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गुरुत्वाकर्षण: कक्षा 11 के लिए सरल और स्पष्ट व्याख्या

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

गुरुत्वाकर्षण: कक्षा 11 के लिए सरल और स्पष्ट व्याख्या

गुरुत्वाकर्षण वह प्राकृतिक बल है जो सभी वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है। कक्षा 11 के भौतिकी में गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत और केप्लर के नियमों को समझना आवश्यक है, जो ग्रहों की गति और उनकी कक्षाओं को स्पष्ट करते हैं।

गुरुत्वाकर्षण क्या है?

गुरुत्वाकर्षण एक प्राकृतिक बल है जो सभी वस्तुओं को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है। यह बल पृथ्वी पर वस्तुओं को नीचे गिरने का कारण है। आइजैक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम की व्याख्या की, जिसके अनुसार दो वस्तुओं के बीच आकर्षण बल उनके द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

$$F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}$$

यहाँ,

  • $F$ = गुरुत्वाकर्षण बल
  • $G$ = गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक
  • $m_1$, $m_2$ = वस्तुओं के द्रव्यमान
  • $r$ = वस्तुओं के बीच की दूरी

यह नियम सभी वस्तुओं पर समान रूप से लागू होता है, चाहे वे ग्रह हों या छोटे कण।

केप्लर के तीन नियम और उनका महत्व

जोहान्स केप्लर ने ग्रहों की गति के तीन महत्वपूर्ण नियम प्रतिपादित किए:

1. कक्षाओं का नियम: सभी ग्रह दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। सूर्य इन दीर्घवृत्त की एक नाभि पर स्थित होता है।

2. क्षेत्रफलों का नियम: ग्रह और सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल झलती है। इसका मतलब है कि ग्रह सूर्य के नजदीक अधिक तेजी से और दूर अधिक धीमी गति से चलते हैं।

3. आवर्त कालों का नियम: किसी ग्रह के परिक्रमण काल का वर्ग उसकी कक्षा के अर्ध-दीर्घ अक्ष के घन के अनुपात में होता है। इससे पता चलता है कि दूर के ग्रहों का परिक्रमण काल अधिक होता है।

ये नियम ग्रहों की गति को समझने में मदद करते हैं और गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम का आधार हैं।

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दीर्घवृत्तीय कक्षा और उपसौर-अपसौर बिंदु

ग्रहों की कक्षा दीर्घवृत्ताकार होती है, जिसका अर्थ है कि यह एक बंद वक्र है जिसमें दो नाभियाँ होती हैं। सूर्य इन नाभियों में से एक पर स्थित होता है।

  • उपसौर (Perihelion): वह बिंदु जहाँ ग्रह सूर्य के सबसे निकट होता है।
  • अपसौर (Aphelion): वह बिंदु जहाँ ग्रह सूर्य से सबसे दूर होता है।

ग्रह उपसौर पर अधिक तीव्र गति से चलता है और अपसौर पर धीमी गति से। यह गति के परिवर्तन के कारण ग्रह की ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण बल में संतुलन बना रहता है।

नीचे दी गई तालिका में कुछ ग्रहों के उपसौर और अपसौर दूरी के औसत मान दिए गए हैं:

ग्रहऔसत कक्षा त्रिज्या (10^6 km)परिक्रमण काल (वर्ष)
बुध57.90.24
शुक्र108.20.615
पृथ्वी149.61
मंगल227.91.88
बृहस्पति778.311.9
शनि142729.5

गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक और पृथ्वी का द्रव्यमान

गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक $G$ का मान लगभग $6.67 imes 10^{-11} ext{Nm}^2/ ext{kg}^2$ होता है। इसे प्रयोगशाला में मापना कठिन है, लेकिन पृथ्वी के द्रव्यमान के आधार पर इसे परिभाषित किया जाता है।

पृथ्वी का द्रव्यमान निकालने की विधि:

