Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
भारतीय संगीत का सामान्य परिचय
व्याख्याभारतीय संगीत का सामान्य परिचय
भारतीय संगीत एक ललित कला है जो स्वर और लय के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति करती है। कलाओं को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है—ललित कलाएँ और अन्य उपयोगी कलाएँ। ललित कलाओं में संगीत, काव्य, चित्रकला, मूर्तिकला एवं स्थापत्य कला प्रमुख हैं, जिनमें संगीत को श्रेष्ठतम माना गया है। संगीत में गायन, वादन और नृत्य का समन्वय होता है, जो भावों को प्रकट करने का माध्यम है। संगीत का मूल आधार स्वर (स्वर) और लय (ताल) है, जिनके संयोजन से भावों की विविध अभिव्यक्तियाँ संभव होती हैं। भाषा, कविता या पद के साथ स्वर और लय का मेल संगीत को विशिष्ट आकर्षण प्रदान करता है। संगीत न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का भी माध्यम है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से चित्त को एकाग्र कर संतुलित करने की क्षमता रखता है। संगीत का प्रभाव केवल मनुष्यों पर ही नहीं, बल्कि जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर भी पड़ता है। इस प्रकार संगीत भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो व्यक्ति और समाज को जोड़ता है। **Table on page 9 (12×2)** | प्रदेश | गायन एवं नृत्य शैलियाँ | | --- | --- | | असम | बिहू, छाऊ आदि | | उत्तर प्रदेश | होरी, बारहमासा, कजरी, चैती, रसिया, लांगुरिया, बिरहा, रासलीला, नौटंकी के गीत प्रकार आदि | | गुजरात | गरबा, रास, डांडिया आदि | | पंजाब | हीर, टप्पा, गिद्दा, भाँगड़ा आदि | | महाराष्ट्र | लावणी, मंगलागौर आदि | | राजस्थान | गोरबंद, मांड, घूमर, झूमर, कालबेलिया आदि | | जम्मू कश्मीर | भाण्ड, पाथिर, राउफ, जबरो, चकरी आदि | | अरुणाचल प्रदेश | टापू, पोन्ना, नीशीदोऊ, लोकूबवांग आदि | | केरल | तिरुवादिरकली, पाना, तुल्लल, थेव्यम आदि | | आंध्र प्रदेश | धिमसा, बुर्रा कत्था, तोलू, बोम्मालता, रोतेला पंडुगा आदि | | पश्चिम बंगाल | बाऊल, रबिन्द्र संगीत, भटियाली, गोडीय, छऊ आदि | **Table on page 14 (13×2)** | अ | आ | | --- | --- | | (क) ललित कला | 1. शोरी मियाँ | | (ख) हिंदुस्तानी संगीत | 2. जम्मू-कश्मीर | | (ग) टुमरी | 3. अवनद्ध वाद्य | | (घ) पल्लवी | 4. मिर्जापुर | | (ङ) टप्पा | 5. सुषिर वाद्य | | (च) कजरी | 6. अष्टपदी | | (छ) गोड़ीय | 7. धातु वाद्य | | (ज) चकरी | 8. ध्रुपद | | (झ) कोम्बू | 9. कर्नाटक संगीत | | (ञ) तन्तीपानई | 10. पश्चिम बंगाल | | (ट) कइचिलम्बु | 11. मूर्तिकला | | (ठ) गीत गोविन्दम | 12. नवाब वाजिद अली शाह |
- संगीत ललित कलाओं में श्रेष्ठतम कला है।
- संगीत में गायन, वादन और नृत्य तीनों शामिल हैं।
- स्वर और लय संगीत के मूल तत्व हैं।
- संगीत भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम है।
- संगीत का सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है।
- संगीत मनोवैज्ञानिक रूप से चित्त को संतुलित करता है।
- 📌 ललित कला: ऐसी कला जो सौंदर्य और भावों की अभिव्यक्ति करती है।
- 📌 स्वर: संगीत के मूल ध्वनि तत्व।
- 📌 लय: संगीत की ताल या समयबद्धता।
मार्गी व देशी संगीत
व्याख्यामार्गी व देशी संगीत
