NCERTCh 11निःशुल्क

Chapter 11

🎓 Class 11📖 Jeev Vigyan📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 10अध्याय 11 / 19Chapter 12

Chapter 11अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

11.1 हम क्या जानते हैं?

व्याख्या

11.1 हम क्या जानते हैं?

प्रकाश-संश्लेषण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा हरे पौधे, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और जल (H₂O) से कार्बोहाइड्रेट (जैसे ग्लूकोज) का संश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रिया में क्लोरोफिल नामक हरे वर्णक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। क्लोरोफिल प्रकाश को अवशोषित करता है और इस ऊर्जा का उपयोग रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए करता है। प्रकाश-संश्लेषण के लिए प्रकाश, क्लोरोफिल और CO₂ आवश्यक हैं। प्रारंभिक प्रयोगों में यह सिद्ध किया गया कि केवल हरे भाग में ही प्रकाश-संश्लेषण होता है और CO₂ की उपस्थिति अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, शबलित पत्तियों में जहां प्रकाश नहीं पहुंचता, वहां स्टार्च का निर्माण नहीं होता। इसी प्रकार, KOH से भिगोई गई रूई जो CO₂ को अवशोषित करती है, के प्रयोग से यह पता चला कि CO₂ के बिना प्रकाश-संश्लेषण संभव नहीं है। इस प्रकार, प्रकाश-संश्लेषण एक जटिल जैव रासायनिक प्रक्रिया है जो पौधों को स्वपोषी बनाती है।

  • प्रकाश-संश्लेषण में सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल और CO₂ आवश्यक हैं।
  • प्रकाश-संश्लेषण मुख्यतः पौधों के हरे भागों में होता है।
  • प्रयोगों से पता चला कि बिना प्रकाश या CO₂ के प्रकाश-संश्लेषण संभव नहीं।
  • हरे पौधे स्वपोषी होते हैं क्योंकि वे अपना भोजन स्वयं संश्लेषित करते हैं।
  • 📌 प्रकाश-संश्लेषण: पौधों द्वारा प्रकाश ऊर्जा से कार्बोहाइड्रेट का संश्लेषण।
  • 📌 क्लोरोफिल: हरे रंग का वर्णक जो प्रकाश को अवशोषित करता है।
  • 📌 स्वपोषी: ऐसे जीव जो अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

11.2 प्रारंभिक प्रयोग

व्याख्या

11.2 प्रारंभिक प्रयोग

प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया को समझने के लिए कई वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण प्रयोग किए। जोसेफ प्रीस्टले ने 1774 में यह दिखाया कि हरे पौधे हवा को शुद्ध करते हैं। उन्होंने मोमबत्ती जलाने और चूहे को बंद जार में रखने के प्रयोग से यह निष्कर्ष निकाला कि पौधे हवा में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं। जॉन इंजेनहाउज ने इस प्रयोग को आगे बढ़ाते हुए दिखाया कि प्रकाश में पौधे ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जबकि अंधेरे में नहीं। उन्होंने जलीय पौधों के आस-पास बनने वाले बुलबुलों की पहचान ऑक्सीजन के रूप में की। जूलियस वॉन सैचस् ने यह सिद्ध किया कि पौधे वृद्धि के दौरान ग्लूकोज बनाते हैं, जो बाद में स्टार्च के रूप में संग्रहित होता है। टी.डब्ल्यू. एंजिलमैन ने प्रकाश के विभिन्न रंगों के प्रभाव का अध्ययन किया और पाया कि लाल और नीले प्रकाश में प्रकाश-संश्लेषण अधिक होता है। कोर्नेलियस वैन नील ने प्रकाश-संश्लेषण की रासायनिक प्रकृति को समझाया, जिसमें हाइड्रोजन दाता के रूप में जल का उपयोग होता है और ऑक्सीजन मुक्त होती है। इन सभी प्रयोगों ने प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया।

  • प्रीस्टले ने दिखाया कि पौधे हवा को शुद्ध करते हैं।
  • इंजेनहाउज ने प्रकाश में पौधों द्वारा ऑक्सीजन उत्सर्जन की पुष्टि की।
  • वॉन सैचस् ने ग्लूकोज के निर्माण का प्रमाण दिया।
  • एंजिलमैन ने प्रकाश के रंगों के प्रभाव का अध्ययन किया।
  • वैन नील ने प्रकाश-संश्लेषण की रासायनिक समीकरण प्रस्तुत की।
  • 📌 प्रकाश-संश्लेषण समीकरण: CO₂ और जल से कार्बोहाइड्रेट और ऑक्सीजन का निर्माण।
  • 📌 फोटोलिसिस: जल के अणुओं का प्रकाश की सहायता से टूटना।
  • 📌 हाइड्रोजन दाता: वह पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन देता है।

11.3 प्रकाश-संश्लेषण कहाँ संपन्न होता है?

