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Chapter 10

🎓 Class 12📖 Bhaswati📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 9अध्याय 10 / 10

Chapter 10अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

प्रस्तावना एवं पाठ का परिचय

व्याख्या

प्रस्तावना एवं पाठ का परिचय

अध्याय 'विद्यास्थानानि' राजशेखर की काव्यमीमांसा से लिया गया है, जो संस्कृत काव्यशास्त्र की एक महत्वपूर्ण कृति है। इस ग्रन्थ में तत्कालीन भारत के अध्ययन-अध्यापन की परंपरा, संस्कृत वाङ्मय की व्यापक ज्ञानराशि का परिचय मिलता है। पाठ में वाङ्मय के दो मुख्य भेदों - शास्त्र और काव्य - का विवेचन किया गया है। शास्त्र को दो भागों में विभाजित किया गया है: अपौरुषेय और पौरुषेय। अपौरुषेय शास्त्र वे हैं जो पुरुष द्वारा रचित नहीं हैं, जैसे वेद, जिन्हें श्रुति कहा जाता है। पौरुषेय शास्त्र वे हैं जो मनुष्यों द्वारा रचित हैं। इस प्रकार, पाठ हमें वाङ्मय के व्यापक वर्गीकरण और उसके अध्ययन के महत्व से परिचित कराता है।

  • विद्यास्थानानि पाठ राजशेखर की काव्यमीमांसा से संगृहीत है।
  • वाङ्मय के दो भेद हैं: शास्त्र और काव्य।
  • शास्त्र दो प्रकार के होते हैं: अपौरुषेय (पुरुष द्वारा न रचित) और पौरुषेय (पुरुष द्वारा रचित)।
  • अपौरुषेय शास्त्र को श्रुति कहा जाता है, जिसमें वेद आते हैं।
  • पौरुषेय शास्त्र में पुराण, मीमांसा आदि आते हैं।
  • यह पाठ तत्कालीन भारत के अध्ययन-अध्यापन की परंपरा को प्रकट करता है।
  • 📌 वाङ्मयम् - वाणी का प्रपंच, साहित्य।
  • 📌 शास्त्र - ज्ञान का व्यवस्थित स्वरूप।
  • 📌 काव्य - साहित्य की वह विधा जो सौंदर्य और भावनाओं को व्यक्त करती है।

वेद, वेदांग एवं शास्त्रों का संक्षिप्त परिचय

व्याख्या

वेद, वेदांग एवं शास्त्रों का संक्षिप्त परिचय

इस खंड में वेदों के चार भेदों का परिचय दिया गया है - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। इनके अतिरिक्त छह वेदांगों का वर्णन है: शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष। वेदों के साथ उपवेद भी होते हैं जैसे इतिहासवेद, धनुर्वेद, गन्धर्ववेद और आयुर्वेद। वेदांग वेदों के अध्ययन में सहायक अंग हैं, जो वेदों के सही उच्चारण, व्याकरण, अर्थ और छन्द आदि का ज्ञान प्रदान करते हैं। पौरुषेय शास्त्रों में पुराण, आन्वीक्षिकी, मीमांसा और स्मृतितन्त्र आते हैं। पुराणों में इतिहास और धर्म का वर्णन होता है, आन्वीक्षिकी तर्कशास्त्र है, मीमांसा वेदों के अर्थ और कर्मकाण्ड की व्याख्या करती है और स्मृतितन्त्र में सामाजिक नियम होते हैं। इस प्रकार, ये सभी विद्यास्थानानि मिलकर संस्कृत ज्ञान के व्यापक क्षेत्र को दर्शाते हैं। **Table on page 2 (8×3)** | विद्यास्थानानि | | | | --- | --- | --- | | वेदा: | वेदाङ्गानि | शास्त्राणि | | 1. ऋचक् | 5. शिक्षा | 11. पुराणम् | | 2. यजु: | 6. कल्प: | 12. आन्विक्षिकी | | 3. साम | 7. व्याकरणम् | 13. मीमांसा | | 4. अथर्व | 8. निरुक्तम् | 14. स्मृतितन्त्रम् | | | 9. छन्द: | | | | 10. ज्योतिषम् | |

  • वेद चार प्रकार के होते हैं: ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद।
  • षडङ्गानि (छः वेदांग) हैं: शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।
  • उपवेदों में इतिहासवेद, धनुर्वेद, गन्धर्ववेद, आयुर्वेद आते हैं।
  • पौरुषेय शास्त्रों में पुराण, आन्वीक्षिकी, मीमांसा, स्मृतितन्त्र सम्मिलित हैं।
  • पुराणों में इतिहास और धर्म का वर्णन होता है।
  • मीमांसा वेदों के अर्थ और कर्मकाण्ड की व्याख्या करती है।
  • 📌 ऋग्वेद - वेदों का पहला भाग, जिसमें ऋचाएँ हैं।
  • 📌 यजुर्वेद - यज्ञ मंत्रों का संग्रह।
  • 📌 सामवेद - संगीतात्मक मंत्र।

