समासः | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

समासः – this guide gives you a concise, exam-ready overview of समासः from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
बहुव्रीहिसमासः
बहुव्रीहिसमासः वह समास है जिसमें अन्यपदार्थ प्रधान होता है। इसका अर्थ होता है कि समास में जो पद प्रधान है, वह समस्त पदों से अलग होता है और समास का अर्थ उस प्रधान पद से संबंधित होता है।
बहुव्रीहिसमास दो प्रकार के होते हैं:
1. समान्यबहुव्रीहि: इसमें षड्विध भेद होते हैं, जैसे:
- द्वितीयार्थबहुव्रीहि: 'प्राप्तोदकः' (प्राप्तम् उदकं यस्य सः) = ग्रामः
- तृतीयार्थबहुव्रीहि: 'पीतक्षीरः' (पीतं क्षीरं येन सः) = शिशुः
- चतुर्थार्थबहुव्रीहि: 'दत्तपशुः' (दत्तः पशुः यस्मै सः) = शिवः
- पञ्चव्यर्थबहुव्रीहि: 'उद्धृतजलः' (उद्धृतं जलं यस्मातु सः) = कूपः
- षष्ट्यर्थबहुव्रीहि: 'पीताम्बरः' (पीतम् अम्बरं यस्य सः) = विष्णुः
- सप्तम्यर्थबहुव्रीहि: 'बहुफलः' (बहूनि फलानि यस्मिन् सः) = वृक्षः
2. विशेषबहुव्रीहि: इसमें नव भेद होते हैं, जैसे:
- व्यधिकरणः बहुव्रीहि: 'चक्रपाणिः' (चक्रं पाणौ यस्य सः)
- सङ्ख्योत्तरपदः बहुव्रीहि: 'उपविंशाः' (विंशतेः समीपे ये सन्ति ते)
- संख्योभयपदः बहुव्रीहि: 'द्वित्राः' (द्वौ वा त्रयो वा)
- सहपूर्वपदः बहुव्रीहि: 'सशिष्यः' (शिष्येण सह वर्तत इति)
- अन्य भेद भी विशेषबहुव्रीहि में आते हैं।
बहुव्रीहिसमास संस्कृत भाषा में विशेष अर्थों के लिए प्रयुक्त होता है और इसकी समझ भाषा के गहन अध्ययन के लिए आवश्यक है।
📊 Diagram: 1. समान्यबहुव्रीहिः (षड् भेदाः)
🧪 Activity: बहुव्रीहिसमास के भेदों के उदाहरणों को पहचानना और लिखना।
🔗 Connection: अगले खंड में अव्ययीभावसमास का परिचय और उसके भेद दिए जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संस्कृत भाषा की महत्ता क्या है और यह भारतीय संस्कृति में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है?
संस्कृत भाषा भारत की प्राचीन और समृद्ध भाषा है। यह वेद, उपनिषद, महाकाव्य, नाटक और शास्त्रों का आधार है। उदाहरण के लिए, रामायण और महाभारत संस्कृत साहित्य के प्रमुख महाकाव्य हैं जो भारतीय संस्कृति और दर्शन को दर्शाते हैं।
संस्कृत वर्णमाला में कुल कितने स्वर और व्यंजन होते हैं?
13 स्वर और 36 व्यंजन
संस्कृत में स्वर और व्यंजन में क्या अंतर होता है?
स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें बिना किसी अवरोध के उच्चारित किया जाता है। व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें उत्पन्न करने के लिए स्वर के साथ किसी अवरोध की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, 'अ' स्वर है और 'क' व्यंजन है।
संस्कृत में संधि की कौन-कौन सी प्रमुख प्रकार हैं?
स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि
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