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Chapter 1

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अध्याय 1 / 10Chapter 2

Chapter 1अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

गद्य का पठन-पाठन

व्याख्या

गद्य का पठन-पाठन

इस अनुभाग में गद्य के पठन-पाठन की महत्ता और विधि पर विस्तार से चर्चा की गई है। गद्य को कवि की कसौटी माना गया है क्योंकि अच्छा गद्य लेखक के अनुभवों और विचारों की सरल, सरस एवं प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति होता है। लेखक अपने विचारों को व्यवस्थित और तर्कपूर्ण क्रम में प्रस्तुत करता है। भाषा को संप्रेषणीय बनाने के लिए मुहावरों, लोकोक्तियों, व्यंग्यपूर्ण और लाक्षणिक भाषा का प्रयोग किया जाता है। पाठ्यपुस्तक में विविध विधाओं के पाठ शामिल हैं, जैसे वैचारिक, वैज्ञानिक, ललित निबंध, यात्रा-विवरण, संस्मरण, जीवनी, व्यंग्य, कहानी आदि, ताकि विद्यार्थी विभिन्न भाषा-प्रयोगों से परिचित हो सकें। मुखर पठन में शब्दों का शुद्ध उच्चारण, वाक्यों का उचित आरोह-अवरोह, तान-अनुतान और बलाघात आवश्यक है। कठिन शब्दों को पहले से चिन्हित कर उनका अभ्यास कराना चाहिए। मौन पठन भी आज के युग की शैक्षणिक आवश्यकता है, जिसमें शिक्षक को विशेष सजगता बरतनी चाहिए। मौन पठन से पूर्व कठिन शब्दों के अर्थ समझाना और अर्थग्रहण का परीक्षण करना आवश्यक है। विचार-बोध के लिए पाठ में अनुच्छेदों का महत्व है, इन्हें उसी क्रम में पढ़ाना चाहिए। पाठ के प्रभाव की समझ के लिए विचार-बोध के प्रश्न सहायक होते हैं। भाषा-प्रयोगों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि मुहावरों, कहावतों और अलंकारों से भाषा अधिक सहज, प्रभावपूर्ण और संप्रेषणीय बनती है। मौखिक अभिव्यक्ति के अवसरों को बढ़ावा देना चाहिए, जैसे भाषण, वाद-विवाद, आशु-रचना आदि। योग्यता-विस्तार में पाठों को आधार बनाकर विद्यार्थियों की सृजनात्मक शक्ति, ज्ञान और चिंतन को विकसित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। कुल मिलाकर गद्य के पठन-पाठन में ऐसे प्रयत्न करने चाहिए जिससे विद्यार्थियों की लिखित एवं मौखिक अभिव्यक्ति का विकास हो और हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि जाग्रत हो।

  • गद्य को कवि की कसौटी माना गया है क्योंकि यह सरल, सरस और प्रभावपूर्ण होता है।
  • मुहावरों, लोकोक्तियों और अलंकारों का प्रयोग भाषा को संप्रेषणीय बनाता है।
  • मुखर पठन में शब्दों के शुद्ध उच्चारण और वाक्यों के आरोह-अवरोह का अभ्यास आवश्यक है।
  • मौन पठन में कठिन शब्दों के अर्थ समझाना और अर्थग्रहण का परीक्षण जरूरी है।
  • विचार-बोध के लिए अनुच्छेदों का क्रम और प्रश्नों का अध्ययन सहायक होता है।
  • मौखिक अभिव्यक्ति के अवसर जैसे भाषण, वाद-विवाद आदि से भाषा कौशल बढ़ता है।
  • 📌 गद्य: सरल और व्यवस्थित भाषा में विचारों की अभिव्यक्ति।
  • 📌 मुहावरा: भाषा में प्रयुक्त स्थायी वाक्यांश।
  • 📌 अलंकार: भाषा की शोभा बढ़ाने वाले शब्द-प्रयोग।