1. गुरुत्वाकर्षण त्वरण $g = 9.81 ext{ m/s}^2$ और पृथ्वी की त्रिज्या $R_E = 6.37 imes 10^6 ext{ m}$ का उपयोग करें।

$$M_E = \frac{g R_E^2}{G}$$

2. चन्द्रमा की कक्षा और परिक्रमण काल का उपयोग करें। चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है, इसलिए:

$$T^2 = \frac{4 \pi^2 R^3}{G M_E}$$

जहाँ $T$ चन्द्रमा का आवर्तकाल और $R$ कक्षा त्रिज्या है।

इन विधियों से पृथ्वी का द्रव्यमान लगभग $5.97 imes 10^{24} ext{ kg}$ पाया जाता है।

गुरुत्वाकर्षण से संबंधित गणितीय उदाहरण

आइए एक उदाहरण से समझते हैं कि गुरुत्वाकर्षण नियम का उपयोग कैसे किया जाता है:

प्रश्न: मंगल ग्रह के उपग्रह फोबोस का आवर्तकाल 7 घंटे 39 मिनट है और उसकी कक्षीय त्रिज्या $9.4 imes 10^3$ km है। मंगल का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।

हल:

केप्लर के नियम से:

$$T^2 = \frac{4 \pi^2 R^3}{G M}$$

जहाँ,

  • $T$ = आवर्तकाल (सेकंड में)
  • $R$ = कक्षा त्रिज्या (मीटर में)
  • $M$ = मंगल का द्रव्यमान

पहले $T$ को सेकंड में बदलें:

$7$ घंटे $39$ मिनट = $(7 \times 3600) + (39 \times 60) = 27540$ सेकंड

$R = 9.4 \times 10^6$ मीटर

मांगते हैं $M$:

$$M = \frac{4 \pi^2 R^3}{G T^2}$$

$$= \frac{4 \times (3.14)^2 \times (9.4 \times 10^6)^3}{6.67 \times 10^{-11} \times (27540)^2}$$

गणना करने पर,

$$M \approx 6.48 \times 10^{23} \text{ kg}$$

इस प्रकार मंगल का द्रव्यमान ज्ञात किया जा सकता है।

गुरुत्वाकर्षण और केप्लर के नियमों का संबंध

केप्लर के नियम ग्रहों की गति के व्यवहार को बताते हैं, लेकिन उनके पीछे का कारण गुरुत्वाकर्षण का बल है। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम से केप्लर के नियमों को सिद्ध किया।

  • गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा में बांधे रखता है।
  • यह बल ग्रहों की गति की तीव्रता और दिशा को नियंत्रित करता है।
  • केप्लर का क्षेत्रफल नियम कोणीय संवेग संरक्षण का परिणाम है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण होता है।

इस प्रकार, गुरुत्वाकर्षण और केप्लर के नियम एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक $G$ का मान क्या है?

गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक $G$ का मान लगभग $6.67 \times 10^{-11} \text{Nm}^2/\text{kg}^2$ होता है।

केप्लर का क्षेत्रफलों का नियम क्या बताता है?

यह नियम कहता है कि ग्रह और सूर्य को जोड़ने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रफल झलती है।

ग्रहों की कक्षा किस आकार की होती है?

ग्रहों की कक्षा दीर्घवृत्ताकार (elliptical) होती है, जिसमें सूर्य एक नाभि पर स्थित होता है।

पृथ्वी का द्रव्यमान कैसे ज्ञात किया जाता है?

पृथ्वी का द्रव्यमान गुरुत्वाकर्षण त्वरण और पृथ्वी की त्रिज्या के आधार पर या चन्द्रमा के परिक्रमण काल से ज्ञात किया जाता है।

मंगल ग्रह का द्रव्यमान कैसे निकाला जा सकता है?

मंगल के उपग्रहों के आवर्तकाल और कक्षीय त्रिज्या का उपयोग करके गुरुत्वाकर्षण नियम से मंगल का द्रव्यमान निकाला जा सकता है।

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