Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
व्याख्यासूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के गढ़ाकोला (उन्नाव) के निवासी थे। निराला की औपचारिक शिक्षा नौवीं कक्षा तक महिषादल में ही हुई। इसके बाद उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। निराला हिंदी साहित्य के छायावाद युग के प्रमुख कवि थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति के विराट तथा उदात्त चित्र प्रस्तुत किए। उन्होंने छायावादी कविताओं में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग किया, जो उनकी रचनात्मक स्वतंत्रता का परिचायक है। उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी उनकी ख्याति अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी प्रमुख काव्य रचनाओं में 'अनामिका', 'परिमल', 'गीतिका', 'कुकुरमुत्ता' और 'नए पत्ते' शामिल हैं। निराला की रचनावली आठ खंडों में प्रकाशित हुई है। उनकी कविताओं में उपेक्षितों और पीड़ितों के प्रति गहरी सहानुभूति देखने को मिलती है। उनका निधन सन् 1961 में हुआ। इस परिचय से हमें निराला की साहित्यिक प्रतिभा, उनकी भाषा और विचारों की गहराई का पता चलता है।
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ।
- वे गढ़ाकोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे।
- उनकी शिक्षा नौवीं तक महिषादल में हुई, बाद में स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी सीखी।
- निराला ने मुक्त छंद का प्रयोग छायावाद में सबसे पहले किया।
- उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ: अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, नए पत्ते।
- उनका निधन 1961 में हुआ।
- 📌 मुक्त छंद: ऐसा छंद जिसमें छंदबद्धता के नियमों का पालन न करते हुए कविता लिखी जाती है।
- 📌 छायावाद: हिंदी साहित्य का एक काल जिसमें भावुकता, प्रकृति और प्रेम की अभिव्यक्ति प्रमुख थी।
भारति, जय, विजयकरे!
व्याख्याभारति, जय, विजयकरे!
यह कविता सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की देशभक्ति से ओत-प्रोत प्रेरणादायक रचना है। कविता की शुरुआत में ही कवि भारत को 'भारति, जय, विजयकरे!' कहकर उसकी विजय की कामना करता है। भारतभूमि को 'कनक-शस्य-कमलधरे' कहकर उसकी कृषि-परंपरा, समृद्धि और सौंदर्य का चित्र प्रस्तुत किया गया है। कविता में भारत की भौगोलिक सुंदरता का वर्णन है, जैसे समुद्र के जल से धोते हुए भारत के चरण, नदी, वन, पुष्प, हिमालय और गंगा का चित्रण। कवि भारत को एक चेतन सत्ता के रूप में देखता है, जिसकी दिशाओं में 'ओंकार' की गूंज है, जो ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। कविता की भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है, जो इसे भव्य और प्रभावशाली बनाती है। कविता में प्रकृति का मानवीकरण, अलंकारिक प्रयोग, समस्त पदों का प्रयोग और संस्कृतनिष्ठ भाषा की विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। यह कविता स्वतंत्रता-पूर्व काल की है, जिसमें भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- कविता में भारत को विजयश्री प्राप्त करने की कामना की गई है।