यशपाल

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यशपाल

इस खंड में लेखक यशपाल का संक्षिप्त परिचय दिया गया है। यशपाल का जन्म 1903 में फिरोजपुर छावनी में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में प्राप्त की। विद्यार्थी काल से ही वे क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय थे और भगतसिंह जैसे अमर शहीदों के साथ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। यशपाल की प्रमुख कृतियों में उपन्यास जैसे 'देशद्रोही', 'पार्टी कामरेड', 'दादा कामरेड', 'झूठा सच', 'मेरी, तेरी, उसकी बात' शामिल हैं। उन्हें 'मेरी, तेरी, उसकी बात' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला। उनकी कहानियों में कथा रस के साथ वर्ग संघर्ष, मनोविश्लेषण और पैना व्यंग्य प्रमुख हैं। यशपाल का मानना था कि समाज को उन्नत बनाने का एकमात्र रास्ता सामाजिक और आर्थिक समानता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदी के साथ उर्दू और अंग्रेजी के शब्दों का भी प्रयोग किया। प्रस्तुत कहानी में वे देश में फैले अंधविश्वास, ऊँच-नीच के भेदभाव, अमानवीयता और गरीबों की मजबूरी को उजागर करते हैं। कहानी यह दिखाती है कि दुःख सभी को समान रूप से तोड़ता है, पर कुछ लोगों को दुःख मनाने का अधिकार तक नहीं मिलता।

  • यशपाल का जन्म 1903 में फिरोजपुर छावनी में हुआ।
  • वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय क्रांतिकारी थे।
  • उनकी प्रमुख कृतियों में कई उपन्यास और कहानी संग्रह शामिल हैं।
  • उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
  • उनकी कहानियों में वर्ग संघर्ष, मनोविश्लेषण और व्यंग्य प्रमुख हैं।
  • समाज सुधार के लिए सामाजिक और आर्थिक समानता पर जोर देते थे।
  • 📌 क्रांतिकारी: स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय व्यक्ति।
  • 📌 साहित्य अकादमी पुरस्कार: साहित्य में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार।
  • 📌 वर्ग संघर्ष: समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संघर्ष।

दु:ख का अधिकार

व्याख्या

दु:ख का अधिकार

यह पाठ समाज में पोशाक के महत्व, सामाजिक भेदभाव और दुःख के अधिकार की संवेदनशीलता को उजागर करता है। लेखक बताते हैं कि मनुष्यों की पोशाक उन्हें विभिन्न सामाजिक वर्गों में बाँटती है और यह उनके अधिकारों और दर्जे को दर्शाती है। कभी-कभी पोशाक ही हमें समाज क

अभ्यास प्रश्नChapter 1

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए— 1. किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है? 2. खरबूजे बेचनेवाली स्त्री से कोई खरबूजे क्यों नहीं खरीद रहा था? 3. उस स्त्री को देखकर लेखक को कैसा लगा? 4. उस स्त्री के लड़के की मृत्यु का कारण क्या था? 5. बुद्धिया को कोई भी क्यों उधार नहीं देता?

उत्तर:

1. किसी व्यक्ति की पोशाक से उसकी सामाजिक स्थिति, आर्थिक स्थिति और व्यक्तित्व का पता चलता है। 2. खरबूजे बेचनेवाली स्त्री गरीब और बदहाल थी, इसलिए लोग उससे खरबूजे नहीं खरीद रहे थे। 3. लेखक को उस स्त्री को देखकर दयनीय और दुखी महसूस हुआ। 4. उस स्त्री के लड़के की मृत्यु बीमारी या गरीबी के कारण हुई थी। 5. बुद्धिया को कोई उधार इसलिए नहीं देता क्योंकि वह गरीब और बदहाल थी, और लोग उस पर भरोसा नहीं करते थे।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षिप्त रूप में दिया गया है। पोशाक से व्यक्ति की पहचान होती है, और गरीबी के कारण लोग खरबूजे नहीं खरीदते। लेखक की सहानुभूति उस स्त्री के प्रति थी। लड़के की मृत्यु गरीबी या बीमारी से हुई। उधार न मिलना सामाजिक कारणों से था।

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Q2.(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए— 1. मनुष्य के जीवन में पोशाक का क्या महत्व है? 2. पोशाक हमारे लिए कब बंधन और अड़चन बन जाती है? 3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण क्यों नहीं जान पाया? 4. भगवान अपने परिवार का निर्वाह कैसे करता था? 5. लड़के की मृत्यु के दूसरे ही दिन बुद्धिया खरबूजे बेचने क्यों चल पड़ी? 6. बुद्धिया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद क्यों आई?

