संज्ञा एवं परिभाषा प्रकरण | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन
संज्ञा एवं परिभाषा प्रकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of संज्ञा एवं परिभाषा प्रकरण from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
आगम
आगम संस्कृत व्याकरण की एक महत्वपूर्ण संज्ञा है। जब किसी वर्ण के साथ दूसरा वर्ण मित्रवत् पास आकर बैठकर उससे संयुक्त हो जाता है, तब उसे आगम कहा जाता है। इसे मित्रवदागम: भी कहा जाता है। आगम की प्रक्रिया में मूल शब्दों के बीच एक नया वर्ण स्वतः उत्पन्न होकर उनके मेल को सुगम बनाता है। उदाहरण के लिए, 'वृक्ष' और 'छाया' शब्दों के मेल से 'वृक्षच्छाया' शब्द बनता है, जहाँ वृक्ष के 'अ' और छाया के 'छ' के मध्य 'च' वर्ण का आगम हुआ है। इस प्रकार आगम वर्णों के बीच के सामीप्य को दर्शाता है और शब्दों के उच्चारण को सहज बनाता है। आगम के कारण शब्दों के बीच के व्यंजन अधिक स्पष्ट और सुगठित हो जाते हैं। आगम की प्रक्रिया से शब्दों का उच्चारण सरल और प्रवाही होता है, जिससे भाषा की लाघवता बनी रहती है। आगम की यह प्रक्रिया संस्कृत भाषा की ध्वन्यात्मक सुंदरता और व्याकरणिक नियमों का महत्वपूर्ण अंग है।
📊 Diagram: इस अनुभाग में आगम की प्रक्रिया को समझाने के लिए 'वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया' का उदाहरण दिया गया है, जहाँ 'अ' और 'छ' के बीच 'च' वर्ण का आगम होता है।
🧪 Activity: अभ्यास में आगम वर्णों की पहचान कर उन्हें पृथक् करने का कार्य दिया गया है, जैसे 'वृक्ष + छाया' में आगम वर्ण 'च्' को चिन्हित करना।
🔗 Connection: आगम की समझ के बाद आदेश की प्रक्रिया को समझना आसान होता है, जो वर्णों के स्थानांतरण से संबंधित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. 1. अधोलिखितपदेभ्यः आगमवर्णान्, आदेशवर्णान् वा स्पष्टीकृत्य पृथक् कुरुत-
उत्तर:
प्रश्न में दिए गए पदों में आगमवर्ण (जो शब्दों के संयोग से उत्पन्न होते हैं) तथा आदेशवर्ण (जो किसी वर्ण के स्थान पर अन्य वर्ण का आदेश होता है) को स्पष्ट करके पृथक करना है।
उदाहरण:
1. वृक्ष + छाया = वृक्षच्छाया
- 'च्' आगमवर्ण है।
2. यदि + अपि = यद्यपि
- 'यू' आदेशवर्ण है।
3. इति + आदि = इत्यादि
- 'य्' आगमवर्ण है।
4. तरु + छाया = तरुच्छाया
- 'च्' आगमवर्ण है।
5. अनु + छेदः = अनुच्छेदः
- 'च्' आगमवर्ण है।
6. अनु + इच्छति = अन्विच्छति
- 'व्' आदेशवर्ण है।
इस प्रकार, प्रत
प्र. 2. अधोलिखिततालिकातः पदसंज्ञकपदानि पृथक् कृत्वा लिखत-
उत्तर:
प्रश्न में दी गई तालिका से पदसंज्ञक पदों को पृथक करना है।
तालिका के पद: सः, पठति, हरि, दृश्, हसामि, चल्, मुनी, चलति, ते।
पदसंज्ञक पद:
1. सः 2. पठति 3. हरि 4. हसामि 5. मुनी 6. चलति 7. ते
'दृश्' और 'चल्' धातु रूप हैं, ये पदसंज्ञक नहीं हैं।
इस प्रकार, तालिका से पदसंज्ञक पदों को पृथक किया गया।
प्र. 3. अधोलिखिततालिकायां प्रदत्तपदेषु संयोगस्य उदाहाणानि पृथक् कृत्वा लिखत- यथा-वृक्ष + छाया - वृक्षच्छाया - च् (आगमः) यदि + अपि - यद्यपि - यू (आदेश:) i) इति+ आदि - इत्यादि - ( ... ) ....... ii) तरु+ छाया - तरुच्छाया - ( .. iii) अनु + छेद: - अनुच्छेद: - (.......... ) iv) अनु+ इच्छति - अन्विच्छति - (..... ..... )
उत्तर:
प्रश्न में दिए गए पदों में संयोग के कारण उत्पन्न वर्ण (आगम/आदेश) को पृथक करना है।
i) इति + आदि = इत्यादि
- 'य्' आगमवर्ण है।
ii) तरु + छाया = तरुच्छाया
- 'च्' आगमवर्ण है।
iii) अनु + छेदः = अनुच्छेदः
- 'च्' आगमवर्ण है।
iv) अनु + इच्छति = अन्विच्छति
- 'व्' आदेशवर्ण है।
इस प्रकार, प्रत्येक पद में संयोग के कारण उत्पन्न वर्ण को पृथक किया गया।
संज्ञा की परिभाषा क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
संज्ञा का अर्थ है नाम। यह किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, भाव आदि के नाम को दर्शाती है। उदाहरण: 'गजः' (हाथी), 'रामः' (व्यक्ति)।
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