वाच्यम् | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

वाच्यम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वाच्यम् from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
भावे प्रयोगः / भाववाच्यम्
भाववाच्यम् वह वाच्य है जिसमें भाव प्रधान होता है। भावप्रधान प्रयोग में अकर्मकधातु (जिनके क्रिया में कर्मपद का संबंध नहीं होता) का प्रयोग होता है। अकर्मकधातु के क्रियापद कर्मवाच्य के समान रूप में होते हैं, परन्तु कर्ता का प्रयोग भाव के रूप में होता है।
भाववाच्यम् में क्रियापद सर्वदा प्रथमपुरुष के एकवचन रूप में होता है। इसके निर्माण में धातु के बाद 'यकृ' प्रत्यय जुड़ता है और तत्पश्चात आत्मनेपद प्रत्यय लगाकर क्रियापद बनता है। उदाहरण के लिए:
- हस् + यक् + ते = हस्यते
भाववाच्यम् में क्रियापद के रूप कर्मवाच्य के समान होते हैं, परन्तु वाक्य में कर्ता का अभाव होता है या वह भाव के रूप में होता है। वर्तमानकाल (लट्-लकार) में भाववाच्यम् के उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- ते हसन्ति। (कर्तृवाच्यम्)
- तैः हस्यते। (भाववाच्यम्)
अकर्मकधातुओं के भाववाच्यम् रूपों में क्रियापद एकवचन प्रथमपुरुष में ही होते हैं। भाववाच्यम् में कर्मपद के समान क्त-तव्यत्-अनीयर् प्रत्ययान्त रूप भी प्रयोग होते हैं, जो नपुंसकलिङ्ग के प्रथमाविभक्ते एकवचन में होते हैं।
इस प्रकार भाववाच्यम् में क्रिया भाव के अनुसार व्यक्त होती है, जिसमें कर्ता का स्पष्ट रूप से अभाव होता है या वह भाव के रूप में होता है।
📊 Diagram: वाच्यम् के भाववाच्य भाग का चित्र जिसमें भाव, कर्ता और क्रियापद के संबंध दर्शाए गए हैं।
🧪 Activity: अकर्मकधातुओं के भाववाच्यम् रूपों का अभ्यास और उनके वाक्यों में प्रयोग।
🔗 Connection: यह भूतकाल में कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम् और भाववाच्यम् के प्रयोग की व्याख्या से जुड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संस्कृत भाषा के विकास के कालक्रम में निम्नलिखित में से कौन सा काल सबसे प्राचीन माना जाता है?
वेद काल
संधि का संस्कृत व्याकरण में क्या अर्थ है और इसके कितने प्रकार होते हैं?
संधि का अर्थ 'मिलन' या 'संयोग' होता है। संस्कृत में संधि के तीन प्रकार होते हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि, और विसर्ग संधि।
निम्नलिखित में से कौन सा उदाहरण व्यंजन संधि का सही उदाहरण है?
तत् + कृत = तत्कृत
संधि के नियमों का पालन संस्कृत भाषा में क्यों आवश्यक है? कम से कम दो कारण लिखिए।
संधि के नियमों का पालन भाषा की शुद्धता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। इससे शब्दों का उच्चारण सुगम और लयबद्ध होता है। उदाहरण के लिए, 'राम' + 'इति' = 'रामिति' से उच्चारण सरल होता है।
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