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समासः | Class 9 Sanskrit Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

समासः | Class 9 Sanskrit Notes

समासः – this guide gives you a concise, exam-ready overview of समासः from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

समासः

समासः संस्कृत व्याकरण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसमें दो या अधिक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। समास का अर्थ है 'सङ्क्षेपण', अर्थात् अर्थयुक्त पदों का संक्षिप्त रूप। उदाहरण के लिए, 'महा' और 'पुरुष' दो स्वतंत्र शब्द हैं, पर जब ये मिलकर 'महा' + 'पुरुष' = 'महापुरुषः' बनाते हैं, तो इसे समास कहते हैं। समास में शब्दों का मेल ऐसा होता है कि वे एक दूसरे के साथ अर्थसंबंध रखते हैं और मिलकर एक नया पद बनाते हैं।

समास सामान्यतः दो या दो से अधिक सुबन्तों (नाम शब्दों) के बीच होता है, जैसे 'सीतायाः पतिः' का समास 'सीतापतिः'। कभी-कभी समास में युगपत् (साथ-साथ) कई शब्द भी मिल सकते हैं, जैसे 'हरिश्च हरश्च गुरुश्च' का समास 'हरिहरगुरुवः'।

समास में पूर्वपद और उत्तरपद होते हैं। पूर्वपद वह शब्द है जो पहले आता है और उत्तरपद वह जो बाद में आता है। जैसे 'सीता' पूर्वपद और 'पति:' उत्तरपद। समास बनने के बाद ये दोनों शब्द मिलकर एक नया पद बनाते हैं, जो प्रातिपदिक (विभक्ति रूपों से पूर्व) होता है। समास के बाद विभक्ति प्रत्यय जोड़े जाते हैं।

समास का विग्रहवाक्य वह वाक्य होता है जो समास के अर्थ को स्पष्ट करता है। जैसे 'राष्ट्रनायक:' का विग्रहवाक्य 'राष्ट्रस्य नायक:' होता है। समास के दो प्रकार होते हैं: स्वपदविग्रह (जहाँ समास के घटक शब्द स्पष्ट रूप से विग्रह में होते हैं) और अस्वपदविग्रह (जहाँ समास के घटक शब्द विग्रह में सीधे नहीं दिखते)।

समास की समझ के लिए यह आवश्यक है कि हम समास के घटक शब्दों के बीच के संबंध को समझें और यह जानें कि किस शब्द का प्रधानत्व है, जो क्रिया से सीधे जुड़ा होता है।

📊 Diagram: Figure on page 1

🧪 Activity: समास के उदाहरणों को विग्रहवाक्य सहित लिखना और समझना।

🔗 Connection: यह समास की मूल अवधारणा को समझाने के बाद, अगला खंड समास के प्रकारों और उनके नियमों की व्याख्या करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत भाषा की महत्ता क्या है और यह भारतीय संस्कृति में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है?

संस्कृत भाषा भारत की प्राचीन और समृद्ध भाषा है। यह वेद, उपनिषद, महाकाव्य, नाटक और शास्त्रों का आधार है। उदाहरण के लिए, रामायण और महाभारत संस्कृत साहित्य के प्रमुख महाकाव्य हैं जो भारतीय संस्कृति और दर्शन को दर्शाते हैं।

संस्कृत वर्णमाला में कुल कितने स्वर और व्यंजन होते हैं?

13 स्वर और 36 व्यंजन

संस्कृत में स्वर और व्यंजन में क्या अंतर होता है?

स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें बिना किसी अवरोध के उच्चारित किया जाता है। व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें उत्पन्न करने के लिए स्वर के साथ किसी अवरोध की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, 'अ' स्वर है और 'क' व्यंजन है।

संस्कृत में संधि की कौन-कौन सी प्रमुख प्रकार हैं?

स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि

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