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Regional aspirations and conflicts | Class 12 Political Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

Regional aspirations and conflicts – this guide gives you a concise, exam-ready overview of Regional aspirations and conflicts from Class 12 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

Region and the Nation

1980 के दशक को भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के उभार का दौर माना जा सकता है, जिसमें कई बार ये आकांक्षाएं भारतीय संघ के ढांचे के बाहर भी व्यक्त हुईं। इन आंदोलनों में अक्सर लोगों द्वारा हथियारबंद संघर्ष भी देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप राजनीतिक और चुनावी प्रक्रियाओं में गिरावट आई। अधिकांश संघर्ष लंबी अवधि तक चले और अंततः केंद्र सरकार और क्षेत्रीय समूहों के बीच संवाद और समझौतों के माध्यम से हल निकाला गया। ये समझौते संवैधानिक ढांचे के भीतर विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद प्रक्रिया के बाद हुए। हालांकि, समझौते तक पहुंचने का रास्ता हमेशा संघर्षपूर्ण और हिंसक रहा।

भारतीय संविधान और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक मूलभूत सिद्धांत यह है कि भारतीय राष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों और भाषाई समूहों को अपनी संस्कृति बनाए रखने का अधिकार देगा। भारत ने एक ऐसा सामाजिक जीवन चुना जिसमें एकता के साथ-साथ विविधता भी बनी रहे। भारतीय राष्ट्रवाद ने एकता और विविधता के सिद्धांतों के बीच संतुलन स्थापित किया। यह दृष्टिकोण यूरोपीय देशों से भिन्न था, जहां सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्र के लिए खतरा माना जाता था।

भारत ने विविधता के प्रश्न पर लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया है। लोकतंत्र क्षेत्रीय आकांक्षाओं की राजनीतिक अभिव्यक्ति की अनुमति देता है और इसे राष्ट्र-विरोधी नहीं मानता। इसके अलावा, लोकतांत्रिक राजनीति में क्षेत्रीय पहचान, आकांक्षाओं और समस्याओं के आधार पर पार्टियां और समूह जनता से संवाद करते हैं, जिससे क्षेत्रीय मुद्दे मजबूत होते हैं और नीति निर्माण में उनकी उचित जगह मिलती है।

हालांकि, इस व्यवस्था से तनाव भी उत्पन्न हो सकते हैं। कभी-कभी राष्ट्रीय एकता की चिंता क्षेत्रीय आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को दबा सकती है, तो कभी क्षेत्रीय हित राष्ट्रीय आवश्यकताओं को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए, क्षेत्रीय अधिकारों और सत्ता के मुद्दों पर राजनीतिक संघर्ष सामान्य हैं, खासकर उन राष्ट्रों में जो विविधता का सम्मान करते हुए एकता बनाए रखना चाहते हैं।

📊 Diagram: इस अनुभाग में कोई विशेष चित्र नहीं है, लेकिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों के संघर्षों और समझौतों को दर्शाने वाले नक्शे और संवाद प्रक्रिया के चित्र इस विषय को समझाने में सहायक होते हैं।

🧪 Activity: इस अनुभाग में कोई विशिष्ट गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह अनुभाग भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के इतिहास और उनके कारणों की चर्चा के लिए आधार प्रदान करता है, जो अगले अनुभाग 'Jammu and Kashmir' में विस्तार से समझाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. Match the following. A Nature of regional aspirations (a) Socio-religious identity leading to statehood (b) Linguistic identity and tensions with Centre (c) Regional imbalance leading to demand for Statehood (d) Secessionist demands on account of tribal identity B States i. Nagaland /Mizoram ii. Jharkhand /Chattisgarh iii. Punjab iv. Tamil Nadu

उत्तर: (a) Socio-religious identity leading to statehood — iii. Punjab (b) Linguistic identity and tensions with Centre — iv. Tamil Nadu (c) Regional imbalance leading to demand for Statehood — ii. Jharkhand /Chattisgarh (d) Secessionist demands on account of tribal identity — i. Nagaland /Mizoram

व्याख्या: (a) पंजाब में धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य की मांग हुई। (b) तमिलनाडु में भाषा आधारित पहचान और केंद्र के साथ तनाव रहा। (c) झारखंड और छत्तीसगढ़ में आर्थिक और क्षेत्रीय असंतुलन के कारण राज्य

2. Regional aspirations of the people of North-East get expressed in different ways. These include movements against outsiders, movement for greater autonomy and movement for separate national existence. On the map of the North-East, using different shades for these three, show the States where these expressions are prominently found.

उत्तर: उत्तर-पूर्वी भारत के क्षेत्रीय आकांक्षाएँ मुख्यतः तीन प्रकार की हैं: 1. बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन: असम में बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन प्रमुख है। 2. अधिक स्वायत्तता की मांग: मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड जैसे राज्यों में अधिक स्वायत्तता की मांग है। 3. पृथक राष्ट्रीय अस्तित्व की मांग: नागालैंड और कुछ अन्य जनजातीय क्षेत्रों में पृथक राष्ट्र की मांग भी पाई जाती है।

इस प्रकार, नक्शे पर इन राज्यों को अलग-अलग रंगों से चिन्हित किया जा सकता है।

3. What were the main provisions of the Punjab accord? In what way can they be the basis for further tensions between the Punjab and its neighbouring States?

उत्तर: पंजाब समझौते की मुख्य व्यवस्थाएँ थीं:

  • पंजाब में अधिक स्वायत्तता प्रदान करना।
  • सिंधु जल विवाद का समाधान।
  • आतंकवाद समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता।
  • केंद्र और पंजाब के बीच बेहतर सहयोग।

संभावित तनाव:

  • जल विवाद के कारण पंजाब और हरियाणा के बीच तनाव बना रह सकता है।
  • सीमाओं को लेकर विवाद हो सकता है।
  • समझौते की शर्तों को लागू करने में देरी से असंतोष बढ़ सकता है।
4. Why did the Anandpur Sahib Resolution become controversial?

उत्तर: आनंदपुर साहिब प्रस्ताव विवादास्पद इसलिए बना क्योंकि इसमें पंजाब के सिखों की धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक स्वायत्तता की मांग की गई थी। इसे केंद्र सरकार ने पृथकतावादी और भारत के एकता के लिए खतरा माना। इस कारण यह प्रस्ताव विवाद का विषय बना।

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