शब्दरूप सामान्य परिचय | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन
शब्दरूप सामान्य परिचय – this guide gives you a concise, exam-ready overview of शब्दरूप सामान्य परिचय from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
स्वरान्त (अजन्त) और व्यञ्जनान्त (हलन्त) शब्द
संस्कृत शब्दों को उनके अंत में आने वाले अक्षर के आधार पर दो मुख्य वर्गों में बांटा जाता है: स्वरान्त (अजन्त) और व्यञ्जनान्त (हलन्त)।
स्वरान्त शब्द वे होते हैं जिनके अंत में स्वर आते हैं जैसे अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ओ आदि। इन्हें अकारान्त, आकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, उकारान्त, ऊकारान्त, ऋकारान्त, एकारान्त, ओकारान्त, औकारान्त आदि वर्गों में विभाजित किया जाता है। उदाहरण स्वरूप बालक, गुरु, कवि, नदी, लता, पितृ, गो आदि।
व्यञ्जनान्त शब्द वे होते हैं जिनके अंत में व्यञ्जन आते हैं जैसे क्, च्, ट्, त् आदि। इनमें चकारान्त, जकारान्त, तकारान्त, दकारान्त, धकारान्त, नकारान्त, पकारान्त, भकारान्त, रकारान्त, वकारान्त, शकारान्त, षकारान्त, सकारान्त, हकारान्त आदि रूप होते हैं। उदाहरण स्वरूप जलमुच्, भूभूत्, श्रीमत्, जगत्, राजन्, दिश्, पयस् आदि।
यह वर्गीकरण शब्दों के रूपों को समझने और उनके सही प्रयोग के लिए आवश्यक है।
📊 Diagram: Table on page 1 (8×4)
🔗 Connection: यह वर्गीकरण अकारान्त, आकारान्त, नकारान्त शब्दों के विभक्ति रूपों के अध्ययन की ओर ले जाता है, जहाँ प्रत्येक प्रकार के शब्दों के विभक्ति रूप विस्तार से दिए गए हैं।
Table on page 1 (8×4)
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | सु (सु = :) | औ | जस् (अस्) |
| द्वितीया | अम् | औट् (औ) | शस् (अस्) |
| तृतीया | टा (आ) | भ्याम् | भिस् (भिः) |
| चतुर्थी | डे (ए) | भ्याम् | भ्यस् (भ्यः) |
| पञ्चमी | डिस (अस्) | भ्याम् | भ्यस् (भ्यः) |
| षष्ठी | डस् (अस्) | ओस् (ओः) | आम् |
| सप्तमी | डि (इ) | ओस् (ओः) | सुप् (सु) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1. कोष्ठके प्रदत्तपदानां समुचितविभक्तिप्रयोगेण वाक्यानि पूर्यत— i) ... जलं पवित्रं वर्तते। (गङ्गा, षष्ठी, एकवचन) ii) ... इदं कार्यं कृतम्। (बालिका, तृतीया, बहुवचन) iii) ... प्रातः भानु: उदेति। (गगन, सप्तमी, एकवचन) iv) ... दुग्धं मधुरं भवति। (धेनु, षष्ठी, एकवचन) v) ... नौकया तरति। (नदी, द्वितीया, एकवचन) vi) ... वचांसि सम्माननीयानि। (विद्रस्, षष्ठी, बहुवचन) vii) स: ... उपगम्य किं करोति? (भवत्, पुँल्लिङ, द्वितीया, एकवचन) viii) ... बालकेन पुष्पं त्रोटितम्। (गच्छत्, तृतीया, एकवचन) ix) ... बालकेभ्य: आचार्य: पुस्तकानि आनयत्। (एतत् पुँल्लिङ, चतुर्थी, बहुवचन) x) ... बालिका: उद्धाने क्रीडन्ति। (तत्, स्त्री, प्रथमा, बहुवचन)
प्र. 1 के सभी उपप्रश्नों के उत्तर निम्नानुसार हैं:
(i) गङ्गाया: जलं पवित्रं वर्तते।
- 'गङ्गा' शब्द स्त्रीलिंग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन में 'गङ्गाया:' होगा।
(ii) बालिकाभ्य: इदं कार्यं कृतम्।
- 'बालिका' शब्द स्त्रीलिंग, तृतीया विभक्ति, बहुवचन में 'बालिकाभ्य:' होगा।
(iii) गगने प्रात: भानु: उदेति।
- 'गगन' शब्द नपुंसकलिंग, सप्तमी विभक्ति, एकवचन में 'गगने' होगा।
(iv) धेनो: दुग्धं मधुरं भवति।
- 'धेनु' शब्द स्त्रीलिंग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन में 'धेनो:' होगा।
(v) नदीं नौकया तरति।
- 'नदी' शब्द स्त्रीलिंग
