Chapter 15
Chapter 15 — अध्ययन नोट्स
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रक्त और उसके घटक
व्याख्यारक्त और उसके घटक
रक्त शरीर का एक महत्वपूर्ण द्रव है जो शरीर के विभिन्न भागों में पोषक तत्व, ऑक्सीजन, हार्मोन, और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है। रक्त का रंग लाल होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन से जुड़ता है। रक्त लगभग 55% प्लाज्मा और 45% ठोस घटकों से मिलकर बना होता है। प्लाज्मा मुख्यतः पानी, प्रोटीन, लवण, ग्लूकोज, हार्मोन, और अपशिष्ट पदार्थों का मिश्रण होता है। ठोस घटकों में मुख्य रूप से लाल रक्त कणिकाएँ (एरिथ्रोसाइट्स), श्वेत रक्त कणिकाएँ (ल्यूकोसाइट्स), और रक्त कणिकाएँ (प्लेटलेट्स) शामिल हैं। रक्त का कार्य शरीर में पोषक तत्वों, गैसों (जैसे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड), हार्मोन, और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करना है। इसके अलावा, रक्त शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है, रोगों से लड़ने में मदद करता है और रक्तस्राव को रोकने के लिए थक्के बनाता है। रक्त के घटकों का विवरण इस प्रकार है: - लाल रक्त कणिकाएँ: ये हीमोग्लोबिन से भरपूर होती हैं और ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के अन्य भागों तक ले जाती हैं। - श्वेत रक्त कणिकाएँ: ये शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा होती हैं और संक्रमण से लड़ती हैं। - प्लेटलेट्स: ये रक्त के थक्के बनाने में मदद करती हैं जिससे रक्तस्राव रुकता है। रक्त की संरचना और कार्य को समझना शरीर के द्रव और परिसंचरण तंत्र को समझने के लिए आवश्यक है।
- रक्त शरीर में पोषक तत्व, गैसें, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है।
- रक्त का रंग हीमोग्लोबिन की वजह से लाल होता है।
- रक्त में लगभग 55% प्लाज्मा और 45% ठोस घटक होते हैं।
- ठोस घटकों में लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स शामिल हैं।
- रक्त शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और रोगों से लड़ता है।
- 📌 हीमोग्लोबिन: एक प्रोटीन जो ऑक्सीजन को बांधता है और रक्त को लाल रंग देता है।
- 📌 प्लाज्मा: रक्त का तरल भाग जिसमें पानी, प्रोटीन, लवण आदि होते हैं।
- 📌 एरिथ्रोसाइट्स: लाल रक्त कणिकाएँ जो ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं।
रक्त समूह और उनका महत्व
व्याख्यारक्त समूह और उनका महत्व
रक्त समूह रक्त कणिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले विशिष्ट प्रतिजनों (एंटीजन) के आधार पर वर्गीकृत होते हैं। ये प्रतिजन रक्त की पहचान में मदद करते हैं और रक्तदान के समय महत्वपूर्ण होते हैं। मुख्य रूप से चार प्रकार के रक्त समूह होते हैं: A, B, AB, और O। प्रत्येक रक्त समूह के प्लाज्मा में विशिष्ट प्रतिरक्षी (एंटिबॉडीज) पाए जाते हैं जो दूसरे रक्त समूह के एंटीजन के खिलाफ प्रतिक्रिया करते हैं। रक्त समूहों का महत्व रक्तदान और रक्त ग्रहण में होता है। यदि किसी व्यक्ति को उसके रक्त समूह के अनुसार रक्त न दिया जाए तो रक्त में एंटीजन-एंटीबॉडी प्रतिक्रिया हो सकती है जिससे रक्त जम सकता है और व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है। रक्त समूहों का वर्गीकरण इस प्रकार है: - समूह A: लाल रक्त कणिकाओं पर A एंटीजन होते हैं और प्लाज्मा में एंटी B एंटीबॉडी होती है। यह समूह A और O से रक्त ग्रहण कर सकता है। - समूह B: लाल रक्त कणिकाओं पर B एंटीजन होते हैं और प्लाज्मा में एंटी A एंटीबॉडी होती है। यह समूह B और O से रक्त ग्रहण कर सकता है। - समूह AB: लाल रक्त कणिकाओं पर A और B दोनों एंटीजन होते हैं और प्लाज्मा में कोई एंटीबॉडी नहीं होती। इसे सार्वभौमिक ग्रहणकर्ता कहा जाता है क्योंकि यह सभी समूहों से रक्त ग्रहण कर सकता है। - समूह O: लाल रक्त कणिकाओं पर कोई एंटीजन नहीं होता और प्लाज्मा में एंटी A और एंटी B एंटीबॉडी होती हैं। इसे सार्वभौमिक दाता कहा जाता है क्योंकि यह सभी समूहों को रक्त दे सकता है लेकिन केवल O समूह से ही रक्त ग्रहण कर सकता है। **Table on page 3 (5×4)** | रक्त समूह | लाल रुधिर कणिकाओं पर प्रतिजन | प्लाज्मा में प्रतिरक्षी (एंटिबोडीज) | रक्तदाता समूह | | --- | --- | --- | --- | | A | A | एंटी B | A, O | | B | B | एंटी A | B, O | | AB | AB | अनुपस्थित | AB, A, B, O | | O | अनुपस्थित | एंटी A, B | O |
- रक्त समूह एंटीजन और एंटीबॉडी के आधार पर वर्गीकृत होते हैं।
- मुख्य रक्त समूह हैं: A, B, AB, और O।
- रक्तदान और ग्रहण में रक्त समूह का मेल जरूरी होता है।
- AB समूह सार्वभौमिक ग्रहणकर्ता है, O समूह सार्वभौमिक दाता।