भारतीय संगीत में प्राचीन काल से दो प्रमुख प्रकार के संगीत प्रचलित रहे हैं—मार्गी संगीत और देशी संगीत। मार्गी संगीत वह है जिसमें शास्त्रों में वर्णित नियमों का कठोर पालन किया जाता है। यह संगीत धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक साधना के लिए प्रयुक्त होता था। वैदिक और साम-संगीत इसी श्रेणी में आते हैं। मार्गी संगीत का विकास ब्रह्मा से लेकर भरत जैसे संगीतज्ञों के द्वारा हुआ और इसे मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया। इसके नियम अत्यंत कठोर और निश्चित होते थे, इसलिए यह आज के समय में प्रचलन में नहीं रह पाया। दूसरी ओर देशी संगीत वह है जो विभिन्न प्रदेशों की जनरुचि और सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप विकसित हुआ। इसमें गायन, वादन और नृत्य की विविध शैलियाँ शामिल हैं, जो शास्त्रों के नियमों के साथ-साथ जनसाधारण की रुचि और भावनाओं को भी समाहित करती हैं। देशी संगीत में लोक संगीत भी आता है, जो पूर्णतया जनरुचि पर आधारित होता है और सामाजिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक आयोजनों में गाया जाता है। देशी संगीत में विभिन्न भाषाओं और रागों का प्रयोग होता है, जो इसे जीवंत और विविधतापूर्ण बनाता है। समय के साथ शास्त्र और क्रिया का आदान-प्रदान होता रहा है, जिससे देशी संगीत स्वस्थ और विकसित होता रहा।
- मार्गी संगीत शास्त्रों के कठोर नियमों पर आधारित है।
- देशी संगीत जनरुचि और सांस्कृतिक परिवेश के अनुसार विकसित हुआ।
- मार्गी संगीत धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता था।
- देशी संगीत में लोक संगीत भी शामिल है।
- देशी संगीत में विभिन्न भाषाओं और रागों का समावेश होता है।
- समय के साथ शास्त्र और क्रिया का आदान-प्रदान देशी संगीत को विकसित करता है।
- 📌 मार्गी संगीत: शास्त्रों के नियमों के अनुसार गाया जाने वाला संगीत।
- 📌 देशी संगीत: जनरुचि और सांस्कृतिक परिवेश के अनुसार विकसित संगीत।
- 📌 लोक संगीत: जनसाधारण द्वारा गाया जाने वाला सरल और सहज संगीत।
शास्त्रीय संगीत
व्याख्याशास्त्रीय संगीत
शास्त्रीय संगीत वह संगीत है जो शास्त्रों में वर्णित नियमों के आधार पर निर्मित होता है। यह संगीत स्वर और लय के नियमबद्ध संयोजन से बनता है और इसकी परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। शास्त्रीय संगीत में स्वर के उतार-चढ़ाव, गति और ताल का संतुलित प्रयोग हो
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. संगीत रत्नाकर के अनुसार संगीत की परिभाषा बताइए।
उत्तर:
संगीत रत्नाकर के अनुसार संगीत वह कला है जो मन को आनंदित करती है और जिसमें स्वर, ताल, और लय का समन्वय होता है। यह मनुष्य के भावों को व्यक्त करने का माध्यम है।
व्याख्या:
संगीत रत्नाकर में संगीत की परिभाषा में स्वर, ताल और लय के समन्वय को मुख्य माना गया है जो मन को आनंदित करता है।
Q2.2. कर्नाटक संगीत पद्धति में प्रचलित विधाएँ कौन-सी हैं?
उत्तर:
कर्नाटक संगीत पद्धति में मुख्यतः चार प्रमुख विधाएँ प्रचलित हैं: ध्रुपद, ख्याल, वादन और भजन। इनमें से ख्याल और वादन अधिक लोकप्रिय हैं।
व्याख्या:
कर्नाटक संगीत में विभिन्न विधाओं का समावेश है, जिनमें ध्रुपद और ख्याल शास्त्रीय गायन की विधाएँ हैं, जबकि वादन वाद्य संगीत को दर्शाता है।
Q3.3. उपशास्त्रीय संगीत की गायन शैली टप्पा की रचनाओं में अधिकांशतः किन भाषाओं के शब्दों का प्रयोग होता है?
