Chapter 10
Chapter 10 — अध्ययन नोट्स
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10.1 रैखिक प्रोग्रामन समस्याएँ: परिचय
व्याख्या10.1 रैखिक प्रोग्रामन समस्याएँ: परिचय
रैखिक प्रोग्रामन समस्याएँ (Linear Programming Problems) गणित की वह शाखा है जिसमें रैखिक समीकरणों या असमताओं के माध्यम से किसी उद्देश्य (Objective) को अधिकतम या न्यूनतम करने का प्रयास किया जाता है। इस अध्याय में हम रैखिक प्रोग्रामन के मूलभूत सिद्धांतों, समस्याओं की संरचना, और उनके समाधान की विधियों का अध्ययन करेंगे। रैखिक प्रोग्रामन का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों जैसे व्यापार, उद्योग, विज्ञान, और इंजीनियरिंग में किया जाता है, जहाँ संसाधनों का सीमित उपयोग करते हुए लाभ को अधिकतम या लागत को न्यूनतम करना होता है। रैखिक प्रोग्रामन समस्याएँ मुख्यतः तीन भागों में विभाजित होती हैं: 1. उद्देश्य फलन (Objective Function): वह गणितीय अभिव्यक्ति जिसे अधिकतम या न्यूनतम करना होता है। 2. बाधाएँ (Constraints): वे रैखिक समीकरण या असमताएँ जो संसाधनों की सीमाओं को दर्शाती हैं। 3. गैर-नकारात्मकता शर्त (Non-negativity Condition): चर (Variables) की मान नकारात्मक नहीं हो सकती। इस अध्याय में हम रैखिक प्रोग्रामन की परिभाषा, उदाहरण, और वास्तविक जीवन में इसके उपयोग को विस्तार से समझेंगे।
- रैखिक प्रोग्रामन समस्याएँ संसाधनों के सीमित उपयोग के लिए गणितीय मॉडल प्रदान करती हैं।
- उद्देश्य फलन को अधिकतम या न्यूनतम किया जाता है।
- बाधाएँ संसाधनों की सीमाएँ दर्शाती हैं।
- गैर-नकारात्मकता शर्त चर के मान को शून्य या उससे अधिक रखती है।
- रैखिक प्रोग्रामन का उपयोग व्यापार, उद्योग, विज्ञान आदि में होता है।
- इस अध्याय में समस्याओं की संरचना और समाधान की विधियाँ सीखेंगे।
- 📌 रैखिक प्रोग्रामन: गणितीय तकनीक जिसमें रैखिक समीकरणों के माध्यम से उद्देश्य को अधिकतम/न्यूनतम किया जाता है।
- 📌 उद्देश्य फलन: वह समीकरण जिसे अधिकतम/न्यूनतम करना होता है।
- 📌 बाधाएँ: संसाधनों की सीमाएँ दर्शाने वाले समीकरण या असमताएँ।
10.2 रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का गणितीय मॉडल
अवधारणा10.2 रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का गणितीय मॉडल
रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का गणितीय मॉडल बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे समस्या को गणितीय रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। गणितीय मॉडल में उद्देश्य फलन, बाधाएँ, और गैर-नकारात्मकता शर्त को शामिल किया जाता है। रैखिक प्रोग्रामन समस्या को निम्न प्रकार से प्रस्तुत किया जाता है: 1. उद्देश्य फलन: Z = c₁x₁ + c₂x₂ + ... + cₙxₙ 2. बाधाएँ: a₁₁x₁ + a₁₂x₂ + ... + a₁ₙxₙ ≤ b₁ a₂₁x₁ + a₂₂x₂ + ... + a₂ₙxₙ ≤ b₂ ... am₁x₁ + am₂x₂ + ... + amₙxₙ ≤ bm 3. गैर-नकारात्मकता: x₁ ≥ 0, x₂ ≥ 0, ..., xₙ ≥ 0 यह मॉडल वास्तविक जीवन की समस्याओं जैसे उत्पादन, परिवहन, संसाधन आवंटन आदि में लागू किया जाता है।
- गणितीय मॉडल में उद्देश्य फलन, बाधाएँ और गैर-नकारात्मकता शर्त होती है।
- उद्देश्य फलन रैखिक समीकरण के रूप में होता है।
- बाधाएँ संसाधनों की सीमाएँ दर्शाती हैं।
- गैर-नकारात्मकता शर्त चर के मान को शून्य या उससे अधिक रखती है।
- मॉडलिंग से समस्या का समाधान आसान होता है।
- वास्तविक जीवन की समस्याओं को गणितीय रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- 📌 गणितीय मॉडल: समस्या को गणितीय समीकरणों के रूप में प्रस्तुत करना।
- 📌 गैर-नकारात्मकता शर्त: चर के मान शून्य या उससे अधिक होना।
10.3 रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का ग्राफिकल समाधान
व्याख्या10.3 रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का ग्राफिकल समाधान
रैखिक प्रोग्रामन समस्याओं का ग्राफिकल समाधान दो चर (variables) के लिए किया जाता है। इसमें बाधाओं को ग्राफ पर दर्शाया जाता है और उनका संयोजन (feasible region) प्राप्त किया जाता है। समाधान की प्रक्रिया: 1. सभी बाधाओं को असमताओं के रूप में लिखें। 2. प्
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