Historyकक्षा 12एक साम्राज्यिक राजधानी: विजयनगरहिंदी

एक साम्राज्यिक राजधानी: विजयनगर का इतिहास और महत्व

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

एक साम्राज्यिक राजधानी: विजयनगर का इतिहास और महत्व

एक साम्राज्यिक राजधानी: विजयनगर दक्षिण भारत का एक समृद्ध और शक्तिशाली केंद्र था। इसकी स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की। यह राजधानी राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना और राजनीतिक ढांचा

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में दो भाइयों, हरिहर और बुक्का ने की। यह साम्राज्य विभिन्न भाषाओं और धार्मिक परंपराओं वाले लोगों का मिश्रण था। राजनीतिक रूप से, राज्य में राजवंश के सदस्य और सैनिक कमांडर, जिन्हें नायक कहा जाता था, सत्ता के दावेदार थे।

संगम वंश के बाद सुलुव और तुलुव वंशों ने शासन किया। विजयनगर की सीमाएँ अस्थिर थीं और उत्तरी सीमाओं पर दक्कन के सुल्तान तथा उड़ीसा के गजपति शासकों के साथ संघर्ष चलता रहा। इस राजनीतिक संघर्ष ने साम्राज्य को मजबूत और सजग बनाए रखा।

राजधानी विजयनगर का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व

विजयनगर राजधानी तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित थी, जो इसे रणनीतिक रूप से मजबूत बनाता था। यहाँ का "महानवमी डिब्बा" एक ऊंचा मंच था, जो धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का केंद्र था।

सांस्कृतिक रूप से, विजयनगर ने चालुक्य, होयसला और चोलों की स्थापत्य परंपराओं को आगे बढ़ाया। मंदिरों का निर्माण और कला के विकास में इस राजधानी की बड़ी भूमिका थी।

तुंगभद्रा के आसपास की पहाड़ियाँ रामायण के बाली-सुग्रीव के वानर राज्य से जुड़ी कथाओं को दर्शाती हैं, जिससे धार्मिक महत्व भी बढ़ता है।

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विजयनगर की सेना और सैन्य रणनीति

विजयनगर की सेना मुख्यतः अश्वसेना पर आधारित थी। घोड़ों का आयात अरब और मध्य एशिया से होता था, जिसे स्थानीय व्यापारी समूह कुदिरई चेट्टौ संभालते थे। सेना में नायक और सैनिक कमांडर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।

सैन्य रणनीति में घुड़सवारों का उपयोग तेज़ और प्रभावी हमलों के लिए किया जाता था। यह सेना दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की सेनाओं से अलग थी क्योंकि यहाँ अश्वसेना का विशेष महत्व था।

विजयनगर का आर्थिक विकास और व्यापार

विजयनगर मसालों, वस्त्रों और रत्नों के व्यापार के लिए प्रसिद्ध था। विदेशी वस्तुओं की मांग यहाँ बहुत अधिक थी। 1498 के बाद पुर्तगाली भी व्यापार और सामरिक केंद्र स्थापित करने लगे।

यहाँ के व्यापारी समुद्री मार्गों से अरब, यूरोप और अन्य एशियाई देशों से वस्तुएं लाते थे। व्यापार से प्राप्त राजस्व राज्य की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता था।

नीचे एक तुलना तालिका है जो विजयनगर के व्यापारिक पहलुओं को अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों से तुलना करती है:

पहलूविजयनगरचालुक्यहोयसला
प्रमुख वस्तुएंमसाले, वस्त्र, रत्नकृषि उत्पादलोहे के औजार
विदेशी व्यापारपुर्तगाली, अरबसीमितसीमित
आर्थिक केंद्रहम्पीपाटणबेलूर

कृष्णदेव राय का शासन और सांस्कृतिक योगदान

कृष्णदेव राय (1509-29) विजयनगर के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक थे। उन्होंने राज्य का विस्तार किया और मंदिरों के निर्माण को बढ़ावा दिया।

उनकी राजधानी में कला, संगीत और साहित्य का विकास हुआ। तुंगभद्रा नदी के किनारे बने बृहदेश्वर मंदिर के गोपुरम इसका उदाहरण हैं।

कृष्णदेव राय की सुंदर मूर्ति तमिलनाडु के चिदंबरम मंदिर में भी स्थापित है, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

तालीकोटा युद्ध और विजयनगर की पतन

1565 में तालीकोटा के युद्ध में विजयनगर की सेना को दक्कन के सुल्तानों के गठबंधन से हार का सामना करना पड़ा। इस युद्ध के बाद राजधानी हम्पी को लूटा गया और साम्राज्य कमजोर पड़ गया।

इसके बाद अराविदु वंश ने पेनुकोण्डा और चन्द्रगिरी से शासन किया, लेकिन विजयनगर की पूर्व शक्ति वापस नहीं आई। यह घटना दक्षिण भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना कब और किसने की थी?

विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी।

विजयनगर की सेना का मुख्य आधार क्या था?

विजयनगर की सेना मुख्यतः अश्वसेना पर आधारित थी, जिसमें घोड़ों का आयात अरब और मध्य एशिया से होता था।

कृष्णदेव राय ने विजयनगर में क्या योगदान दिया?

कृष्णदेव राय ने राज्य का विस्तार किया और मंदिरों के निर्माण तथा सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा दिया।

तालीकोटा युद्ध का विजयनगर पर क्या प्रभाव पड़ा?

1565 के तालीकोटा युद्ध में विजयनगर को हार का सामना करना पड़ा और राजधानी हम्पी लूटी गई, जिससे साम्राज्य कमजोर हुआ।

विजयनगर राजधानी का धार्मिक महत्व क्या था?

विजयनगर राजधानी में महानवमी डिब्बा जैसे धार्मिक स्थल थे और आसपास की पहाड़ियाँ रामायण के प्रसंगों से जुड़ी थीं।

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