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Chapter 12

🎓 Class 9📖 Shemushi Prathmo Bhag📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
Chapter 11अध्याय 12 / 16Chapter 13

Chapter 12अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिशिष्टम् १

व्याख्या

परिशिष्टम् १

इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य श्लोकान्वयविधि की समझ प्रदान करना है, जो संस्कृत श्लोकों में पदों के बीच संबंध (अन्वय) को स्पष्ट करने की विधि है। सामान्यतः संस्कृत श्लोकों में कर्तृपद (कर्ता), कर्मपद (कर्म), तृतीयादि विभक्त्यन्त पद (अन्य संबंधी पद), क्रियापद (क्रिया), विशेषण आदि पद होते हैं, जिनका छन्द के अनुसार पूर्वापर क्रम में होना आवश्यक होता है। परंतु श्लोकों में पदों के बीच संबंध को समझना कभी-कभी कठिन होता है। इसलिए श्लोकान्वयविधि के माध्यम से पदों के बीच सरल और स्पष्ट संबंध स्थापित किया जाता है, जिससे श्लोक का अर्थ और भाव समझना सहज हो जाता है। श्लोकान्वयविधि में मुख्यतः दण्डान्वय और खण्डान्वय विधि का प्रयोग होता है। दण्डान्वय में कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद के क्रम में पदों को जोड़ा जाता है, जबकि खण्डान्वय में पदों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर उनका अन्वय किया जाता है। इस विधि से छात्र श्लोक के पदों के बीच के सम्बन्ध को समझकर श्लोक का अर्थ एवं भाव स्पष्ट रूप से ग्रहण कर सकते हैं। इस प्रकार, श्लोकान्वयविधि संस्कृत भाषा के अध्ययन में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह श्लोकों के अर्थ को समझने का आधार प्रदान करती है। छात्र इस विधि के अभ्यास से संस्कृत श्लोकों को सरलता से समझने में सक्षम होते हैं।

  • श्लोकों में पदों के बीच संबंध को समझने की विधि को श्लोकान्वयविधि कहते हैं।
  • श्लोकों में कर्तृपद, कर्मपद, तृतीयादि विभक्त्यन्त पद, क्रियापद, विशेषण आदि पद होते हैं।
  • दण्डान्वय विधि में कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद के क्रम में पदों को जोड़ा जाता है।
  • खंडान्वय विधि में पदों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर उनका अन्वय किया जाता है।
  • श्लोकान्वयविधि से श्लोक का अर्थ और भाव स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।
  • यह विधि संस्कृत भाषा के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।
  • 📌 अन्वयः - शब्दों के बीच सम्बन्ध या क्रम
  • 📌 कर्तृपद - कर्ता का पद
  • 📌 कर्मपद - कर्म का पद

दण्डान्वयः (दण्डवत् अन्वयः)

व्याख्या

दण्डान्वयः (दण्डवत् अन्वयः)

दण्डान्वयः संस्कृत श्लोकों में पदों को कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद के क्रम में जोड़ने की प्राथमिक वाक्य रचनाशैली है। इस विधि में विशेषण पहले विशेष्य के पूर्व में आते हैं। अर्थात् कर्तृपद के विशेषण कर्तृपद से पूर्व, कर्मपद के विशेषण कर्मपद से पूर्व, इसी प्रकार अन्य पदों के विशेषण उनके पूर्व में प्रयुक्त होते हैं। यदि श्लोक में अव्यय, कृदन्तपद आदि हों तो उनका सम्बन्ध किस पद से है, यह ज्ञात कर वे पूर्व या पर योजनीय होते हैं। तृतीयादि विभक्त्यन्त पद भी सम्बद्ध पद के अनुसार पूर्व या पर योजनीय होते हैं। अंत में क्रियापद लिखा जाता है। दण्डान्वय विधि से श्लोक के पदों को क्रमबद्ध रूप में जोड़कर उनका अर्थ स्पष्ट किया जाता है। कभी-कभी श्लोक में कुछ पद छिपे होते हैं (अध्याहृत पद), जिन्हें समझकर जोड़ना आवश्यक होता है। इस विधि में पदों के बीच संबंध स्पष्ट होने से श्लोक का भाव और अर्थ सहजता से समझ में आता है। उदाहरण के रूप में श्लोक "शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः यस्तु क्रियावान् पुरुषस्स विद्वान्" लिया गया है, जिसमें कुछ पद छिपे हैं जैसे 'केचन' और 'भवति'। इन्हें जोड़कर श्लोक का पूर्ण अर्थ स्पष्ट होता है। इस प्रकार दण्डान्वय विधि श्लोकों के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।

