Chapter 12
Chapter 12 — अध्ययन नोट्स
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पादप में श्वसन
व्याख्यापादप में श्वसन
जीवित रहने के लिए सभी जीवों को ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो वे अपने भोजन से प्राप्त करते हैं। पादपों में भी ऊर्जा प्राप्ति के लिए श्वसन की प्रक्रिया होती है। पादप प्रकाश-संश्लेषण के द्वारा ग्लूकोज जैसे कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण करते हैं, लेकिन सभी कोशिकाओं में प्रकाश-संश्लेषण नहीं होता। इसलिए पादपों में भोजन का परिवहन होता है और कोशिकाओं में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण कर ऊर्जा प्राप्त की जाती है। श्वसन एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ग्लूकोज जैसे कार्बनिक पदार्थ ऑक्सीजन की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा में परिवर्तित होते हैं। यह ऊर्जा एटीपी के रूप में संग्रहित होती है जो कोशिका की विभिन्न क्रियाओं के लिए आवश्यक होती है। पादपों में श्वसन के लिए विशिष्ट श्वसन अंग नहीं होते, बल्कि गैसों का आदान-प्रदान रंध्र और वातरंध्र के माध्यम से होता है। पादपों के प्रत्येक भाग की अपनी गैस आवश्यकताएँ होती हैं और वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। श्वसन की प्रक्रिया में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण कई चरणों में होता है ताकि ऊर्जा नियंत्रित रूप से मुक्त हो और उसका उपयोग एटीपी संश्लेषण में हो सके। इस प्रकार, पादपों में श्वसन प्रकाश-संश्लेषण के समान ही जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है।
- पादपों में श्वसन के लिए विशिष्ट अंग नहीं होते, गैसों का आदान-प्रदान रंध्र और वातरंध्र से होता है।
- श्वसन प्रक्रिया में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण होता है जिससे ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं।
- श्वसन से मुक्त ऊर्जा एटीपी के रूप में संग्रहित होती है जो कोशिका की ऊर्जा मुद्रा है।
- प्रकाश-संश्लेषण केवल क्लोरोप्लास्ट वाली कोशिकाओं में होता है, अन्य कोशिकाओं को भोजन की आवश्यकता होती है।
- ग्लूकोज का ऑक्सीकरण कई चरणों में होता है जिससे ऊर्जा नियंत्रित रूप से मुक्त होती है।
- 📌 श्वसन: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया।
- 📌 रंध्र: पादपों की सतह पर छोटे छिद्र, जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।
- 📌 वातरंध्र: तने और जड़ों में पाए जाने वाले छिद्र जो गैसों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं।
12.1 क्या पादप साँस लेते हैं?
व्याख्या12.1 क्या पादप साँस लेते हैं?
पादपों में भी प्राणियों की तरह ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और वे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं। हालांकि पादपों में श्वसन के लिए कोई विशिष्ट अंग नहीं होते, परंतु उनके शरीर में गैसों के आदान-प्रदान के लिए रंध्र और वातरंध्र पाए जाते हैं। पादपों के प्रत्येक भाग में गैसों का आदान-प्रदान होता है और पादपों के विभिन्न अंगों में श्वसन की दर जंतुओं की तुलना में बहुत धीमी होती है। प्रकाश-संश्लेषण के दौरान पादपों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बनी रहती है, जिससे श्वसन के लिए ऑक्सीजन की कमी नहीं होती। पादपों की अधिकांश कोशिकाएं वायु के संपर्क में होती हैं, जिससे गैसों का विसरण संभव होता है। मोटे तनों और जड़ों में भी वातरंध्र होते हैं जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं। पादपों में ग्लूकोज का नियंत्रित ऑक्सीकरण होता है, जिससे ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा सीधे उपयोग में नहीं आती, बल्कि एटीपी के संश्लेषण में उपयोग होती है। कुछ परिस्थितियों में जब ऑक्सीजन की कमी होती है, तब पादप अनाक्सी श्वसन (किण्वन) करते हैं।