- भारतभूमि को 'कनक-शस्य-कमलधरे' कहकर उसकी समृद्धि और कृषि परंपरा दर्शाई गई है।
- प्राकृतिक सौंदर्य जैसे हिमालय, गंगा, वन, पुष्प आदि का चित्रण किया गया है।
- कविता की भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है।
- भारत को चेतन सत्ता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
- कविता में मुक्त छंद और अलंकारों का प्रभावी प्रयोग है।
- 📌 समास: दो या अधिक शब्दों के मेल से बना नया शब्द।
- 📌 अलंकार: काव्य में सुंदरता बढ़ाने के लिए किए गए भाषा के विशेष प्रयोग।
- 📌 मानवीकरण: निर्जीव वस्तुओं या प्रकृति को मानवीय गुण देना।
अभ्यास
व्याख्याअभ्यास
इस अनुभाग में कविता 'भारति, जय, विजयकरे!' पर आधारित प्रश्न दिए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्र की कविता की समझ को परखना है। प्रश्नों में कविता के भाव, भाषा, अलंकार, और भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही अर्थ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 10
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.भारि की एक तिशिे िा उसकी बहुभातिकिा ह।ै यतद आपको एक सचिे नागररक के रूप मे ें भारि से अपनी मेािभृ ािा मे ेंसंिाद का अिसर तमेिे िो आप तकन तिियों पर और क्या-क्या संिाद करना चाहगें े? इन संिादों को अपनी मेािभृ ािा और तहदं ी मे ेंतितखए। (संकेत– समाज, पया्वर्रण, संस्ककृतत आतद।)
उत्तर:
इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में समाज, पर्यावरण, संस्कृति आदि विषयों पर संवाद करते हुए दे सकते हैं। उदाहरण स्वरूप, वे समाज में व्याप्त समस्याओं, पर्यावरण संरक्षण के उपायों, और सांस्कृतिक विविधता के महत्व पर चर्चा कर सकते हैं। संवाद को हिंदी या अपनी मातृभाषा में लिखना चाहिए।
व्याख्या:
यह प्रश्न संवाद लेखन पर आधारित है। विद्यार्थी को विषय के अनुसार संवाद तैयार करना है। संवाद में विषय की समझ और भाषा की स्पष्टता होनी चाहिए।
Q2.“स्िि कर बहु-अर््ण-भरे” उपय्णक्ु ि पंतक्ि मे ेंभारि की प्रशसं ा तितिध अर्थों मे ेंकी गई ह।ै आप भी अपनी मेािभृ ािा मे ेंभारि की स्ितुि के तिए एक कतििा की रचना कीतजए और उसका भािार््ण तहदं ी मे ेंभी तितखए।
उत्तर:
विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति करते हुए एक कविता रचना करें। उदाहरण के लिए: भारत मेरा गौरव है, संस्कृति इसकी अमर है। भाषाएँ अनेक हैं यहाँ, सबमें बसी एकता की छाँव है। भाषा का भावार्थ हिंदी में भी लिखा जाना चाहिए।
व्याख्या:
यह प्रश्न कविता लेखन पर आधारित है। विद्यार्थी को भारत की स्तुति करते हुए अपनी भाषा में कविता बनानी है और उसका हिंदी में भावार्थ लिखना है।
Q3.कत्वता ्म ेंजिाँ-जिाँ अिप्रु ास अलंकार आर्ा ि,ै उि पंत्क्तर्ों को खोजकर त्लत्खए। (ख) कत्वता की उि पंत्क्तर्ों को खोत्जए जिाँ रूपक अलंकार ि।ै साथ िी र्ि भी बताइए त्क कत्विे त्कस प्राककृत्तक दृश्र् र्ा वस्त ुको भारत का रूप ्मािकर त्चत्रित त्कर्ा ि?ै
उत्तर:
(क) कविता में अपृश्न अलंकार वाले पद हैं जैसे 'शत्मखु', 'शतरव' जहाँ 'श' वर्ण की पुनरावृत्ति हुई है। (ख) रूपक अलंकार वाले पद हैं जैसे '्मकु ुट शभ्रु त्ि्म-तषु ार'। यहाँ भारत को मुकुट के रूप में दर्शाया गया है, जो भारत की छवि को सुंदर, शीतल और श्वेत वर्णों से सजाया गया है।
