Ch 6निःशुल्क

Chapter 6

🎓 Vardhman Mahaveer Open University📖 SLM - Co-ordinate Geomatery and Mathematical Programming (Hindi)📖 11 नोट्स⏱️ ~17 मिनट
Chapter 5अध्याय 5 / 8Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 निर्देशांक ज्यामिति का परिचय

व्याख्या

6.1 निर्देशांक ज्यामिति का परिचय

निर्देशांक ज्यामिति गणित की वह शाखा है जिसमें ज्यामितीय आकृतियों का अध्ययन निर्देशांक पद्धति के माध्यम से किया जाता है। इसमें बिंदुओं, रेखाओं, वक्रों आदि का स्थान निर्देशांक के रूप में व्यक्त किया जाता है। निर्देशांक पद्धति के विकास से ज्यामिति और बीजगणित का समन्वय हुआ, जिससे जटिल ज्यामितीय समस्याओं का हल सरल हो गया। सबसे पहले रेने देकार्त ने निर्देशांक ज्यामिति की नींव रखी, इसीलिए इसे डिकार्टियन ज्यामिति भी कहते हैं। निर्देशांक पद्धति में किसी बिंदु की स्थिति को दो संख्याओं (x, y) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिन्हें क्रमशः क्षैतिज (x-अक्ष) और ऊर्ध्वाधर (y-अक्ष) निर्देशांक कहते हैं। निर्देशांक पद्धति का प्रयोग रेखाओं, वृत्तों, परवलयों आदि के समीकरण ज्ञात करने में किया जाता है।

  • निर्देशांक ज्यामिति में बिंदुओं की स्थिति संख्याओं द्वारा व्यक्त की जाती है।
  • इस पद्धति का विकास रेने देकार्त ने किया था।
  • निर्देशांक पद्धति से ज्यामितीय आकृतियों का बीजगणितीय विश्लेषण संभव हुआ।
  • x-अक्ष क्षैतिज और y-अक्ष ऊर्ध्वाधर दिशा को दर्शाते हैं।
  • निर्देशांक (x, y) किसी बिंदु की सटीक स्थिति बताते हैं।
  • 📌 निर्देशांक: किसी बिंदु की स्थिति बताने वाली संख्याएँ।
  • 📌 x-अक्ष: क्षैतिज रेखा।
  • 📌 y-अक्ष: ऊर्ध्वाधर रेखा।

6.2 निर्देशांक पद्धति के प्रकार

अवधारणा

6.2 निर्देशांक पद्धति के प्रकार

निर्देशांक पद्धति मुख्यतः दो प्रकार की होती है—कार्तीय (Cartesian) और ध्रुवीय (Polar)। कार्तीय पद्धति में बिंदु की स्थिति दो लम्बवत अक्षों (x और y) के सापेक्ष व्यक्त की जाती है, जबकि ध्रुवीय पद्धति में किसी बिंदु की स्थिति एक नियत बिंदु (ध्रुव) से दूरी (r) और एक नियत दिशा (θ) के सापेक्ष व्यक्त की जाती है। कार्तीय पद्धति में निर्देशांक (x, y) के रूप में होते हैं, जबकि ध्रुवीय पद्धति में (r, θ) के रूप में। दोनों पद्धतियों के बीच रूपांतरण संभव है।

  • कार्तीय पद्धति में निर्देशांक (x, y) होते हैं।
  • ध्रुवीय पद्धति में निर्देशांक (r, θ) होते हैं।
  • कार्तीय पद्धति में दो लम्बवत अक्षों का प्रयोग होता है।
  • ध्रुवीय पद्धति में एक नियत बिंदु और एक नियत दिशा का प्रयोग होता है।
  • दोनों पद्धतियों के बीच रूपांतरण संभव है।
  • 📌 कार्तीय पद्धति: निर्देशांक (x, y) द्वारा स्थिति व्यक्त करने की विधि।
  • 📌 ध्रुवीय पद्धति: निर्देशांक (r, θ) द्वारा स्थिति व्यक्त करने की विधि।
  • 📌 ध्रुव: नियत बिंदु, जिससे दूरी मापी जाती है।

6.3 दो बिंदुओं के बीच दूरी का सूत्र

सूत्र

6.3 दो बिंदुओं के बीच दूरी का सूत्र

दो बिंदुओं के निर्देशांक ज्ञात होने पर उनके बीच की दूरी ज्ञात करने के लिए दूरी सूत्र का प्रयोग किया जाता है। यदि दो बिंदु A(x₁, y₁) और B(x₂, y₂) हैं, तो उनके बीच की दूरी AB = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²] होती है। यह सूत्र पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित है।