- पादपों में श्वसन के लिए विशिष्ट अंग नहीं होते, गैसों का आदान-प्रदान रंध्र और वातरंध्र से होता है।
- प्रकाश-संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन की उपलब्धता श्वसन के लिए पर्याप्त होती है।
- पादपों के विभिन्न भागों में श्वसन की दर जंतुओं की तुलना में धीमी होती है।
- पादपों की अधिकांश कोशिकाएं वायु के संपर्क में होती हैं, जिससे गैसों का विसरण संभव होता है।
- एटीपी संश्लेषण के लिए ग्लूकोज का नियंत्रित ऑक्सीकरण आवश्यक है।
- ऑक्सीजन की कमी में पादप अनाक्सी श्वसन करते हैं।
- 📌 रंध्र: पादपों की पत्तियों पर पाए जाने वाले छोटे छिद्र जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।
- 📌 वातरंध्र: तने और जड़ों में पाए जाने वाले छिद्र जो गैसों के आदान-प्रदान में मदद करते हैं।
- 📌 अनाक्सी श्वसन: ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाली श्वसन प्रक्रिया।
12.2 ग्लाइकोलिसिस
व्याख्या12.2 ग्लाइकोलिसिस
ग्लाइकोलिसिस शब्द का अर्थ है 'शर्करा का टूटना'। यह प्रक्रिया सभी जीवों में कोशिका द्रव्य में होती है और ग्लूकोज के दो पायरूवेट अणुओं में टूटने की क्रिया है। यह श्वसन की प्रथम अवस्था है और अनाक्सी जीवों में यह एकमात्र श्वसन पथ है। पादपों में ग्लूकोज स
अभ्यास प्रश्न — Chapter 12
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र , फैटी एसिड या कार्बोहाइड्रेट के आक्सीकरण और वसा की चयापचय के बीच लिंक है
उत्तर:
घ) एसिटाइल CoA।
Q2.वाटर पोटेंशियल के संभावित दो महत्वपूर्ण घटक हैं
उत्तर:
२ सोलुते पोटेंशियल और प्रेशर पोटेंशियल
Q3.उच्च पौधों में खाद्य पदार्थों का परिवहन होता है
उत्तर:
१ सीव ट्युब
Q4.एक आइसोटोनिक घोल में रखी गई जीवित कोशिकाएं अपना आकार और आकार बनाए रखती हैं। यह के सिद्धांत पर आधारित है
उत्तर:
३ ओसमोसिस
Q5.TCA चक्र के सभी एंजाइम माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में स्थित हैं, एक को छोड़कर जो यूकेरियोट्समें भीतर माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली में स्थित है और प्रोकैरियोट्स में साइटोसोल में। यहएंजाइम है
उत्तर:
३ सक्सिनेट डिहाइड्रोजनेज
Q6.श्वसन के दौरान प्रति ग्लूकोज से उत्पन्न 36 एटीपी में से
उत्तर:
ख) 2 माइटोकॉन्ड्रिया के बाहर उत्पन्न होते हैं और 34 माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर
Q7.ग्लूकोज के एक अणु से किण्वन के बाद एल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनने के दौरान कितने शुद्ध एटीपी का संश्लेषण होता है। (अर्थात् ग्लाइकोलिसिस के दौरान उपयोग में आने वाले एटीपी (ATP) की संख्या घटाकर गणना करें कि कितने एटीपी (ATP) का संश्लेषण होता है)। जब एल्कोहल की मात्रा 13 प्रतिशत या अधिक होती है, तो यीस्ट के लिए यह विपाक्तता व मृत्यु का कारण बनती है। प्राकृतिक किण्वन पेय में एल्कोहल की अधिकतम सांद्रता कितनी होगी? क्या आप सोच सकते हैं कि मादक पेय में एल्कोहल की मात्रा इसमें स्थित एल्कोहल की सांद्रता से अधिक कैसे प्राप्त की जा सकती है?