व्याख्या:
अपृश्न अलंकार वह है जिसमें किसी वर्ण या शब्द की पुनरावृत्ति होती है। रूपक अलंकार में किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य वस्तु से की जाती है। प्रश्न में कविता के पदों को पहचान कर अलंकार की व्याख्या करनी है।
Q4.वि, लता, पष्ु प आत्द भारत के अ्मल्ू र् प्राककृत्तक संसाधि ि।ैं इिके संरक्ण के त्लए सरकार द्ारा बिाए गए अत्धत्िर््मों के बारे ्म ेंसचू िा एकत्रित कीत्जए और वि संरक्ण के त्लए बिाए त्िर््मों पर त्वचार कीत्जए।
उत्तर:
विद्यार्थी को भारत के प्राकृतिक संसाधनों जैसे वि (वन), लता (पौधे), पशु-पक्षी आदि के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अभ्यारणों (नेशनल पार्क, वन्यजीव अभ्यारण, संरक्षित क्षेत्र) की जानकारी एकत्रित करनी चाहिए। साथ ही इन संरक्षित क्षेत्रों के महत्व, संरक्षण के उपायों और उनके लाभों पर विचार प्रस्तुत करना चाहिए।
व्याख्या:
यह प्रश्न पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है। विद्यार्थी को सरकारी प्रयासों और संरक्षण के महत्व को समझकर लिखना है।
Q5.इिके अतिररक्ि यत्द आप ‘शस्य’ शब््द को तकसी और भाषा म ें भी जाििे ह ैं िो उस भाषा म ेंभी तलतखए। उपय्यक्ु ि िाक्य को अपिी मािभकृ ाषा म ेंभी तलतखए।
उत्तर:
विद्यार्थी को विभिन्न भारतीय भाषाओं में 'शस्य' शब्द के पर्यायवाची शब्दों की सूची बनानी है। उदाहरण के लिए: - हिंदी: फसल - संस्कृत: शस्य - पंजाबी: उपज - उर्दू: पैदावार - कश्मीरी: पांडावार - मराठी: पीक इसके बाद, दिए गए वाक्य को अपनी मातृभाषा में अनुवाद करना है।
व्याख्या:
यह प्रश्न भाषाओं के शब्दार्थ और अनुवाद पर आधारित है। विद्यार्थी को शब्दों के विभिन्न रूपों को पहचान कर अपनी भाषा में लिखना है।
Q6.दशे प्रे्म से संबंत्धत अन्र् कत्वताए ँपस्ु तकालर्, इटं रिेट से खोजकर पत्ढ़ए और त्कसी एक कत्वता का कक्ा ्म ेंवाचि भी कीत्जए। इस कत्वता की तरि िी संस्ककृतत्िष्ठ शब्दावली से र्क्ु त त्िराला की एक अन्र् कत्वता, ‘वर द,े वीणावात्दत्ि वर द!े ’ पस्ु तकालर्, इटं रिेट से ढूँढ़कर पत्ढ़ए।
उत्तर:
विद्यार्थी को देश प्रेम से संबंधित अन्य कविताएँ पुस्तकालय या इंटरनेट से खोजनी हैं। फिर किसी एक कविता का कक्षा में वाचन करना है। इसके अतिरिक्त, तिराला की संस्कृत शब्दावली से समृद्ध कविता 'वर द,े वीणावात्दत्ि वर द!े' भी पुस्तकालय या इंटरनेट से पढ़नी है।
व्याख्या:
यह प्रश्न शोध और प्रस्तुति पर आधारित है। विद्यार्थी को अतिरिक्त कविताएँ खोजकर उनका अध्ययन और प्रस्तुति करनी है।
Q7.सरूयकांत त्रिपाठी 'तिराला' का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर:
1899 में बंगाल के मतिषादल में
व्याख्या:
सरूयकांत त्रिपाठी 'तिराला' का जन्म वर्ष 1899 में बंगाल के मतिषादल में हुआ था। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के गढ़ाकोला (उनिव) के निवासी थे।
Q8.सरूयकांत त्रिपाठी 'तिराला' की प्रमुख काव्य रचनाओं में से कौन-सी रचना नहीं है?
उत्तर:
गंगा
व्याख्या:
'अनामिका', 'परिल', 'गीमिका' और 'कुकुितु' तिराला की प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं। 'गंगा' इस सूची में नहीं है।