व्याख्या

11.3 प्रकाश-संश्लेषण कहाँ संपन्न होता है?

प्रकाश-संश्लेषण मुख्यतः पौधों की पत्तियों में होता है, विशेषकर पत्तियों की मेसोफिल कोशिकाओं में स्थित क्लोरोप्लास्ट नामक अंगों में। क्लोरोप्लास्ट में दो प्रमुख भाग होते हैं: थाइलाकोइड और स्टोमा। थाइलाकोइड झिल्लियाँ प्रकाश अभिक्रिया के लिए उत्तरदायी ह

अभ्यास प्रश्नChapter 11

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.फॉस्फोनोल पाइरूवेट (PEP)किस में प्राथमिक CO 2 स्वीकर्ता है
A.क) C 4 पौधे
B.ख) C 2 पौधे
C.ग) C 3 और C 4 पौधे
D.घ) C 3 पौधे

उत्तर:

क) C 4 पौधे

MediumNCERT
Q2.प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशी अभिक्रिया कहाँ होती हैं?
A.१ ग्रेनल थायलाकोइड झिल्ली
B.२ स्ट्रोमल लैमेला झिल्ली
C.३ प्रकाश संश्लेषक लामेला के बाहर स्ट्रोमा
D.४.पेरिप्लास्टिडियल स्पेस।

उत्तर:

३ प्रकाश संश्लेषक लामेला के बाहर स्ट्रोमा

MediumNCERT
Q3.प्रकाश श्वसन द्वारा इष्ट है
A.१ उच्च तापमान और कम आक्सिजन
B.२ उच्च आर्द्रता और तापमान
C.३ उच्च O 2 और निम्न CO 2
D.४.उच्च CO 2 और निम्न O 2

उत्तर:

३ उच्च O 2 और निम्न CO 2

MediumNCERT
Q4.प्रकाश श्वसन के दौरान, ऑक्सीजन की खपत करने वाली प्रतिक्रिया कहाँ होती है?
A.१ क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा
B.२ क्लोरोप्लास्ट और माइटोकॉन्ड्रिया का स्ट्रोमा
C.३ क्लोरोप्लास्ट और पेरॉक्सिसोम का स्ट्रोमा
D.४ क्लोरोप्लास्ट्स और पेरोक्सिसोम्स के ग्रेन

उत्तर:

३ क्लोरोप्लास्ट और पेरॉक्सिसोम का स्ट्रोमा

MediumNCERT
Q5.NADPH 2 किस के माध्यम से उत्पन्न होता है?
A.१ फोटोसिस्टम II
B.२ अवायवीय श्वसन
C.३ ग्लाइकोलाइसिस
D.४ फोटो सिस्टम I

उत्तर:

४ फोटो सिस्टम I

MediumNCERT
Q6.1. एक पौधे को बाहर से देखकर क्या आप बता सकते हैं कि वह C₃ है अथवा C₄? कैसे और क्यों?

उत्तर:

बाहर से देखने पर C₃ और C₄ पौधों में अंतर करना कठिन होता है क्योंकि दोनों के पत्ते सामान्यतः हरे रंग के होते हैं। परंतु कुछ विशेषताएँ जैसे पत्ती की मोटाई, पत्ती की आकृति, और पत्ती की सतह पर मौजूद बाल (trichomes) आदि से कुछ अनुमान लगाया जा सकता है। C₄ पौधों में आमतौर पर पत्तियाँ मोटी और अधिक मांसल होती हैं क्योंकि उनमें बंडल शीथ कोशिकाएँ विशेष रूप से विकसित होती हैं। इसके अलावा, C₄ पौधे अधिकतर गर्म और शुष्क वातावरण में पाए जाते हैं, इसलिए उनकी पत्तियाँ अधिक कठोर और चमकीली हो सकती हैं। इसलिए, केवल बाहरी रूप से यह निश्चित रूप से बताना कठिन है, परंतु पर्यावरण और पत्ती की बनावट से कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।