उत्तर:

1. पोशाक मनुष्य की पहचान और सामाजिक स्थिति दर्शाती है। यह सम्मान और आत्म-सम्मान का प्रतीक होती है। 2. जब पोशाक सामाजिक दबाव और दिखावे का माध्यम बन जाती है, तब यह बंधन और अड़चन बन जाती है। 3. लेखक उस स्त्री के रोने का कारण इसलिए नहीं जान पाया क्योंकि वह स्त्री अपनी पीड़ा छुपा रही थी। 4. भगवान अपने परिवार का निर्वाह मजदूरी और छोटे-छोटे काम करके करता था। 5. लड़के की मृत्यु के दूसरे दिन ही बुद्धिया को परिवार चलाने के लिए काम पर जाना पड़ा। 6. बुद्धिया के दु:ख को देखकर लेखक को अपने पड़ोस की संभ्रांत महिला की याद आई क्योंकि वह महिला दुखों को छुपाती थी और दिखावा करती थी।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के भाव और संदर्भ के अनुसार संक्षिप्त रूप में दिया गया है। पोशाक का महत्व, सामाजिक प्रभाव, लेखक की समझ, परिवार की आर्थिक स्थिति और भावनात्मक प्रतिक्रिया को समझाया गया है।

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Q3.(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए— 1. बाजार के लोग खरबूजे बेचनेवाली स्त्री के बारे में क्या-क्या कह रहे थे? अपने शब्दों में लिखिए। 2. पास-पड़ोस की दुकानों से पूछने पर लेखक को क्या पता चला? 3. लड़के को बचाने के लिए बुद्धिया माँ ने क्या-क्या उपाय किए? 4. लेखक ने बुद्धिया के दु:ख का अंदाजा कैसे लगाया? 5. इस पाठ का शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ कहाँ तक सार्थक है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

1. बाजार के लोग कहते थे कि वह स्त्री गरीब और बदहाल है, इसलिए कोई उसके खरबूजे नहीं खरीदता। वे उसकी स्थिति पर दया नहीं करते थे। 2. पास-पड़ोस की दुकानों से पता चला कि वह स्त्री अकेली है और उसके परिवार में बहुत कष्ट हैं। 3. बुद्धिया माँ ने लड़के के इलाज के लिए पैसे जुटाने की कोशिश की, दवाइयाँ दीं और भगवान से मदद मांगी। 4. लेखक ने बुद्धिया के व्यवहार, उसकी आंखों में आंसू और उसकी बातें सुनकर उसके दु:ख का अंदाजा लगाया। 5. शीर्षक ‘दु:ख का अधिकार’ सार्थक है क्योंकि हर व्यक्ति को अपने दु:ख को व्यक्त करने और महसूस करने का अधिकार होता है, चाहे वह गरीब हो या अमीर।

व्याख्या:

प्रत्येक उत्तर पाठ के भाव और घटनाओं के आधार पर विस्तार से दिया गया है। बाजार की सोच, सामाजिक स्थिति, माँ की ममता, लेखक की समझ और शीर्षक की व्याख्या स्पष्ट की गई है।

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Q4.( ग ) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए— 1. जैसे वायु की लहरें कटी हुई पतंग को सहसा भूमि पर नहीं गिर जाने देतीं उसी तरह खास परिस्थितियों में हमारी पोशाक हमें झुक सकने से रोके रहती है। 2. इनके लिए बेटा-बेटी, खसम-लुगाई, धर्म-ईमान सब रोटी का टुकड़ा है। 3. शोक करने, गम मनाने के लिए भी सहूलियत चाहिए और... दु:खी होने का भी एक अधिकार होता है।

उत्तर:

1. यह कहावत बताती है कि वायु की लहरें कटी हुई पतंग को अचानक गिरने से बचाती हैं, ठीक वैसे ही हमारी पोशाक भी हमें सामाजिक दबावों और परिस्थितियों में झुकने से रोकती है। 2. यहाँ बताया गया है कि लोगों के लिए परिवार के सदस्य, धर्म और विश्वास जीवन के लिए आवश्यक हैं, जैसे रोटी का टुकड़ा। 3. यह वाक्य बताता है कि दुःख और शोक व्यक्त करने के लिए भी उचित समय और स्थान की आवश्यकता होती है, और हर व्यक्ति को दुःखी होने का अधिकार होता है।

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्यांश का अर्थ और भावार्थ विस्तार से समझाया गया है। यह सामाजिक और भावनात्मक संदर्भों को स्पष्ट करता है।

