Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
मानचित्र का परिचय
व्याख्यामानचित्र का परिचय
मानचित्र का अर्थ है पृथ्वी या उसके किसी भाग का कागज पर द्वि-आयामी (समतल) चित्रण। पृथ्वी का आकार त्रिविम (3D) होता है जिसे ग्लोब के माध्यम से सबसे अच्छी तरह प्रदर्शित किया जा सकता है, परंतु ग्लोब का उपयोग सीमित होता है क्योंकि यह बड़ा और भारी होता है। इसलिए पृथ्वी या उसके किसी भाग को समतल सतह पर दर्शाने के लिए मानचित्र का उपयोग किया जाता है। मानचित्र प्रक्षेपण की सहायता से त्रिविम पृथ्वी की सतह को द्वि-आयामी रूप में प्रस्तुत किया जाता है। चूंकि पृथ्वी की सतह को सही आकार और प्रकार में कागज पर दिखाना संभव नहीं है, इसलिए मानचित्र को मापनी के आधार पर लघु रूप में बनाया जाता है। मानचित्रों में विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक लक्षणों को दर्शाने के लिए प्रतीकों, रंगों और छायाओं का उपयोग किया जाता है, जिससे जानकारी सरल और स्पष्ट हो जाती है। बिना मापनी के केवल रेखाओं और आकृतियों को मानचित्र नहीं कहा जा सकता, उन्हें रेखाचित्र कहा जाता है। इस अध्याय में मानचित्र की आवश्यकता, उनकी अनिवार्यताएँ, प्रकार और उपयोगों का विस्तार से अध्ययन किया गया है।
- पृथ्वी का आकार त्रिविम (3D) है, जिसे ग्लोब पर दिखाया जाता है।
- मानचित्र पृथ्वी की सतह का द्वि-आयामी लघु रूप है।
- मानचित्र बनाने के लिए मापनी और प्रक्षेपण आवश्यक हैं।
- प्रतीकों, रंगों और छाया के माध्यम से मानचित्र में सूचनाएं दर्शाई जाती हैं।
- बिना मापनी के रेखाओं को मानचित्र नहीं कहा जाता, उन्हें रेखाचित्र कहते हैं।
- 📌 मानचित्र: पृथ्वी या उसके भाग का द्वि-आयामी लघु चित्रण।
- 📌 ग्लोब: पृथ्वी का त्रिविम मॉडल।
- 📌 मापनी: मानचित्र पर दूरी और वास्तविक दूरी का अनुपात।
शब्दावली
परिभाषाशब्दावली
मानचित्र अध्ययन में प्रयुक्त मुख्य शब्दों की समझ आवश्यक है। इस अनुभाग में मानचित्र से संबंधित महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाएँ दी गई हैं, जो आगे के अध्यायों में मानचित्रकला की समझ के लिए आधार बनती हैं। जैसे- जीआयड, प्रधान बिंदु, भूसंपत्ति मानचित्र, मानचित्र, मानचित्रकला, मानचित्र क्रम, मानचित्र प्रक्षेप, मापनी, रेखाचित्र, व्यापकीकरण मानचित्र आदि। प्रत्येक शब्द का अर्थ और उपयोग स्पष्ट किया गया है ताकि विद्यार्थी मानचित्रकला के तकनीकी पक्ष को समझ सकें।
- जीआयड: पृथ्वी के वास्तविक आकार के अनुरूप लब्धक्ष गोलाभ।
- प्रधान बिंदु: उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम।
- भूसंपत्ति मानचित्र: वृहत मापनी पर भूमि स्वामित्व दर्शाने वाला मानचित्र।
- मानचित्रकला: मानचित्र बनाने की कला, विज्ञान और तकनीक।
- मापनी: मानचित्र पर दूरी और वास्तविक दूरी का अनुपात।
- रेखाचित्र: बिना मापनी के खींची गई आकृतियाँ।
- 📌 जीआयड: पृथ्वी के आकार का वैज्ञानिक मॉडल।
- 📌 प्रधान बिंदु: दिशाओं के मुख्य संकेतक।
- 📌 मानचित्रकला: मानचित्र निर्माण की विधि।
मानचित्र बनाने की अनिवार्यताएँ
व्याख्यामानचित्र बनाने की अनिवार्यताएँ
मानचित्रकला में मानचित्र बनाने के लिए कुछ अनिवार्य प्रक्रियाएँ होती हैं जो सभी प्रकार के मानचित्रों पर लागू होती हैं। ये प्रक्रियाएँ हैं - मापनी, मानचित्र प्रक्षेप, मानचित्र व्यापकीकरण, मानचित्र अभिकल्पना, तथा मानचित्र निर्माण एवं प्रस्तुति। 1. मापन
अभ्यास प्रश्न — Chapter 1
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.- भारतीय मौसम विभाग की स्थापना-------------- में की गई थी।
उत्तर:
१८७५
Q2.सेंटीग्रेड तापमापी पर पिघलते हुए हिम का तापमान 0 डिग्रीC तथा उबलते हुए पानी का तापमान ---------- डिग्री C होता है।
उत्तर:
१००
Q3.- फ़ारेनहाइट तापमापी पर पानी का हिमांक कितने डिग्री फ़ारेनहाइट होता है ?
उत्तर:
३२
Q4.- किस बल्ब का पाठ्यांक वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा से प्रभावित नहीं होता है ?
उत्तर:
शुष्क
Q5.आर्द्र बल्ब के पाठयांक में भिन्नता क्यों आती हैं?
उत्तर:
वाष्पीकरण की दर वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा पर निर्भर करती है I
Q6.- सामान्य अवस्था में समुद्र तल पर वायु का दाब होता है।
उत्तर:
१.०३ किलो प्रतिवर्ग सेंटीमीटर
Q7.- वायुमंडलीय के दाब को मापने वाले यंत्र को क्या कहते हैं ?
उत्तर:
वायुदाब मापी
Q8.-समान दाब वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाओं को क्या कहा जाता है?
उत्तर:
समदाब रेखाएँ
Bhugol Main Prayogatmak Karya के सभी 6 अध्याय
Geography · Class 11