पहाड़ी चित्रकला शैली: कक्षा 12 के लिए विस्तृत परिचय
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

पहाड़ी चित्रकला शैली भारतीय कला की एक महत्वपूर्ण शाखा है, जो हिमालयी क्षेत्र में विकसित हुई। कक्षा 12 के NCERT छात्रों के लिए यह शैली धार्मिक और सांस्कृतिक चित्रों के माध्यम से कला की गहराई समझने का अवसर देती है।
पहाड़ी चित्रकला शैली का परिचय
पहाड़ी चित्रकला शैली भारतीय उपमहाद्वीप के हिमालयी क्षेत्र में विकसित हुई एक प्रसिद्ध चित्रकला शैली है। यह शैली मुख्यतः धार्मिक कथाओं, पौराणिक कथाओं और प्राकृतिक दृश्यों को चित्रित करती है। NCERT कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक में इस शैली को विस्तार से समझाया गया है। पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति का चित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक जीवन को दर्शाती है। इस शैली की प्रमुख शाखाएँ हैं: बसोहली, काँगड़ा, गुलेर-काँगड़ा और मुण्डी।
गुलेर शैली: पहाड़ी चित्रकला की आधारशिला
गुलेर शैली अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में बसोहली शैली से विकसित हुई। यह शैली काँगड़ा के राजा गोवर्धन चंद के संरक्षण में परिष्कृत हुई। गुलेर शैली की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- रंगों का प्रयोग कोमल और हल्का होता है।
- श्वेत और धूसर रंगों का साहसिक उपयोग।
- चित्रों में सहजता और सुंदरता का समावेश।
- प्रमुख कलाकार: पंडित सिंऊ, मानक (मनकू), नैनसुख।
नैनसुख ने जसरोटा के राजा बलवंत सिंह के दरबार में कार्य किया और जीवन के विविध पहलुओं को चित्रित किया। मानक ने राजा गोवर्धन चंद के परिवार के छवि चित्र बनाए। गुलेर शैली ने काँगड़ा शैली के विकास की नींव रखी।
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काँगड़ा शैली और उसकी विशेषताएँ
काँगड़ा शैली गुलेर शैली के बाद विकसित हुई और पहाड़ी चित्रकला की सबसे परिष्कृत शैली मानी जाती है। इसकी विशेषताएँ:
- रंगों की नर्मी और सूक्ष्मता।
- प्राकृतिक दृश्यों का यथार्थ चित्रण।
- भावों और भावनाओं की गहराई।
- जयदेव की 'गीत गोविंद' की कविताओं का चित्रण।
काँगड़ा शैली में राधा-कृष्ण की प्रेम लीला को सुंदरता से दर्शाया गया है। यह शैली धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं को जीवंत बनाती है।
पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति का महत्व
पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति का चित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक छटा जैसे पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, फूल, और पक्षी चित्रों में जीवन्तता लाते हैं। इसके कारण:
- चित्रों में यथार्थता और सौंदर्य बढ़ता है।
- आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रकृति का गहरा संबंध दर्शाया जाता है।
- पहाड़ी जीवनशैली और धार्मिक कथाओं में प्रकृति का विशेष स्थान है।
इस प्रकार, प्रकृति का चित्रण पहाड़ी चित्रकला की आत्मा है।
पहाड़ी चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ और उनका तुलनात्मक अध्ययन
पहाड़ी चित्रकला की मुख्य शैलियाँ और उनकी विशेषताएँ निम्न तालिका में दर्शाई गई हैं:
| शैली | स्थान | रंगों का प्रयोग | विषय-वस्तु | प्रमुख कलाकार |
|---|---|---|---|---|
| बसोहली | जम्मू-कश्मीर | गाढ़े और सरल रंग | लोकजीवन, धार्मिक कथाएँ | - |
| गुलेर-काँगड़ा | काँगड़ा के निकट गुलेर | कोमल, हल्के रंग | राजपरिवार, धार्मिक चित्र | पंडित सिंऊ, नैनसुख |
| काँगड़ा | हिमाचल प्रदेश | नर्म, सूक्ष्म रंग | पौराणिक कथाएँ, प्रेम लीला | मानक, नैनसुख |
| मुण्डी | हिमाचल प्रदेश | मिश्रित रंग | धार्मिक और लोक कथाएँ | - |
यह तालिका छात्रों को शैलियों के बीच भेद समझने में मदद करती है।
गुलेर शैली के प्रमुख कलाकार और उनके योगदान
गुलेर शैली के प्रमुख कलाकारों में पंडित सिंऊ, उनके पुत्र मानक (मनकू), और नैनसुख शामिल हैं। इन कलाकारों ने इस शैली को परिष्कृत और लोकप्रिय बनाया।
- पंडित सिंऊ ने गुलेर शैली को बसोहली से अलग कर नई पहचान दी।
- मानक ने राजा गोवर्धन चंद और उनके परिवार के छवि चित्र बनाए।
- नैनसुख ने जसरोटा के राजा बलवंत सिंह के दरबार में काम किया और जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित किया।
इन कलाकारों के प्रयासों से गुलेर शैली ने काँगड़ा शैली के विकास की नींव रखी और पहाड़ी चित्रकला को समृद्ध किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पहाड़ी चित्रकला शैली की प्रमुख शैलियाँ कौन-कौन सी हैं?
पहाड़ी चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ हैं: बसोहली, गुलेर-काँगड़ा, काँगड़ा और मुण्डी।
गुलेर शैली की विशेषताएँ क्या हैं?
गुलेर शैली में हल्के, कोमल रंगों का प्रयोग होता है और चित्र सहज व सुंदर होते हैं।
काँगड़ा शैली में किस प्रकार के विषय चित्रित किए जाते हैं?
काँगड़ा शैली में धार्मिक कथाएँ, पौराणिक प्रेम लीला और प्राकृतिक दृश्य चित्रित होते हैं।
पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति का क्या महत्व है?
प्रकृति चित्रों में जीवन्तता लाती है और आध्यात्मिक व सांस्कृतिक भाव दर्शाती है।
नैनसुख कौन थे और उनका योगदान क्या था?
नैनसुख गुलेर शैली के प्रमुख कलाकार थे जिन्होंने जसरोटा के दरबार में चित्र बनाए।
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