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Q5.1. निम्नांकित शब्द-समूहों को पढ़ो और समझो— (क) कड़ूघा, पतड़ूग, चञ्चल, ठण्डा, सम्बन्ध। (ख) कंघा, पतंग, चंचल, ठंडा, संबंध। (ग) अक्षुण्ण, सम्मिलित, दुअनी, चवनी, अन्न। (घ) संशय, संसद, संरचना, संवाद, संहार। (ड) अँधेरा, बाँट, मुँह, ईट, महिलाएँ, में, में। ध्यान दो कि ड़, ज, ण, न् और म् ये पाँचों पंचमाक्षर कहलाते हैं। इनके लिखने की विधियाँ तुमने ऊपर देखीं— इसी रूप में या अनुस्वार के रूप में। इन्हें दोनों में से किसी भी तरीके से लिखा जा सकता है और दोनों ही शुद्ध हैं। हाँ, एक पंचमाक्षर जब दो बार आए तो अनुस्वार का प्रयोग नहीं होगा; जैसे— अम्मा, अन्न आदि। इसी प्रकार इनके बाद यदि अंतस्थ य, र, ल, व और ऊष्म श, ष, स, ह आदि हों तो अनुस्वार का प्रयोग होगा, परंतु उसका उच्चारण पंचम वर्णों में से किसी भी एक वर्ण की भाँति हो सकता है; जैसे— संशय, संरचना में ‘न्’, संवाद में ‘म्’ और संहार में ‘ड्’। ( ` ) यह चिह्न है अनुस्वार का और ( * ) यह चिह्न है अनुनासिक का। इन्हें क्रमश: बिंदु और चंद्र-बिंदु भी कहते हैं। दोनों के प्रयोग और उच्चारण में अंतर है। अनुस्वार का प्रयोग व्यंजन के साथ होता है अनुनासिक का स्वर के साथ।

उत्तर:

यह अभ्यास शब्दों के उच्चारण और लेखन में पंचमाक्षरों (ड़, ज, ण, न्, म्) के प्रयोग को समझने के लिए है। अनुस्वार और अनुनासिक के चिह्नों का प्रयोग और उच्चारण भी समझाया गया है। विद्यार्थी को दिए गए शब्द-समूहों को पढ़कर इन नियमों को समझना है।

व्याख्या:

यह भाषा-अध्ययन का भाग है जिसमें पंचमाक्षरों की पहचान, उनके लेखन और उच्चारण के नियम समझाए गए हैं।

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Q6.2. निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए— ईमान ... बदन ... अंदाज़ा ... बेचैनी ... गम ...

उत्तर:

ईमान - विश्वास, सच्चाई बदन - शरीर, देह अंदाज़ा - अनुमान, अनुमानित बेचैनी - बेचैनी, अस्वस्थता गम - दुःख, पीड़ा

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द के समानार्थक शब्द दिए गए हैं जो अर्थ में मेल खाते हैं।

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Q7.3. निम्नलिखित उदाहरण के अनुसार पाठ में आए शब्द-युग्मों को छाँटकर लिखिए- उदाहरण : बेटा-बेटी

उत्तर:

पाठ में आए शब्द-युग्म जैसे: खसम-लुगाई, बेटा-बेटी, पास-पड़ोस, दुअनी-चवन्नी, मुँह-अँधेरे, झाड़ना-फूँकना, छन्नी-ककना आदि।

व्याख्या:

विद्यार्थी को पाठ से शब्द-युग्मों को पहचानकर लिखना है।

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Q8.4. पाठ के संदर्भ के अनुसार निम्नलिखित वाक्यांशों की व्याख्या कीजिए- बंद दरवाजे खोल देना, निर्वाह करना, भूख से बिलबिलाना, कोई चारा न होना, शोक से द्रवित हो जाना।

उत्तर:

बंद दरवाजे खोल देना - किसी समस्या का समाधान करना या अवसर प्रदान करना। निर्वाह करना - जीवन यापन करना, परिवार का पालन-पोषण करना। भूख से बिलबिलाना - अत्यधिक भूख से परेशान होना। कोई चारा न होना - कोई उपाय या समाधान न होना। शोक से द्रवित हो जाना - दुःख के कारण आंसू बहाना।

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्यांश का अर्थ और भावार्थ पाठ के संदर्भ में समझाया गया है।

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