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जलवायु | Class 9 Social Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जलवायु | Class 9 Social Science Notes

जलवायु – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जलवायु from Class 9 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में अक्षांश, ऊँचाई, वायु दाब एवं पवन, समुद्र से दूरी, महासागरीय धाराएँ और उच्चावच शामिल हैं। भारत का लगभग आधा भाग कर्क वृत्त के दक्षिण में स्थित है, जो उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र है, जबकि उत्तर का भाग उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में आता है। हिमालय पर्वत की ऊँचाई लगभग 6000 मीटर है, जो ठंडी हवाओं को रोकता है और इस कारण उत्तरी भारत में सर्दी कम पड़ती है। भारत में वायु दाब और पवन तंत्र अद्वितीय हैं; शीत ऋतु में हिमालय के उत्तर में उच्च दाब होता है और ठंडी शुष्क हवाएँ दक्षिण की ओर बहती हैं। ग्रीष्म ऋतु में आंतरिक एशिया और उत्तर-पूर्वी भारत में निम्न दाब बनता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएँ भारत की ओर आती हैं। ये हवाएँ समुद्र से नमी लेकर आती हैं और वर्षा करती हैं। इस प्रकार ये कारक मिलकर भारत की मानसूनी जलवायु बनाते हैं।

🧪 Activity: ज्ञान कीजिए: कोरिआलिस बल क्या है और यह पवनों को कैसे प्रभावित करता है?

🔗 Connection: ऋतुओं की विशेषताओं और भारत में मानसून की प्रकृति की समझ के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जलवायु का अर्थ क्या है और यह मौसम से किस प्रकार भिन्न होता है?

जलवायु किसी क्षेत्र में लंबे समय तक (सामान्यतः 30 वर्षों से अधिक) मौसम की औसत स्थिति होती है। यह तापमान, वर्षा, आर्द्रता, वायु दाब, और पवन प्रणाली जैसे तत्वों का सम्मिलित रूप है। मौसम एक दिन या सप्ताह का अस्थायी परिवर्तन होता है, जबकि जलवायु दीर्घकालिक और स्थिर होती है। उदाहरण के लिए, किसी स्थान पर एक दिन का मौसम बदल सकता है, लेकिन जलवायु वर्षों तक समान रहती है।

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य घटकों में से चार का नाम लिखिए और संक्षेप में समझाइए।

भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य घटक हैं: 1. सूर्य की किरणों की तीव्रता - अक्षांश के अनुसार भिन्न होती है। 2. वायु दाब और पवन प्रणाली - मानसून की दिशा और गति को नियंत्रित करती हैं। 3. समुद्र की निकटता - तटीय क्षेत्रों को नम और समशीतोष्ण बनाती है। 4. पर्वत श्रृंखलाएं - मानसून की गति और वर्षा वितरण को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, हिमालय मानसून की गति को प्रभावित करता है।

मानसून के आगमन और अंत के समय भारत में वर्षा के वितरण का वर्णन कीजिए।

मानसून का आगमन जून के पहले सप्ताह में दक्षिणी भारत के तटीय क्षेत्र से होता है और जुलाई तक पूरे भारत में फैल जाता है। इस दौरान दक्षिण-पश्चिमी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आती हैं, जिससे पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा होती है। मानसून अक्टूबर के अंत तक समाप्त हो जाता है, जब उत्तर-पूर्वी हवाएं सक्रिय हो जाती हैं और ठंडी, शुष्क हवा लेकर आती हैं। इस प्रकार मानसून के आगमन और अंत के समय वर्षा का वितरण क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित होता है।

चित्र 4.1 : मानसून का आगमन में दिखाए गए दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं के मार्ग का वर्णन कीजिए। (चित्र में भारत का मानचित्र है जिसमें दक्षिण-पश्चिमी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारत के तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ती हुई दिखाई गई हैं।)

चित्र 4.1 में दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर दक्षिणी भारत के तटीय क्षेत्रों से प्रवेश करती हैं और धीरे-धीरे पूरे भारत में फैलती हैं। ये हवाएं पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत में भारी वर्षा लाती हैं।

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