.6. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए- (अ) सिनेप्टिक संचरण की क्रियाविधि

उत्तर:

सिनेप्टिक संचरण वह प्रक्रिया है जिसमें एक तंत्रिका कोशिका से दूसरी तंत्रिका कोशिका या मांसपेशी कोशिका तक तंत्रिका आवेग रासायनिक माध्यम से संचारित होता है। जब आवेग सिनेप्स के अंत तक पहुंचता है, तो Ca++ आयन प्रवेश करते हैं, जिससे न्यूरोट्रांसमीटर स्रावित होते हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर अगली कोशिका की झिल्ली पर रिसेप्टर से जुड़ते हैं और आवेग उत्पन्न करते हैं।

व्याख्या:

सिनेप्टिक संचरण की प्रक्रिया में आयनों की भूमिका, न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव और आवेग का संवहन विस्तार से समझाया गया है।

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