पहाड़ी चित्रकला शैली: बसोहली से कांगड़ा तक की कला यात्रा
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

पहाड़ी चित्रकला शैली भारतीय कला में एक विशिष्ट स्थान रखती है। यह शैली 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विकसित हुई और इसमें बसोहली, कांगड़ा, गूलर जैसी प्रमुख शैलियाँ शामिल हैं। कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह शैली इतिहास, तकनीक और विषयों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
पहाड़ी चित्रकला शैली का परिचय
पहाड़ी चित्रकला शैली भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रमुख कला शैली है, जो हिमालयी क्षेत्र के पहाड़ी राज्यों में विकसित हुई। यह शैली मुख्यतः 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच फली-फूली। इसमें धार्मिक कथाओं, लोकजीवन, और प्राकृतिक दृश्यों का सुंदर चित्रण किया जाता है। कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह शैली न केवल कला की समझ बढ़ाती है, बल्कि इतिहास और संस्कृति की भी जानकारी देती है।
बसोहली शैली: पहाड़ी चित्रकला की शुरुआत
बसोहली शैली पहाड़ी चित्रकला की सबसे प्राचीन शाखा है, जिसका विकास जम्मू-कश्मीर के बसोहली क्षेत्र में हुआ। राजा कृपाल पाल (1678-1695) के संरक्षण में इस शैली ने विशेष पहचान बनाई।
मुख्य विशेषताएँ:
- प्रभावी प्राथमिक रंगों का प्रयोग
- ऊष्ण पीली पृष्ठभूमि
- उच्च क्षितिज रेखा
- प्रकृति का शैलीगत चित्रण
- गहनों में मोतियों के लिए श्वेत रंग का उभार
इस शैली में जेवरात को चित्रित करने के लिए हरे कीट-पंखों के अंश और पन्ना जैसा प्रभाव दिखाया जाता है। भानुदत्त की रासमंजरी और देवीदास के भागवत पुराण चित्र इस शैली के प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
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कांगड़ा और गूलर शैली की विशेषताएँ
बसोहली शैली के बाद कांगड़ा और गूलर शैलियों का विकास हुआ। ये शैलियाँ बसोहली से अधिक परिष्कृत और सूक्ष्म मानी जाती हैं।
कांगड़ा शैली:
- रंगों की नर्मी और सूक्ष्मता
- प्राकृतिक दृश्यों का यथार्थ चित्रण
- जयदेव की 'गीत गोविंद' जैसे साहित्यिक विषयों का चित्रण
गूलर शैली:
- कांगड़ा के निकट गूलर क्षेत्र में विकसित
- सरल रेखाएं और सौम्य रंग
- धार्मिक और लोककथाओं पर आधारित चित्र
नीचे तालिका में बसोहली, कांगड़ा और गूलर शैलियों की तुलना दी गई है:
| विशेषता | बसोहली | कांगड़ा | गूलर |
|---|---|---|---|
| रंग | गाढ़े, प्राथमिक | नरम, सूक्ष्म | सौम्य, सरल |
| रेखाएं | मोटी | पतली, नाजुक | सरल |
| विषय | लोकजीवन, धार्मिक | साहित्यिक, प्राकृतिक | धार्मिक, लोककथा |
| पृष्ठभूमि | ऊष्ण पीली | प्राकृतिक रंग | हल्का रंग |
पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति और जीवन का चित्रण
पहाड़ी चित्रकला शैली में प्रकृति का चित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है। हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता जैसे पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, पक्षी और फूल चित्रों में जीवन्तता लाते हैं।
कारण:
- पहाड़ी जीवन शैली में प्रकृति का गहरा संबंध था।
- धार्मिक कथाओं में प्रकृति का आध्यात्मिक महत्व था।
- कलाकारों ने अपने आस-पास की प्राकृतिक छटा को कला में शामिल किया।
यह चित्रण न केवल दृश्यात्मक सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि चित्रों को भावनात्मक और सांस्कृतिक गहराई भी प्रदान करता है।
पहाड़ी चित्रकला शैली के प्रमुख कलाकार और विषय
पहाड़ी चित्रकला के विकास में कई कलाकारों का योगदान रहा। बसोहली शैली के भानुदत्त और देवीदास प्रमुख कलाकार थे। देवीदास ने भागवत पुराण और रागमाला जैसे धार्मिक विषयों पर चित्र बनाए।
कांगड़ा शैली में नैनसुख ने कला को स्वर्णिम युग दिया।
प्रमुख विषय:
- धार्मिक कथाएँ (रामायण, भागवत पुराण)
- लोकजीवन और सामाजिक दृश्य
- प्राकृतिक सौंदर्य
इन चित्रों में भाव-भंगिमाओं, वस्त्राभूषणों और पशुओं का सूक्ष्म चित्रण होता है, जो दृश्य की गंभीरता और भावनात्मकता को दर्शाता है।
पहाड़ी चित्रकला शैली का महत्व और आधुनिक संदर्भ
पहाड़ी चित्रकला शैली भारतीय कला इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह शैली न केवल कला की तकनीक और विषयवस्तु में समृद्ध है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का भी दस्तावेज है।
आज के समय में, कक्षा 12 के छात्रों के लिए यह शैली NCERT और CBSE की पाठ्यपुस्तकों में शामिल है। यह छात्रों को भारतीय कला की विविधता और इतिहास को समझने में मदद करती है।
इसके अलावा, आधुनिक कलाकार और शोधकर्ता इस शैली को पुनर्जीवित करने और संरक्षण करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि यह कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पहाड़ी चित्रकला शैली की प्रमुख शैलियाँ कौन-कौन सी हैं?
पहाड़ी चित्रकला की प्रमुख शैलियाँ बसोहली, कांगड़ा, गूलर-कांगड़ा और मुण्डी हैं।
बसोहली शैली की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
बसोहली शैली में ऊष्ण पीली पृष्ठभूमि, गाढ़े प्राथमिक रंग, उच्च क्षितिज रेखा और प्रकृति का शैलीगत चित्रण होता है।
पहाड़ी चित्रकला में प्रकृति का चित्रण क्यों महत्वपूर्ण है?
प्रकृति का चित्रण पहाड़ी जीवनशैली और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जो चित्रों में जीवन्तता और आध्यात्मिकता लाता है।
कांगड़ा शैली बसोहली से कैसे भिन्न है?
कांगड़ा शैली रंगों में नर्मी, सूक्ष्मता और प्राकृतिक चित्रण में अधिक यथार्थता रखती है, जबकि बसोहली में रंग गाढ़े और रेखाएं मोटी होती हैं।
पहाड़ी चित्रकला के प्रमुख कलाकार कौन थे?
बसोहली शैली के भानुदत्त और देवीदास तथा कांगड़ा शैली के नैनसुख प्रमुख कलाकार थे।
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