गुरुत्वाकर्षण: कक्षा 11 के लिए पूर्ण और सरल परिचय
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

गुरुत्वाकर्षण वह प्राकृतिक बल है जो सभी पिंडों को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है। कक्षा 11 के भौतिकी में इस विषय को विस्तार से पढ़ाया जाता है, जिससे आप ब्रह्माण्ड की गतिशीलता को समझ सकते हैं।
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम क्या है?
न्यूटन ने प्रतिपादित किया कि ब्रह्माण्ड के प्रत्येक दो कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इस आकर्षण का बल उनके द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसे गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम कहते हैं।
समीकरण:
$$ F = G \times \frac{m_1 \times m_2}{r^2} $$
यहाँ:
- $F$ = गुरुत्वाकर्षण बल
- $G$ = सार्वत्रिक गुरुत्वीय नियतांक
- $m_1$, $m_2$ = दो पिंडों के द्रव्यमान
- $r$ = दोनों पिंडों के बीच की दूरी
यह बल सदिश होता है और हमेशा आकर्षक होता है। यह नियम सभी पिंडों पर समान रूप से लागू होता है।
गुरुत्वाकर्षण बल के गुण और दिशा
गुरुत्वाकर्षण बल सदिश होता है, अर्थात् इसमें दिशा और परिमाण दोनों होते हैं। यह बल हमेशा दो पिंडों को एक-दूसरे की ओर खींचता है।
- बल का परिमाण $F = G \frac{m_1 m_2}{r^2}$ होता है।
- दिशा सदिश $\hat{r}$ के विपरीत होती है, जो $m_1$ से $m_2$ की ओर जाता है।
- न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, दोनों पिंडों पर लगने वाले बल बराबर और विपरीत होते हैं।
यदि कई पिंड हों, तो प्रत्येक पिंड पर लगने वाला कुल बल सभी व्यक्तिगत बलों का सदिश योग होता है।
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गोलाकार पिंड और गुरुत्वाकर्षण बल
जब पिंड गोलाकार और एकसमान घनत्व वाला होता है, तो उसके बाहर किसी भी बिंदु पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल उस पिंड के समस्त द्रव्यमान को उसके केंद्र में संकेन्द्रित मानकर निकाला जा सकता है।
इसका मतलब:
- बाहरी बिंदु पर बल मानो केंद्र द्रव्यमान से लग रहा हो।
- यह नियम पृथ्वी, चन्द्रमा जैसे ग्रहों और उपग्रहों के गुरुत्वीय बल के लिए उपयोगी है।
इस सिद्धांत से ग्रहों की कक्षीय गति और उपग्रहों की गति को समझना आसान हो जाता है।
गुरुत्वाकर्षण नियतांक (G) और उसका महत्व
गुरुत्वाकर्षण नियतांक $G$ वह स्थिरांक है जो गुरुत्वाकर्षण बल के परिमाण को निर्धारित करता है। इसका मान लगभग $6.67 \times 10^{-11} \, \text{Nm}^2/\text{kg}^2$ है।
- इसे कैवेन्डिश प्रयोग द्वारा मापा गया था।
- $G$ का मान बहुत छोटा होने के कारण गुरुत्वाकर्षण बल अपेक्षाकृत कमजोर होता है।
- $G$ के बिना गुरुत्वाकर्षण बल की गणना संभव नहीं।
यह नियतांक ब्रह्माण्ड के गुरुत्वीय सिद्धांतों की नींव है।
ग्रहों की कक्षीय गति और गुरुत्वाकर्षण
गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने के लिए आवश्यक केन्द्राभिमुख बल प्रदान करता है।
कैप्लर के नियम और न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के अनुसार:
- ग्रहों का आवर्तकाल $T$ और कक्षा की त्रिज्या $R$ के बीच संबंध होता है:
$$ T^2 \propto R^3 $$
- न्यूटन के नियम से:
$$ T^2 = \frac{4\pi^2 R^3}{G M} $$
जहाँ $M$ सूर्य का द्रव्यमान है।
यह समीकरण ग्रहों की गति का वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
गुरुत्वाकर्षण के व्यावहारिक उदाहरण और गणना
आइए एक उदाहरण से समझते हैं:
उदाहरण: पृथ्वी के द्रव्यमान की गणना करें यदि ज्ञात है कि पृथ्वी की त्रिज्या $R_E = 6.37 \times 10^6 \, \text{m}$ और गुरुत्वीय त्वरण $g = 9.81 \, \text{m/s}^2$ है।
हल:
गुरुत्वाकर्षण बल से:
$$ g = \frac{G M_E}{R_E^2} \implies M_E = \frac{g R_E^2}{G} $$
मानों को प्रतिस्थापित करें:
$$ M_E = \frac{9.81 \times (6.37 \times 10^6)^2}{6.67 \times 10^{-11}} = 5.97 \times 10^{24} \, \text{kg} $$
यह पृथ्वी के द्रव्यमान के लगभग बराबर है।
इस प्रकार गुरुत्वाकर्षण नियमों का उपयोग कर हम विभिन्न खगोलीय पिंडों के द्रव्यमान और गति का अध्ययन कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम क्या कहता है?
यह नियम कहता है कि ब्रह्माण्ड के सभी कण एक-दूसरे को उनके द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती और दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती बल से आकर्षित करते हैं।
गुरुत्वाकर्षण बल की दिशा किस ओर होती है?
गुरुत्वाकर्षण बल सदिश होता है और हमेशा दो पिंडों को एक-दूसरे की ओर आकर्षित करता है।
गोलाकार पिंड के लिए गुरुत्वाकर्षण बल कैसे निकाला जाता है?
गोलाकार पिंड के लिए बल उसके समस्त द्रव्यमान को केंद्र में संकेन्द्रित मानकर निकाला जाता है।
गुरुत्वाकर्षण नियतांक G का मान क्या है?
गुरुत्वाकर्षण नियतांक $G$ का मान लगभग $6.67 \times 10^{-11} \, \text{Nm}^2/\text{kg}^2$ होता है।
कैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं?
गुरुत्वाकर्षण बल ग्रहों को सूर्य की ओर आकर्षित करता है, जो उन्हें परिक्रमा करने के लिए आवश्यक केन्द्राभिमुख बल प्रदान करता है।
पृथ्वी का द्रव्यमान गुरुत्वाकर्षण नियम से कैसे ज्ञात किया जाता है?
पृथ्वी का द्रव्यमान $M_E = \frac{g R_E^2}{G}$ से ज्ञात किया जाता है, जहाँ $g$ गुरुत्वीय त्वरण और $R_E$ पृथ्वी की त्रिज्या है।
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