Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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5.1 निर्देशांक ज्यामिति का परिचय
व्याख्या5.1 निर्देशांक ज्यामिति का परिचय
निर्देशांक ज्यामिति (Co-ordinate Geometry) गणित की वह शाखा है जिसमें ज्यामितीय आकृतियों का अध्ययन निर्देशांकों (Coordinates) के माध्यम से किया जाता है। इसमें बिंदुओं, रेखाओं, वक्रों आदि की स्थितियों और उनके आपसी संबंधों को संख्यात्मक रूप में दर्शाया जाता है। निर्देशांक ज्यामिति का विकास रेने डेसकार्टेस (René Descartes) द्वारा 17वीं शताब्दी में किया गया था। इस पद्धति में किसी भी बिंदु की स्थिति को दो रेखाओं (आमतौर पर x-अक्ष और y-अक्ष) के सापेक्ष दर्शाया जाता है। निर्देशांक ज्यामिति के दो मुख्य भाग हैं: द्वि-आयामी (2D) और त्रि-आयामी (3D) निर्देशांक ज्यामिति। इस अध्याय में हम द्वि-आयामी निर्देशांक ज्यामिति का अध्ययन करेंगे, जिसमें बिंदु, रेखा, वृत्त, दीर्घवृत्त आदि के समीकरणों का विश्लेषण किया जाता है। निर्देशांक ज्यामिति का उपयोग गणित, भौतिकी, अभियांत्रिकी, भूगोल, वास्तुकला आदि क्षेत्रों में किया जाता है।
- निर्देशांक ज्यामिति में बिंदुओं की स्थिति को संख्याओं द्वारा दर्शाया जाता है।
- इस पद्धति में दो अक्षों (x और y) का उपयोग होता है।
- रेने डेसकार्टेस ने निर्देशांक ज्यामिति का विकास किया।
- निर्देशांक ज्यामिति से ज्यामितीय आकृतियों का विश्लेषण सरल होता है।
- यह गणित और विज्ञान के कई क्षेत्रों में उपयोगी है।
- 📌 निर्देशांक (Coordinate): किसी बिंदु की स्थिति बताने वाली संख्याएँ।
- 📌 x-अक्ष (x-axis): क्षैतिज रेखा।
- 📌 y-अक्ष (y-axis): ऊर्ध्वाधर रेखा।
5.2 निर्देशांक तंत्र
अवधारणा5.2 निर्देशांक तंत्र
निर्देशांक तंत्र (Co-ordinate System) वह प्रणाली है जिसमें किसी बिंदु की स्थिति को दो संख्याओं (x, y) के रूप में व्यक्त किया जाता है। द्वि-आयामी निर्देशांक तंत्र में दो लम्बवत् रेखाएँ होती हैं - क्षैतिज (x-अक्ष) और ऊर्ध्वाधर (y-अक्ष)। इन दोनों रेखाओं का प्रतिच्छेदन बिंदु 'मूल' (Origin) कहलाता है। x-अक्ष और y-अक्ष के दाएँ और ऊपर की दिशा को सकारात्मक (+) तथा बाएँ और नीचे की दिशा को नकारात्मक (−) माना जाता है। निर्देशांक तंत्र को चार चतुर्थांशों (Quadrants) में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक बिंदु के निर्देशांक (x, y) होते हैं, जहाँ x क्षैतिज दूरी और y ऊर्ध्वाधर दूरी दर्शाता है।
- निर्देशांक तंत्र में दो अक्ष होते हैं: x-अक्ष और y-अक्ष।
- मूल बिंदु (0, 0) दोनों अक्षों का प्रतिच्छेदन बिंदु होता है।
- तंत्र को चार चतुर्थांशों में विभाजित किया जाता है।
- x और y की संकेत (sign) के अनुसार चतुर्थांश निर्धारित होता है।
- प्रत्येक बिंदु के निर्देशांक (x, y) होते हैं।
- 📌 मूल (Origin): निर्देशांक तंत्र का केंद्र बिंदु (0, 0)।
- 📌 चतुर्थांश (Quadrant): निर्देशांक तंत्र का एक भाग, कुल चार होते हैं।
5.3 बिंदु के निर्देशांक
परिभाषा5.3 बिंदु के निर्देशांक
किसी बिंदु के निर्देशांक (Coordinates of a Point) वह युग्म (x, y) होता है, जो उस बिंदु की x-अक्ष से क्षैतिज दूरी और y-अक्ष से ऊर्ध्वाधर दूरी को दर्शाता है। यदि बिंदु P निर्देशांक तंत्र में स्थित है, तो उसके निर्देशांक (x, y) होंगे। x को 'आब्सिसा' (Ab
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