प्र. 2. कोष्ठके प्रदत्तपदेभ्य: समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि पूर्यत— i) ... उत्तमकार्याणि कुर्म:। (व्यम्/यूयम्/ते) ii) ... प्रकाश: ग्रीष्मकाले प्रचण्ड:। (भानुना/भानो:/भानुम्) iii) ... शीतलता ग्रीष्मकाले सर्वेभ्य: रोचते। (चन्द्रमसे/ चन्द्रमसा/चन्द्रमस:) iv) ... बहव: गुणा: सन्ति। (मधु/मधुने/मधुनि) v) ... तपस: फलं लभन्ते। (मुनि:/मुनी/मुनय:) vi) उत्तमबालका: ... सेवन्ते। (मातरम्/मात्रे/मातरि) vii) ... कार्ये क: क्षम: ? (अस्मात्/ अस्य/अस्मिन्) viii) विद्या ... शोभते, नहि धनम्। (राङ्ग:/राजसु/राङ्गाम्) ix) ... बालकान् अत्र आह्या। (सर्वेषाम्/सर्वै:/सर्वान्) x) ... सन्मार्ग प्रदर्शयन्ति। (साधु:/साधू/साधव:)
प्र. 2 के सभी उपप्रश्नों के उत्तर निम्नानुसार हैं:
(i) वयम् उत्तमकार्याणि कुर्मः।
- 'वयम्' सर्वनाम प्रथमा बहुवचन है, अतः उपयुक्त है।
(ii) भानुना प्रकाश: ग्रीष्मकाले प्रचण्ड:।
- 'भानुना' तृतीया विभक्ति एकवचन है, जो कर्ता के रूप में उपयुक्त है।
(iii) चन्द्रमसे शीतलता ग्रीष्मकाले सर्वेभ्य: रोचते।
- 'चन्द्रमसे' सप्तमी विभक्ति एकवचन है, जो समय सूचक है।
(iv) मधुनि बहव: गुणा: सन्ति।
- 'मधुनि' स्थान सूचक सप्तमी विभक्ति एकवचन है।
(v) मुनय: तपस: फलं लभन्ते।
- 'मुनय:' बहुवचन प्रथमा विभक्ति है।
(vi) उ
प्र. 1. कोष्ठके प्रदत्तपदानां समुचितविभक्तिप्रयोगेण वाक्यानि पूर्यत— i) ... जलं पवित्रं वर्तते। (गङ्गा, षष्ठी, एकवचन) ii) ... इदं कार्यं कृतम्। (बालिका, तृतीया, बहुवचन) iii) ... प्रातः भानु: उदेति। (गगन, सप्तमी, एकवचन) iv) ... दुग्धं मधुरं भवति। (धेनु, षष्ठी, एकवचन) v) ... नौकया तरति। (नदी, द्वितीया, एकवचन) vi) ... वचांसि सम्माननीयानि। (विद्रस्, षष्ठी, बहुवचन) vii) स: ... उपगम्य किं करोति? (भवत्, पुँल्लिङ, द्वितीया, एकवचन) viii) ... बालकेन पुष्पं त्रोटितम्। (गच्छत्, तृतीया, एकवचन) ix) ... बालकेभ्य: आचार्य: पुस्तकानि आनयत्। (एतत् पुँल्लिङ, चतुर्थी, बहुवचन) x) ... बालिका: उद्धाने क्रीडन्ति। (तत्, स्त्री, प्रथमा, बहुवचन)
प्र. 1 के सभी उपप्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
(i) गङ्गाया: जलं पवित्रं वर्तते। (गङ्गा - स्त्रीलिंग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन)
(ii) बालिकाभ्य: इदं कार्यं कृतम्। (बालिका - स्त्रीलिंग, तृतीया विभक्ति, बहुवचन)
(iii) गगने प्रात: भानु: उदेति। (गगन - पुल्लिंग, सप्तमी विभक्ति, एकवचन)
(iv) धेनो: दुग्धं मधुरं भवति। (धेनु - स्त्रीलिंग, षष्ठी विभक्ति, एकवचन)
(v) नद्याः नौकया तरति। (नदी - स्त्रीलिंग, द्वितीया विभक्ति, एकवचन)
(vi) विद्रस: वचांसि सम्माननीयानि। (विद्रस् - पुल्लिंग, षष्ठी विभक्ति, बहुवचन)
प्र. 2. कोष्ठके प्रदत्तपदेभ्य: समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि पूर्यत— i) ... उत्तमकार्याणि कुर्म:। (व्यम्/यूयम्/ते) ii) ... प्रकाश: ग्रीष्मकाले प्रचण्ड:। (भानुना/भानो:/भानुम्) iii) ... शीतलता ग्रीष्मकाले सर्वेभ्य: रोचते। (चन्द्रमसे/ चन्द्रमसा/चन्द्रमस:) iv) ... बहव: गुणा: सन्ति। (मधु/मधुने/मधुनि) v) ... तपस: फलं लभन्ते। (मुनि:/मुनी/मुनय:) vi) उत्तमबालका: ... सेवन्ते। (मातरम्/मात्रे/मातरि) vii) ... कार्ये क: क्षम: ? (अस्मात्/ अस्य/अस्मिन्) viii) विद्या ... शोभते, नहि धनम्। (राङ्ग:/राजसु/राङ्गाम्) ix) ... बालकान् अत्र आह्या। (सर्वेषाम्/सर्वै:/सर्वान्) x) ... सन्मार्ग प्रदर्शयन्ति। (साधु:/साधू/साधव:)
प्र. 2 के सभी उपप्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
i) वयम् उत्तमकार्याणि कुर्म:। (व्यम् - प्रथम पुरुष बहुवचन)
ii) भानु: ग्रीष्मकाले प्रचण्ड:। (भानु: - पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता)
iii) शीतलता ग्रीष्मकाले सर्वेभ्य: रोचते। (चन्द्रमसे - सप्तमी विभक्ति, एकवचन)
iv) मधुनि बहव: गुणा: सन्ति। (मधुनि - स्थानवाचक विभक्ति)
v) तपस: फलं लभन्ते। (मुनय: - बहुवचन, कर्ता)
vi) उत्तमबालका: मातरम् सेवन्ते। (मातरम् - द्वितीया विभक्ति)
vii) अस्मिन् कार्ये क: क्षम: ? (अस्मिन् - सप्तमी विभक्ति)
viii) विद्या राङ्ग: शोभ
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