उत्तर:
ग्लूकोज के एक अणु से किण्वन के दौरान कुल 2 अणु शुद्ध एटीपी का संश्लेषण होता है। ग्लाइकोलिसिस में 2 ATP खर्च होते हैं और 4 ATP बनते हैं, अतः शुद्ध ATP = 4 - 2 = 2 ATP। जब एल्कोहल की मात्रा 13 प्रतिशत या उससे अधिक होती है, तो यीस्ट के लिए यह विषाक्त हो जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है। प्राकृतिक किण्वन पेय में एल्कोहल की अधिकतम सांद्रता लगभग 13 प्रतिशत होती है। मादक पेय में एल्कोहल की मात्रा प्राकृतिक किण्वन से अधिक कैसे प्राप्त की जा सकती है? इसका उत्तर है कि मादक पेय में एल्कोहल की मात्रा बढ़ाने के लिए किण्वन प्रक्रिया को नियंत्रित करके, उच्च शर्करा वाले कच्चे माल का उपयोग करके, और कभी-कभी अतिरिक्त यीस्ट जोड़कर तथा किण्वन की अवधि बढ़ाकर एल्कोहल की सांद्रता बढ़ाई जाती है।
व्याख्या:
ग्लाइकोलिसिस में ग्लूकोज के एक अणु से 2 ATP खर्च होते हैं और 4 ATP बनते हैं, इसलिए शुद्ध ATP 2 होता है। किण्वन में ऊर्जा की मात्रा कम होती है इसलिए ATP उत्पादन सीमित होता है। 13% से अधिक एल्कोहल यीस्ट के लिए विषाक्त होता है। प्राकृतिक किण्वन में एल्कोहल की अधिकतम सांद्रता 13% तक सीमित होती है। अधिक एल्कोहल के लिए नियंत्रित किण्वन और अन्य तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
Q8.1. इनमें अंतर करिए? (अ) साँस (श्वसन) और दहन (ब) ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र (स) ऑक्सी श्वसन तथा किण्वन
उत्तर:
उत्तर: (अ) साँस (श्वसन) और दहन में अंतर: - श्वसन (साँस) जीवों में ऊर्जा उत्पन्न करने की प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन की सहायता से कार्बोहाइड्रेट आदि का ऑक्सीकरण होता है। - दहन एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ का ऑक्सीजन के साथ तीव्र प्रतिक्रिया होती है और ऊर्जा मुक्त होती है, परन्तु यह जीवित प्रणाली में नियंत्रित नहीं होती। (ब) ग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र में अंतर: - ग्लाइकोलिसिस कोशिका के साइटोप्लाज्म में होता है और इसमें ग्लूकोज का पायरुवेट में टूटना होता है। - क्रेब्स चक्र माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होता है और इसमें पायरुवेट का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। (स) ऑक्सी श्वसन तथा किण्वन में अंतर: - ऑक्सी श्वसन में ऑक्सीजन का उपयोग होता है और पूर्ण ऑक्सीकरण होता है जिससे अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। - किण्वन में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में आंशिक ऑक्सीकरण होता है और कम ऊर्जा प्राप्त होती है।
व्याख्या:
प्रत्येक जोड़ी के बीच मुख्य भौतिक और जैव रासायनिक अंतर समझाएं। श्वसन जीवों में ऊर्जा उत्पादन की नियंत्रित प्रक्रिया है, जबकि दहन एक तीव्र रासायनिक प्रतिक्रिया है। ग्लाइकोलिसिस और क्रेब्स चक्र दोनों ऊर्जा उत्पादन के चरण हैं, परन्तु वे अलग-अलग स्थानों और चरणों में होते हैं। ऑक्सी श्वसन और किण्वन में ऑक्सीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति के कारण ऊर्जा उत्पादन की मात्रा और प्रक्रिया भिन्न होती है।
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Biology · Class 11
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