Sanskritकक्षा 9वर्ण विचारहिंदी

वर्ण विचार | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

वर्ण विचार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वर्ण विचार from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

उच्चारण स्थान

संस्कृत वर्णों का उच्चारण मुख के विभिन्न स्थानों से होता है, जिन्हें उच्चारण स्थान कहा जाता है। उच्चारण स्थान वे मुख के भाग होते हैं जहाँ से ध्वनि निकलती है या जिनसे ध्वनि गुजरती है। मुख्य उच्चारण स्थान हैं: कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ और नासिका।

प्रत्येक स्थान से उच्चारित वर्णों का वर्गीकरण निम्नानुसार है:

  • कण्ठ: स्वर अ, आ; व्यञ्जन क, ख, ग, घ, ड़; अन्तःस्थ य; ऊष्म ह; अयोगवाह विसर्ग।
  • तालु: स्वर इ, ई; व्यञ्जन च, छ, ज, झ, ञ; अन्तःस्थ र; ऊष्म श।
  • मूर्धा: स्वर ऋ, ॠ; व्यञ्जन ट, ठ, ड, ढ, ण; अन्तःस्थ ल; ऊष्म ष।
  • दन्त: स्वर लृ; व्यञ्जन त, थ, द, ध, न; ऊष्म स।
  • ओष्ठ: स्वर उ, ऊ; व्यञ्जन प, फ, ब, भ, म।
  • नासिका: अनुनासिक व्यञ्जन ड, ञ, ण, न, म।

कुछ वर्ण एक साथ दो स्थानों से भी उच्चारित होते हैं, जैसे कण्ठतालु, कण्ठोष्ठ आदि। उच्चारण स्थानों का ज्ञान संस्कृत भाषा के सही उच्चारण के लिए आवश्यक है।

📊 Diagram: Table on page 6 (12×7) showing उच्चारण स्थान, स्वर, व्यञ्जन, अयोगवाह और संज्ञा।

🧪 Activity: प्रश्न 2: विभिन्न वर्णों के उच्चारण स्थान लिखना।

🔗 Connection: उच्चारण प्रयत्न के अध्ययन के लिए आधार।

Table on page 6 (12×7)

स्थानस्वरव्यञ्जनअयोगवाहसंज्ञा
स्पर्शअन्त:स्थऊष्म
कण्ठअ, आक, ख, ग, घ, ड़:कण्ठ्य
तालुइ, ईच, छ, ज, झ, जतालव्य
मूर्धाक्र, क्रुट, ठ, ड, ढ, णमूर्धन्य
दन्तलृत, थ, द, ध, न*दन्त्य
ओष्ठउ, ऊप, फ, ब, भ, म×प, ×फओष्ठ्य
नासिकाअनुनासिकड, ञ, ण, न, मउपध्मानीयनासिक्य
कण्ठतालुस्वर*, "कण्ठतालव्य
कण्ठोष्ठए, ऐ#कण्ठोष्ठ्य
दन्तोष्ठओ, औ×क, ×खदन्तोष्ठ्य
जिह्वामूलजिह्वामूलीय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. 1. अधोलिखितेषु प्रत्याहारेषु परिगणितान् वर्णान् लिखत— i) इक् iii) जश् iv) हश् v) अट् vi) झश्

i) इक् = इ + क् iii) जश् = ज् + श् iv) हश् = ह् + श् v) अट् = अ + ट् vi) झश् = झ् + श्

प्रत्याहार शब्दों को उनके वर्णों में विभाजित किया गया है।

प्र. 2. अधोलिखितानां वर्णानाम् उच्चारणस्थानं लिखत— i) कवर्ग (क्, ख्, ग्, घ्, ड्) ii) टवर्ग (ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्) iii) पवर्ग (प्, फ्, ब्, भ्, म्) iv) इ, च्, य्, श्

i) कवर्ग (क्, ख्, ग्, घ्, ड्) — तालु (मूर्धा) ii) टवर्ग (ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्) — मूर्धा (मूर्धा) iii) पवर्ग (प्, फ्, ब्, भ्, म्) — ओष्ठ (ओष्ठ) iv) इ, च्, य्, श् — तालु (मूर्धा) या तालु-मूर्धा के बीच के स्थान पर उच्चारित होते हैं।

प्रत्येक वर्ण समूह के उच्चारण स्थान को संस्कृत वर्णमाला के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।

प्र. 3. उदाहरणमनुसृत्य वर्णान् पृथक्कृत्य लिखत— यथा— गजः — ग् + अ + ज् + अ + : i) कमलम् ii) भोजनम् iii) गच्छति iv) अनुपतति v) रावणः

i) कमलम् = क् + अ + म् + अ + ल् + अ + म् + अ ii) भोजनम् = भ् + ओ + ज् + अ + न् + अ + म् + अ iii) गच्छति = ग् + अ + च् + छ् + अ + त् + इ iv) अनुपतति = अ + न् + उ + प् + अ + त् + अ + त् + इ v) रावणः = र् + आ + व् + अ + ण् + अ + ः

प्रत्येक शब्द को उसके वर्णों में विभाजित किया गया है, जहाँ प्रत्येक वर्ण को उसके मूल घटकों में तोड़ा गया है।

प्र. 4. उदाहरणमनुसृत्य वर्णानां संयोजनं कुरुत— यथा— अ + ह् + अ + म् = अहम् i) प् + उ + स् + त् + अ + क् + आ + न् + इ ii) प् + अ + ठ् + इ + ष् + य् + आ + म् + इ iii) ग् + ऋ + ह् + अ + म् iv) श् + ओ + भ् + अ + न् + अ + म् v) भ् + अ + व् + इ + त् + अ + व् + य् + अ + म्

i) प् + उ + स् + त् + अ + क् + आ + न् + इ = पुस्तकानि

प् + उ = पु स् + त् + अ = स्त क् + आ = का न् + इ = नि मिलाकर पुस्तकानि

ii) प् + अ + ठ् + इ + ष् + य् + आ + म् + इ = पठिष्यामि

प् + अ + ठ् = पठ इ + ष् + य् = इष्य आ + म् + इ = आमि मिलाकर पठिष्यामि

iii) ग् + ऋ + ह् + अ + म् = गृहम्

ग् + ऋ = ग्रि (यहाँ ऋ स्वर है) ह् + अ + म् = हम् मिलाकर गृहम्

iv) श् + ओ + भ् + अ + न् + अ + म् = शोभनाम्

श् + ओ = शो भ् + अ + न् = भन अ + म् = अम् मिलाकर शोभनाम्

v) भ् + अ + व् + इ + त् + अ + व् + य् + अ + म

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