  • दण्डान्वय में कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद के क्रम में पदों को जोड़ा जाता है।
  • विशेषण अपने विशेष्य पद से पूर्व आते हैं।
  • अव्यय और कृदन्तपदों का सम्बन्ध ज्ञात कर उन्हें उचित स्थान पर जोड़ा जाता है।
  • छिपे हुए पद (अध्याहृत पद) को समझकर जोड़ना आवश्यक होता है।
  • दण्डान्वय से श्लोक का अर्थ और भाव स्पष्ट होता है।
  • यह विधि श्लोकों के अध्ययन के लिए मूलभूत है।
  • 📌 दण्डान्वयः - पदों को कर्ता, कर्म, क्रिया के क्रम में जोड़ने की विधि
  • 📌 अध्याहृत पद - श्लोक में छिपा हुआ पद जो अर्थ के लिए आवश्यक होता है
  • 📌 विशेषण - वह शब्द जो किसी विशेष्य या क्रिया की विशेषता बताता है

पदच्छेदः एवं दण्डान्वयः उदाहरण

व्याख्या

पदच्छेदः एवं दण्डान्वयः उदाहरण

इस भाग में दण्डान्वय विधि के एक उदाहरण के रूप में श्लोक प्रस्तुत किया गया है: "शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः यस्तु क्रियावान् पुरुषस्स विद्वान्। सुचिन्तितं चौषधमातुराणां न नाममात्रेण करोत्यरोगम्॥" श्लोक के पदों को अलग-अलग करके (पदच्छेद) क्रमशः

अभ्यास प्रश्नChapter 12

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.प्रथमचरणे क्रियापदं किम् ?

उत्तर:

प्रथमचरणे क्रियापदं 'करोति' इति अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकस्य प्रथमचरणे 'करोति' इति क्रियापदं दृश्यते, अतः उत्तरं 'करोति' इति भवति।

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Q2.क: न करोति ?

उत्तर:

'सम्पूर्णकुम्भ: न करोति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं 'सम्पूर्णकुम्भ:' न करोति इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'सम्पूर्णकुम्भ: न करोति' इति भवति।

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Q3.सम्पूर्णकुम्भ: किं न करोति ?

उत्तर:

'सम्पूर्णकुम्भ: शब्दं न करोति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं सम्पूर्णकुम्भ: शब्दं न करोति इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'सम्पूर्णकुम्भ: शब्दं न करोति' इति भवति।

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Q4.द्वितीयचरणे क्रियापदं किम् ?

उत्तर:

'उपैति' इति क्रियापदं अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकस्य द्वितीयचरणे 'उपैति' इति क्रियापदं दृश्यते, अतः उत्तरं 'उपैति' इति भवति।

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Q5.क: उपैति ?

उत्तर:

'घट:' उपैति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं 'घट:' उपैति इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'घट: उपैति' इति भवति।

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Q6.कीदृश: घट: उपैति ?

उत्तर:

'अर्ध:' घट: उपैति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं 'अर्ध:' घट: उपैति इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'अर्ध: घट: उपैति' इति भवति।

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Q7.अर्ध: घट: किम् उपैति ?

उत्तर:

'अर्ध: घट: घोषम् उपैति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं 'अर्ध: घट: घोषम् उपैति' इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'अर्ध: घट: घोषम् उपैति' इति भवति।

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Q8.अर्ध: घट: घोषं कथम् उपैति ?

उत्तर:

'अर्ध: घट: घोषं नूनम् उपैति' इति उत्तरम् अस्ति।

व्याख्या:

श्लोकानुसारं 'अर्ध: घट: घोषं नूनम् उपैति' इति वाक्यं अस्ति, अतः प्रश्नस्य उत्तरं 'अर्ध: घट: घोषं नूनम् उपैति' इति भवति।

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