जटायो: शौर्यम् | Class 9 Sanskrit Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

जटायो: शौर्यम् – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जटायो: शौर्यम् from Class 9 Sanskrit, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
लकार और प्रत्यय
इस खंड में संस्कृत भाषा के लकारों (काल) और प्रत्ययों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। लकार क्रिया के काल और प्रकार को दर्शाते हैं जैसे वर्तमान (लट्), भूत (लिट्), भविष्य (लृट्) आदि। प्रत्यय क्रिया के अर्थ और भाव को बदलने में सहायक होते हैं। विशेष रूप से तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययों का प्रयोग समझाया गया है जो क्रिया के अर्थ में नियम और आवश्यकता दर्शाते हैं। उदाहरण स्वरूप, 'अन्नं न परिहरेत्' का कर्मवाच्य रूप 'अन्नं न परिहर्तव्यम्' या 'अन्नं न परिहरणीयम्' हो सकता है। इस खंड में तीनों लिंगों (पुंलिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) और तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में तव्यत्-अनीयर् प्रत्ययों के प्रयोग को भी समझाया गया है। यह व्याकरणिक ज्ञान संस्कृत भाषा की समझ और प्रयोग में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
📊 Diagram: Table on page 15 (3×3); Table on page 16 (3×3); Table on page 16 (6×3)
🧪 Activity: विद्यार्थियों को तव्यत् और अनीयर् प्रत्ययों के प्रयोग से वाक्य बनवाना।
🔗 Connection: यह खंड संस्कृत के पुरुषानुसार क्रिया रूपों और लकारों के अभ्यास की ओर ले जाता है।
Table on page 15 (3×3)
| विधिलिङ्लकारः/ लोट्लकारः/ लूट्लकारश्च | तव्यत्-प्रत्ययः | अनीयर्-प्रत्ययः |
|---|---|---|
| अन्नं न परिहरेत्/परिहरतु/ परिहरिष्यति | अन्नं न परिहर्तव्यम् | अन्नं न परिहरणीयम् |
| मानव: क्रोधं
Table on page 15 (3×3)
| पुंलिङ्गम् | स्त्रीलिङ्गम् | नपुंसकलिङ्गम् |
|---|---|---|
| मया परोपकार: कर्तव्य: (कृ+तव्यत्) | मया प्राणिषु दया कर्तव्य | मया योगासनं कर्तव्यम् |
| शिष्येण वेद: पठितव्य: (पठ्+तव्यत्) | शिष्येण गीता पठितव्य | शिष्येण संस्कृतं पठितव्यम् |
Table on page 16 (3×3)
| सर्वथा धर्म: रक्षणीय: (रक्ष्+अनीयर्) | मातृभूमि: रक्षणीया | आरोग्यं रक्षणीयम् |
|---|---|---|
| त्वया क्रोध: त्यक्तव्य: (त्यज्+तव्यत्) | ईष्यार्थ त्यक्तव्या | दूषितान्नं त्यक्तव्यम् |
| अस्माभिः प्रतिदिनं योग: करणीय: (कृ+अनीयर्) | प्रतिदिनं मया क्रीडा करणीया | अस्माभिः समयेन भोजनं करणीयम् |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जटायुः रावण को किस कारण से रोकना चाहता था?
सीता की रक्षा हेतु
‘खगाधिपः’ का अर्थ क्या है?
पक्षियों का राजा
‘वृद्धः’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
जटायु
‘कवची’ का पर्यायवाची शब्द क्या है?
कवचधारी
इस अध्याय में महारत हासिल करें
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