व्याख्या:

C₃ और C₄ पौधों के बीच मुख्य अंतर उनके आंतरिक संरचना और प्रकाश-संश्लेषण पथ में होता है। बाहरी रूप से अंतर करना कठिन है, परंतु मोटाई, पत्ती की बनावट और पर्यावरण के आधार पर कुछ संकेत मिल सकते हैं।

MediumNCERT
Q7.2. एक पौधे की आंतरिक संरचना को देखकर क्या आप बता सकते हैं कि वह C₃ है अथवा C₄? वर्णन करें?

उत्तर:

हाँ, पौधे की आंतरिक संरचना देखकर C₃ और C₄ पौधों में अंतर किया जा सकता है। C₃ पौधों की पत्ती में सामान्यतः मेसॉफिल कोशिकाएँ होती हैं जो समान रूप से फैली होती हैं और बंडल शीथ कोशिकाएँ कम विकसित होती हैं। जबकि C₄ पौधों की पत्ती में 'कृष्णपटल' (Kranz anatomy) नामक विशेष संरचना होती है, जिसमें मेसॉफिल कोशिकाएँ बंडल शीथ कोशिकाओं के चारों ओर घिरी होती हैं। बंडल शीथ कोशिकाएँ मोटी दीवार वाली और क्लोरोप्लास्ट से भरपूर होती हैं। यह संरचना C₄ पथ के लिए आवश्यक है क्योंकि कार्बन फिक्सेशन दो अलग-अलग कोशिकाओं में होता है। अतः, यदि पत्ती की आंतरिक संरचना में कृष्णपटल संरचना दिखाई दे, तो वह C₄ पौधा है, अन्यथा C₃।

व्याख्या:

C₃ पौधों में सामान्य मेसॉफिल और कम विकसित बंडल शीथ कोशिकाएँ होती हैं, जबकि C₄ पौधों में कृष्णपटल संरचना होती है जो दो प्रकार की कोशिकाओं (मेसॉफिल और बंडल शीथ) को दर्शाती है। यह अंतर आंतरिक संरचना से स्पष्ट होता है।

MediumNCERT
Q8.3. हालांकि C₄ पौधे में बहुत कम कोशिकाएं जैव-संश्लेषण – केल्विन पथ को वहन करते हैं, फिर भी वे उच्च उत्पादकता वाले होते हैं। क्या इस पर चर्चा कर सकते हो कि ऐसा क्यों हैं?

उत्तर:

C₄ पौधे में केल्विन चक्र मुख्यतः बंडल शीथ कोशिकाओं में होता है, जबकि कार्बन फिक्सेशन मेसॉफिल कोशिकाओं में होता है। यद्यपि केवल कुछ कोशिकाएँ केल्विन चक्र को संचालित करती हैं, फिर भी C₄ पौधे उच्च उत्पादकता वाले होते हैं क्योंकि: 1. C₄ पथ में CO₂ का सांद्रण बंडल शीथ कोशिकाओं में अधिक होता है, जिससे रुबिस्को द्वारा ऑक्सीजिनेशन की संभावना कम हो जाती है। 2. इससे फोटोrespiration कम होता है, जो ऊर्जा और कार्बन की हानि को रोकता है। 3. C₄ पौधे उच्च तापमान और कम CO₂ की स्थिति में भी प्रभावी रूप से प्रकाश-संश्लेषण कर पाते हैं। 4. ऊर्जा की अधिक दक्षता और कम हानि के कारण वे अधिक तेजी से वृद्धि करते हैं और उच्च उत्पादकता देते हैं। इसलिए, कम कोशिकाओं में केल्विन चक्र होने के बावजूद, C₄ पौधे अधिक उत्पादक होते हैं।

व्याख्या:

C₄ पौधों में CO₂ का सांद्रण और फोटोrespiration की कमी के कारण ऊर्जा की बचत होती है, जिससे कम कोशिकाओं में भी उच्च उत्पादकता संभव होती है।

HardNCERT