- गलत रक्तदान से रक्त जमने और जान का खतरा हो सकता है।
- 📌 एंटीजन: रक्त कणिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले विशिष्ट प्रोटीन।
- 📌 एंटीबॉडी: प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्रोटीन जो एंटीजन के खिलाफ प्रतिक्रिया करते हैं।
- 📌 सार्वभौमिक दाता: O रक्त समूह जो सभी को रक्त दे सकता है।
हृदय और उसका निर्माण
व्याख्याहृदय और उसका निर्माण
हृदय एक मांसपेशीय अंग है जो रक्त को शरीर में परिसंचारित करता है। यह लगभग मुट्ठी के आकार का होता है और छाती के मध्य भाग में, फेफड़ों के बीच स्थित होता है। हृदय चार कक्षों में विभाजित होता है: दो ऊपर की ओर आलिंद (एट्रिया) और दो नीचे की ओर निलय (वेंट्रि
अभ्यास प्रश्न — Chapter 15
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.________ एक ऐसी स्थिति है जहां रक्त का थक्का संचार प्रणाली में बनता है।
उत्तर:
1 थ्रोम्बस
Q2.मनुष्यों में, ____________ सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दबाव के बीच का अंतर है।
उत्तर:
1. 40 मिमी एचजी
Q3._________ एक ऐसी स्थिति है जहां पट्टिका धमनियों के अंदर पर बनती है।
उत्तर:
४.एथेरोस्क्लेरोसिस
Q4.रक्त में पाए जाने वाले मुख्य ठोस घटकों के नाम बताइए और उनका कार्य संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
रक्त के मुख्य ठोस घटक हैं: लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ, और प्लेटलेट्स। लाल रक्त कणिकाएँ ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ रोगों से लड़ती हैं। प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनाने में मदद करती हैं।
व्याख्या:
रक्त के ठोस घटकों में लाल रक्त कणिकाएँ होती हैं जो हीमोग्लोबिन से भरपूर होती हैं और फेफड़ों से शरीर के अन्य भागों तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा होती हैं और संक्रमण से लड़ती हैं। प्लेटलेट्स रक्तस्राव को रोकने के लिए थक्का बनाती हैं।
Q5.रक्त का रंग लाल क्यों होता है? इसका वैज्ञानिक कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रक्त का रंग लाल इसलिए होता है क्योंकि इसमें हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन से जुड़ता है। हीमोग्लोबिन में आयरन होता है जो ऑक्सीजन के साथ लाल रंग का यौगिक बनाता है।
व्याख्या:
हीमोग्लोबिन एक लोहामय प्रोटीन है जो रक्त में ऑक्सीजन को बांधता है। जब हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से जुड़ता है तो यह लाल रंग प्रदर्शित करता है, इसलिए रक्त लाल दिखाई देता है।
Q6.निम्नलिखित में से कौन सा रक्त समूह सार्वभौमिक दाता कहलाता है और क्यों? A) A B) B C) AB D) O
उत्तर:
O
व्याख्या:
O रक्त समूह के लाल रक्त कणिकाओं पर कोई एंटीजन नहीं होता, इसलिए यह सभी रक्त समूहों को रक्त दे सकता है। इसलिए इसे सार्वभौमिक दाता कहा जाता है।
Q7.रक्त समूह AB को सार्वभौमिक ग्रहणकर्ता क्यों कहा जाता है? अपने उत्तर में एंटीजन और एंटीबॉडी की भूमिका स्पष्ट करें।
उत्तर:
रक्त समूह AB के लाल रक्त कणिकाओं पर A और B दोनों एंटीजन होते हैं और प्लाज्मा में कोई एंटीबॉडी नहीं होती। इसलिए यह सभी प्रकार के रक्त समूहों से रक्त ग्रहण कर सकता है, इसलिए इसे सार्वभौमिक ग्रहणकर्ता कहा जाता है।
व्याख्या:
AB समूह में कोई एंटीबॉडी नहीं होने के कारण यह किसी भी अन्य रक्त समूह के एंटीजन के खिलाफ प्रतिक्रिया नहीं करता। इसलिए यह सभी रक्त समूहों से रक्त ग्रहण कर सकता है।
Q8.चित्र 15.1 में रक्त के संगठित पदार्थ दिखाए गए हैं। इस चित्र में लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स अलग-अलग दिखाई देते हैं। लाल रक्त कणिकाओं का आकार और रंग कैसा होता है? श्वेत रक्त कणिकाओं की विशेषता क्या है? प्लेटलेट्स का कार्य क्या है? (चित्र विवरण: चित्र में विभिन्न प्रकार की रक्त कणिकाएँ माइक्रोस्कोप के नीचे दिखाई गई हैं, जहाँ लाल रक्त कणिकाएँ गोल और लाल रंग की हैं, श्वेत रक्त कणिकाएँ बड़ी और रंगहीन हैं, तथा प्लेटलेट्स छोटे टुकड़े हैं।)
उत्तर:
लाल रक्त कणिकाएँ गोलाकार और लाल रंग की होती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ बड़ी होती हैं और रंगहीन होती हैं जो रोगों से लड़ती हैं। प्लेटलेट्स छोटे टुकड़े होते हैं जो रक्त के थक्के बनाने में मदद करते हैं।
व्याख्या:
लाल रक्त कणिकाएँ हीमोग्लोबिन से भरपूर होती हैं और ऑक्सीजन का परिवहन करती हैं। श्वेत रक्त कणिकाएँ संक्रमण से लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएँ हैं। प्लेटलेट्स रक्तस्राव को रोकने के लिए रक्त के थक्के बनाने में सहायक होती हैं।
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