Chapter 1
Chapter 1 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
1.1 परिचय
व्याख्या1.1 परिचय
इस अनुभाग में, हम समन्वित ज्यामिति (Co-ordinate Geometry) के मूल विचारों का परिचय प्राप्त करते हैं। समन्वित ज्यामिति गणित की वह शाखा है जिसमें ज्यामितीय आकृतियों का अध्ययन बिंदुओं के निर्देशांक (Coordinates) के माध्यम से किया जाता है। यह हमें ज्यामितीय आकृतियों को बीजगणितीय समीकरणों द्वारा व्यक्त करने की सुविधा देता है। समन्वित ज्यामिति के विकास का श्रेय रेने देकार्त (René Descartes) को जाता है, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में निर्देशांक पद्धति का विकास किया। निर्देशांक पद्धति में, किसी बिंदु की स्थिति को दो संख्याओं (x, y) द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिन्हें क्रमशः क्षैतिज (x-अक्ष) और लंबवत (y-अक्ष) दिशाओं में मापा जाता है। यह अध्याय विशेष रूप से X–Y तल में व्यापक अवघाती काटीय समीकरणों के मानक रूप में समानयन पर केंद्रित है, जिसमें रेखा, वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त आदि के समीकरणों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा।
- समन्वित ज्यामिति में बिंदुओं की स्थिति निर्देशांक द्वारा व्यक्त की जाती है।
- निर्देशांक पद्धति का विकास रेने देकार्त ने किया।
- X–Y तल में किसी बिंदु की स्थिति (x, y) द्वारा दर्शाई जाती है।
- समन्वित ज्यामिति में ज्यामितीय आकृतियों को बीजगणितीय समीकरणों द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- यह अध्याय रेखा, वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त आदि के समीकरणों के अध्ययन पर केंद्रित है।
- 📌 निर्देशांक: किसी बिंदु की स्थिति को दर्शाने वाली संख्याएँ।
- 📌 समन्वित ज्यामिति: गणित की वह शाखा जिसमें निर्देशांक पद्धति का उपयोग करके ज्यामितीय आकृतियों का अध्ययन किया जाता है।
1.2 निर्देशांक पद्धति
अवधारणा1.2 निर्देशांक पद्धति
निर्देशांक पद्धति में, किसी बिंदु की स्थिति को दो संख्याओं द्वारा दर्शाया जाता है, जिन्हें x (आब्सिसा) और y (ऑर्डिनेट) कहते हैं। x-अक्ष क्षैतिज रेखा होती है और y-अक्ष लंबवत रेखा होती है। दोनों अक्ष एक-दूसरे को लम्बवत काटते हैं और उनके प्रतिच्छेदन बिंदु को मूल बिंदु (Origin) कहते हैं। निर्देशांक तल को चार चतुर्थांशों (Quadrants) में बाँटा जाता है। प्रथम चतुर्थांश में दोनों निर्देशांक धनात्मक होते हैं, द्वितीय में x ऋणात्मक और y धनात्मक, तृतीय में दोनों ऋणात्मक, तथा चतुर्थ में x धनात्मक और y ऋणात्मक होते हैं।
- x-अक्ष और y-अक्ष एक-दूसरे को लम्बवत काटते हैं।
- मूल बिंदु (0, 0) होता है।
- निर्देशांक तल को चार चतुर्थांशों में बाँटा जाता है।
- प्रत्येक बिंदु की स्थिति (x, y) द्वारा व्यक्त की जाती है।
- x को आब्सिसा और y को ऑर्डिनेट कहते हैं।
- 📌 मूल बिंदु: x और y अक्ष का प्रतिच्छेदन बिंदु (0, 0)।
- 📌 चतुर्थांश: निर्देशांक तल के चार भाग।
1.3 बिंदुओं के बीच की दूरी
सूत्र1.3 बिंदुओं के बीच की दूरी
यदि दो बिंदु A(x₁, y₁) और B(x₂, y₂) दिए गए हैं, तो उनके बीच की दूरी ज्ञात करने के लिए दूरी सूत्र (Distance Formula) का उपयोग किया जाता है। यह सूत्र पाइथागोरस प्रमेय पर आधारित है। दूरी सूत्र के अनुसार, दो बिंदुओं के बीच की दूरी = √[(x₂ - x₁)² + (y₂ -
SLM - Co-ordinate Geometry and Mathematical Programming (Hindi) के सभी 8 अध्याय
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