महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन: स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन ने भारत की आज़ादी की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लेख में हम उनके नेतृत्व में हुए प्रमुख आंदोलनों और घटनाओं को कक्षा 12 के हिसाब से समझेंगे।
महात्मा गांधी का प्रारंभिक संघर्ष और असहयोग आंदोलन
महात्मा गांधी ने 1917-18 में चंपारन, अहमदाबाद और खेड़ा में किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया।
- चंपारन सत्याग्रह: किसानों को नील उत्पादकों के अत्याचार से राहत मिली।
- अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन: बेहतर कार्य स्थितियों की मांग की गई।
- खेड़ा सत्याग्रह: फसल खराब होने पर किसानों का लगान माफ़ कराया गया।
1919 में रॉलेट एक्ट के विरोध में सत्याग्रह हुआ, जिसने पूरे देश में विरोध की लहर फैलाई। अमृतसर में जलियाँवाला बाग हत्याकांड ने आंदोलन को नया उत्साह दिया। इसके बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन की शुरुआत की, जिसमें अंग्रेजी शासन के साथ सभी ऐच्छिक संबंधों का त्याग करने की अपील की गई।
असहयोग आंदोलन का विस्तार और सामाजिक भागीदारी
असहयोग आंदोलन में विभिन्न सामाजिक वर्गों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। इसमें छात्र, वकील, किसान, मजदूर और महिलाएं शामिल थीं। आंदोलन का उद्देश्य था अंग्रेज़ी वस्त्रों का बहिष्कार, स्कूलों और सरकारी पदों का त्याग, और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देना।
- छात्रों की भूमिका: स्कूल और कॉलेज बंद कर आंदोलन में शामिल हुए।
- किसानों का समर्थन: लगान न देने और सत्याग्रह के माध्यम से विरोध किया।
- मजदूरों का संघर्ष: बेहतर वेतन और कार्य स्थितियों की मांग।
गांधीजी ने हिंसा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद उन्होंने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया क्योंकि आंदोलन में हिंसा फैल गई थी।
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जलियाँवाला बाग हत्याकांड और राष्ट्रीय आक्रोश
1919 में पंजाब के अमृतसर में जलियाँवाला बाग हत्याकांड हुआ, जिसमें ब्रिटिश सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं। इस घटना ने पूरे देश में भारी आक्रोश पैदा किया।
- प्रमुख तथ्य:
- हजारों लोग एकत्र थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
- जनरल डायर ने बिना चेतावनी के गोलीबारी शुरू कर दी।
इस घटना ने गांधीजी के आंदोलन को और मजबूती दी और असहयोग आंदोलन की नींव रखी।
नमक सत्याग्रह और स्वतंत्रता की नई लहर
26 जनवरी 1930 को महात्मा गांधी ने दांडी मार्च शुरू किया, जो नमक सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है। यह आंदोलन अंग्रेजों के नमक कानून के खिलाफ था।
- मुख्य उद्देश्य: स्वदेशी नमक बनाकर अंग्रेजी नमक पर निर्भरता खत्म करना।
- प्रभाव: देशभर में लोग गांधीजी के नेतृत्व में सत्याग्रह में शामिल हुए।
- परिणाम: स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली और लोगों में आत्मविश्वास बढ़ा।
इस आंदोलन ने भारत को स्वतंत्रता की ओर एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया।
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन और अंतिम संघर्ष
अगस्त 1942 में गांधीजी ने 'अंग्रेजों भारत छोड़ो' आंदोलन की शुरुआत की। यह आंदोलन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग पर केंद्रित था।
- आंदोलन की विशेषताएं:
- देशव्यापी नागरिक अवज्ञा आंदोलन।
- हजारों लोग जेल गए।
- महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी।
यह आंदोलन भारत की आज़ादी की अंतिम लड़ाई साबित हुआ। इसके बाद 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।
असहयोग आंदोलन और अन्य आंदोलनों की तुलना
नीचे दी गई तालिका में असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की तुलना की गई है:
| आंदोलन का नाम | वर्ष | उद्देश्य | मुख्य रणनीति | परिणाम |
|---|---|---|---|---|
| असहयोग आंदोलन | 1920-22 | अंग्रेजी वस्तुओं का बहिष्कार | सत्याग्रह, बहिष्कार | आंदोलन वापस लिया गया |
| नमक सत्याग्रह | 1930 | नमक कानून का विरोध | दांडी मार्च, सत्याग्रह | स्वतंत्रता की नई लहर |
| अंग्रेजों भारत छोड़ो | 1942 | पूर्ण स्वतंत्रता की मांग | नागरिक अवज्ञा | स्वतंत्रता की तैयारी |
इस तुलना से छात्रों को विभिन्न आंदोलनों की विशेषताएं समझने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जलियाँवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था?
जलियाँवाला बाग हत्याकांड 1919 में पंजाब के अमृतसर में हुआ था।
असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया था?
चौरी-चौरा कांड में हुई हिंसा के कारण गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था।
नमक सत्याग्रह का मुख्य उद्देश्य क्या था?
नमक सत्याग्रह का उद्देश्य अंग्रेजी नमक कानून का विरोध करना और स्वदेशी नमक बनाना था।
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन कब शुरू हुआ था?
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त 1942 में शुरू हुआ था।
महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन में किन वर्गों को शामिल किया था?
असहयोग आंदोलन में छात्र, किसान, मजदूर, वकील और महिलाएं शामिल थीं।
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