उत्तर:
टप्पा की रचनाओं में मुख्यतः हिंदी, ब्रज भाषा और पंजाबी भाषाओं के शब्दों का प्रयोग होता है। यह शैली लोक और शास्त्रीय संगीत का मिश्रण है।
व्याख्या:
टप्पा शैली में क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग होता है जो इसे लोक-संगीत के करीब लाता है, इसलिए हिंदी, ब्रज और पंजाबी शब्दों का अधिक उपयोग होता है।
Q4.4. लोक संगीत का मूल उद्देश्य क्या है?
उत्तर:
लोक संगीत का मूल उद्देश्य समाज के भावों, परंपराओं, और जीवन के विभिन्न पहलुओं को संगीत के माध्यम से व्यक्त करना और जन-जन तक अपनी सांस्कृतिक विरासत पहुँचाना है।
व्याख्या:
लोक संगीत सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का दर्पण होता है, जो लोगों के दैनिक जीवन, उत्सव, और भावनाओं को संगीत के रूप में प्रस्तुत करता है।
Q5.5. टुमरी के प्रचलित प्रमुख दो रूप कौन-से हैं?
उत्तर:
टुमरी के प्रमुख दो रूप हैं: (1) बोल-बॉट की टुमरी, जो ख्याल गायन शैली के समान होती है, और (2) ठुमरी, जो अधिक भावपूर्ण और लयात्मक होती है।
व्याख्या:
टुमरी की दो प्रमुख शैलियाँ हैं, जिनमें बोल-बॉट की टुमरी में शब्दों की स्पष्टता और ख्याल की शैली होती है, जबकि ठुमरी में भाव और लय का अधिक महत्व होता है।
Q6.6. दक्षिण भारतीय लोक संगीत की प्रमुख तालें कौन-सी हैं?
उत्तर:
दक्षिण भारतीय लोक संगीत की प्रमुख तालें हैं: तिलवंद, अट्टाम, और झपताल। ये तालें लोक संगीत की लयबद्धता को दर्शाती हैं।
व्याख्या:
दक्षिण भारतीय लोक संगीत में तालों का विशेष महत्व है, जो संगीत की लय और गति को नियंत्रित करती हैं।
Q7.7. उपशास्त्रीय संगीत की परिभाषा बताते हुए इसकी पाँच विधाओं के नाम बताइए।
उत्तर:
उपशास्त्रीय संगीत वह संगीत है जो शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के बीच का मध्य मार्ग है। इसकी पाँच प्रमुख विधाएँ हैं: टप्पा, ठुमरी, दादरा, भजन, और कजरी।
व्याख्या:
उपशास्त्रीय संगीत में शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और लोक संगीत की सरलता का मिश्रण होता है, जो विभिन्न लोक-शैलियों को समाहित करता है।
Q8.8. लोक संगीत को परिभाषित करते हुए इसमें प्रयुक्त होने वाले प्रमुख तंत्री, सुषिर एवं अवनद्ध वाद्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
लोक संगीत वह संगीत है जो जन-जन की भावनाओं और परंपराओं को दर्शाता है। इसमें प्रयुक्त प्रमुख तंत्री वाद्य हैं: सारंगी, रबाब; सुषिर वाद्य हैं: बांसुरी, शहनाई; अवनद्ध वाद्य हैं: ढोलक, ढोल।
व्याख्या:
लोक संगीत में विभिन्न प्रकार के वाद्यों का प्रयोग होता है जो संगीत की विविधता और रंगत को बढ़ाते हैं। तंत्री वाद्य तारों से, सुषिर वाद्य हवा से, और अवनद्ध वाद्य प्रहार से ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan के सभी 10 अध्याय
Sangeet · Class 11