विद्यास्थानानि की सूची एवं उनका वर्गीकरण

व्याख्या

विद्यास्थानानि की सूची एवं उनका वर्गीकरण

इस खंड में चतुर्दश विद्यास्थानानि का स्पष्ट वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है। ये विद्यास्थानानि तीन मुख्य वर्गों में विभाजित हैं: वेद, वेदांग और शास्त्र। वेदों में ऋचः (ऋग्वेद), यजुः (यजुर्वेद), साम (सामवेद) और अथर्व (अथर्ववेद) सम्मिलित हैं। वेदांगों मे

अभ्यास प्रश्नChapter 10

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतभाषया लिखत- (क) वाङ्मयस्य उभौ भेदौ लिखत? (ख) अपौरुषेयं किम् अस्ति? (ग) विवृतक्रियातन्त्रा: के सन्ति? (घ) ब्राह्मणं केषां स्तुतिनिन्दाव्याख्यानविनियोगान् करोति? (ङ) वेदा: कति सन्ति? तेषां नामानि लिखत। (च) षडङ्गानां नामानि लिखत। (छ) व्याकरणं किं कथ्यते?

उत्तर:

उत्तर - (क) वाङ्मयस्य उभौ भेदौ सन्ति - पौरुषेयम् च अपौरुषेयम् च। (ख) अपौरुषेयं तत्त्वं यत् मानवेन न निर्मितम्, न कश्चन मनुष्यः तस्य स्रष्टा। (ग) विवृतक्रियातन्त्रा: वेदाः, उपवेदाः, स्मृतयः, पुराणानि, व्याकरणम्, न्यायशास्त्रम्, मीमांसा च सन्ति। (घ) ब्राह्मणः वेदेषु स्तुतिनिन्दाव्याख्यानविनियोगान् करोति। (ङ) वेदा: चत्वारि सन्ति - ऋग्वेदः, यजुर्वेदः, सामवेदः, अथर्ववेदः। (च) षडङ्गानाम् नामानि - निरुक्तम्, छन्दः, व्याकरणम्, ज्योतिषम्, कालम्, कल्पः। (छ) व्याकरणं भाषायाः नियमविधानं कथ्यते, यत् शब्दरचनां, वाक्यरचनां च नियंत्रयति।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्नस्य संस्कृतभाषायाम् स्पष्टं उत्तरं दत्तम्। वेदाः, शास्त्राणि, तथा व्याकरणस्य परिभाषा सम्यक् विवृता।

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Q2.2. रेखाद्भूतपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) शब्दानाम् अन्वाख्यानं व्याकरणम्। (ख) पुराणं पौरुषेयम् अस्ति। (ग) ज्योतिषं ग्रहगणितम् अस्ति। (घ) इतिहास: पुराणप्रभेदोऽस्ति। (ङ) मीमांसा सहस्रेण न्यायै: निगमवाक्यानां विवेकत्री अस्ति।

उत्तर:

उत्तर - (क) शब्दानाम् अन्वाख्यानं किम्? (ख) पुराणं पौरुषेयम् वा? (ग) ज्योतिषं ग्रहगणितम् अस्ति वा? (घ) इतिहासः किम् पुराणप्रभेदः अस्ति? (ङ) मीमांसा न्यायशास्त्रे निगमवाक्यानां विवेकत्री अस्ति वा? प्रत्येकं प्रश्नं रेखाद्भूतपदानि आधृत्य निर्मातव्यं।

व्याख्या:

प्रत्येकं प्रश्नं पाठे निर्दिष्टपदानि आधारं कृत्वा निर्मीयते। प्रश्ननिर्माणकौशलं अभ्यासार्थं।

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Q3.3. उचितां पंक्तिं मञ्जूषाया: चित्वा समक्षं लिखत- विवृतक्रियातन्त्रा:, इतिहासवेद: धनुर्वेद: गन्धर्व: आयुर्वेद: च, द्विविधामन्त्रा: ब्राह्मणञ्च, अपौरुषेयं पौरुषेयं च, शास्त्रं काव्यं च (क) वाङ्मयम् उभयथा - ... (ख) शास्त्रं द्विधा - ... (ग) श्रुति: - ... (घ) मन्त्रा: - ... (ङ) उपवेदा: - ...

उत्तर:

उत्तर - (क) वाङ्मयम् उभयथा पौरुषेयम् अपौरुषेयम् च भवति। (ख) शास्त्रं द्विधा - वेदशास्त्रं च काव्यशास्त्रं च। (ग) श्रुति: वेदाः एव सन्ति। (घ) मन्त्रा: द्विधा - विवृतक्रियातन्त्राणि च ब्राह्मणाः च। (ङ) उपवेदा: धनुर्वेदः, गन्धर्वः, आयुर्वेदः च सन्ति।

व्याख्या:

प्रत्येकं विकल्पं पाठे निर्दिष्टानां पदानां मेलनेन सम्यक् लिखितम्।

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Q4.4. उचितमेलनं कुरुत- (क) चत्वारि शास्त्राणि - ज्योतिषम् (ख) शब्दानामन्त्राख्यानम् - पुराणम् (ग) मन्त्राणां विनियोजकं सूत्रं - कल्प: (घ) पौरुषेयं - व्याकरणम् (ङ) ग्रहगणितम् - पुराणम्, आन्वीक्षिकी, मीमांसा, स्मृतितन्त्रम्।

उत्तर:

उत्तर - (क) चत्वारि शास्त्राणि - ज्योतिषम् (ख) शब्दानामन्त्राख्यानम् - पुराणम् (ग) मन्त्राणां विनियोजकं सूत्रं - कल्प: (घ) पौरुषेयं - व्याकरणम् (ङ) ग्रहगणितम् - पुराणम्, आन्वीक्षिकी, मीमांसा, स्मृतितन्त्रम्।

व्याख्या:

प्रत्येकं युग्मं पाठे निर्दिष्टानुसारं मेलितम्।

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Q5.5. उचितविभक्तिं प्रयुज्य संख्यावाचिशब्दानां प्रयोगं कुरुत- (क) ... वेदा:। (चतुर्) (ख) …………………… अङ्गानि। (षट्) (ग) …………………… शास्त्राणि। (चतुर्) (घ) …………………… नायकः। (एक) (ङ) …………………… पुराणानि। (अष्टादश)

उत्तर:

उत्तर - (क) चत्वरः वेदा:। (ख) षट् अङ्गानि। (ग) चत्वरि शास्त्राणि। (घ) एकः नायकः। (ङ) अष्टादश पुराणानि।

व्याख्या:

संख्यावाचिशब्दानां उचितविभक्तिं प्रयोगेण वाक्यानि निर्मीयन्ते।

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Q6.6. अव्ययपदानि चित्वा लिखत- (क) जगतो यत्र निबद्धं तद्विज्ञेयं पुराणम्। (ख) पुराणप्रभेद एव इतिहासः। (ग) अष्टादश एव श्रुत्यर्थस्मरणात्स्मृतयः। (घ) स च द्विधा परिक्रियापुराकल्पाभ्याम्। (ङ) तत्र वर्णानां स्थान-करण-प्रयत्नादिभिः निष्पत्तिनिर्णयिनी शिक्षा।

उत्तर:

उत्तर - (क) जगतो यत्र निबद्धं तद्विज्ञेयं पुराणम्। (ख) पुराणप्रभेद एव इतिहासः। (ग) अष्टादश एव श्रुत्यर्थस्मरणात्स्मृतयः। (घ) स च द्विधा परिक्रियापुराकल्पाभ्याम्। (ङ) तत्र वर्णानां स्थान-करण-प्रयत्नादिभिः निष्पत्तिनिर्णयिनी शिक्षा।

व्याख्या:

अव्ययपदानां चित्वा वाक्यानि संस्कृतभाषायाम् लिखितानि।

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Q7.7. सन्धि कुरुत- (क) ब्राह्मणम्+च - (ख) आथर्वणः+च - (ग) वेद+आत्मा - (घ) अष्टादश+एव - (ङ) छन्दांसि+अगीतानि -

उत्तर:

उत्तर - (क) ब्राह्मणञ्च (ख) आथर्वणश्च (ग) वेदात्मा (घ) अष्टादश एव (ङ) छन्दांसि अगीतानि

व्याख्या:

प्रत्येकं पदयुग्मं सन्धिसूत्रानुसारं योजितम्।

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Q8.8. निम्नलिखितशब्दानां सहायतया वाक्यप्रयोगं कुरुत- इह, वेदाः, अति, अनशनन्, एव

उत्तर:

उत्तर - (1) इह वेदाः पठ्यन्ते। (2) सः अति ज्ञानी अस्ति। (3) अनशनन् शरीरं दुर्बलम् भवति। (4) एव तस्य कार्यं सिद्धम्।

व्याख्या:

प्रत्येकशब्दस्य सहायतया संस्कृतवाक्यानि निर्मितानि।

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