चुनावी राजनीति | Class 9 Social Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

चुनावी राजनीति – this guide gives you a concise, exam-ready overview of चुनावी राजनीति from Class 9 Social Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
मतदाता सूची और मतदान केंद्र
मतदाता सूची वह दस्तावेज होता है जिसमें चुनाव क्षेत्र के सभी योग्य मतदाताओं के नाम शामिल होते हैं। यह सूची चुनाव आयोग द्वारा तैयार की जाती है और नियमित रूप से अपडेट की जाती है। मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के लिए व्यक्ति की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और वह उस क्षेत्र का निवासी होना चाहिए। मतदान केंद्र वे स्थान होते हैं जहाँ मतदाता जाकर अपने मत का प्रयोग करते हैं। मतदान केंद्रों को इस प्रकार से चुना जाता है कि सभी मतदाता आसानी से पहुँच सकें। मतदान केंद्रों पर चुनाव अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और उम्मीदवारों के एजेंट मौजूद रहते हैं ताकि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुचारू रूप से चल सके। मतदाता सूची और मतदान केंद्र चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं।
📊 Diagram: Figure 3.7 गुलबर्गा संसदीय क्षेत्र; Figure 3.8 कर्नाटक का गुलबर्गा (कलाबुरगी) जिला; Table 3.1 से Table 3.7 मतदाता सूची और मतदान केंद्रों का विवरण।
🧪 Activity: अपने निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची और मतदान केंद्रों के बारे में जानकारी इकट्ठा करें और कक्षा में प्रस्तुत करें।
🔗 Connection: अब हम जानेंगे कि चुनाव में उम्मीदवार कौन हो सकते हैं और उनकी क्या शर्तें होती हैं।
Table on page 10 (4×3)
| विधान सभा क्षेत्र की संख्या , नाम व आरक्षण स्थिति : | 19 - मोतिहारी - सामान्य | भाग संख्या : 1 |
|---|---|---|
| लोक सभा क्षेत्र की संख्या, नाम व आरक्षण स्थिति : | 3 - पूर्वी चम्पारण-सामान्य | |
| 1. पुनरीक्षण का विवरण : |
| पुनरीक्षण का वर्ष : 2019
Table on page 10 (1×3)
| 2. भाग व मतदान क्षेत्र का विवरण : |
|---|
| भाग में आनेवाले प्रभागों की संख्या व नाम :
Table on page 10 (1×3)
| 3. मतदान केंद्र का विवरण : |
|---|
| मतदान केंद्र की संख्या व नाम : 1. प्राक्रमित माल, विधानस ममता
Table on page 10 (5×3)
| 4. मतदाताओं की संख्या : | ||
|---|---|---|
| आरम्भिक क्रम संख्या | अंतिम क्रम संख्या | मतदाताओं की संख्या |
| 1 | 1303 | पुरुष |
| महिला | ||
| 693 | 610 | 0 |
| 1303 | 1303 | 1303 |
Table on page 10 (4×5)
| प्रभाग 1 सिटकहिवां | प्रखण्ड - मोतिहारी | यात्रा - लक्षीरा | डाकघर - सिटकाही | पिन : 845427 प्रारम्भ पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|
| 1 UZP2473056 | 2 UZP2482263 | 3 UZP2482461 |
| निर्वाचक का नाम : सुनील कुमार
Table on page 10 (1×3)
| 4 UZP2473031 | 5 UZP2482586 | 6 UZP2482743 |
|---|
| निर्वाचक का नाम : सदरुण नेता
Table on page 10 (1×3)
| 7 UZP2492387 | 8 UZP2488278 | 9 UZP2493336 |
|---|
| निर्वाचक का नाम : मंजूर मियां
Table on page 11 (5×2)
| सिद्धांत | चुनाव प्रणाली की विशेषता |
|---|---|
| सार्वभौम वयस्क मताधिकार | हर चुनाव क्षेत्र में लगभग बराबर मतदाता |
| कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व | 18 वर्ष और उससे ऊपर के सभी को मताधिकार |
| खुली राजनैतिक प्रतिद्वंद्विता | सभी को पार्टी बनाने या चुनाव लड़ने की आजादी |
| एक मत, एक मोल | अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण |
Table on page 14 (10×4)
| उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट | वोटों का प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| डॉ. जी. सागर | जनता दल (सेक्यूलर) | 15690 | 1.57 |
| मल्लिकार्जुन खड़गे | इंडियन नेशनल काँग्रेस | 507193 | 50.82 |
| दन्नि महादेव बी. | बहुजन समाज पार्टी | 11428 | 1.14 |
| रेवुनायक बेलमगि | भारतीय जनता पार्टी | 432460 | 43.33 |
| बी.टी. ललिता नायक | आम आदमी पार्टी | 9074 | 0.91 |
| एस. एम. शर्मा | एसयूसीआई | 4943 | 0.50 |
| शंकर जाधव | बीएचपीपी | 2877 | 0.29 |
| रामु | निर्दलीय | 4085 | 0.41 |
| नोटा (नन ऑफ द एबव) | — | 9888 | 0.99 |
Table on page 22 (4×3)
| अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में | अमेरिकी समाज में | |
|---|---|---|
| अश्वेत | 8 | 13 |
| हिस्पैनिक | 5 | 13 |
| श्वेत | 86 | 7 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चुनाव क्या है? चुनाव की प्रक्रिया में जनता किस प्रकार भाग लेती है और यह लोकतंत्र में क्यों आवश्यक है?
चुनाव वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से जनता अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। यह लोकतंत्र का आधार है क्योंकि इसके बिना सरकार जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। चुनावों से सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता है और जनता शासन में भागीदारी करती है। उदाहरण के लिए, भारत में लोकसभा चुनावों के माध्यम से जनता अपने सांसद चुनती है।
नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है कि क्या अधिकांश नेता अपने चुनावी वायदे पूरा करते हैं? इस चित्र का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। चित्र विवरण: एक कार्टून जिसमें एक नेता चुनावी वादा करता दिख रहा है और दूसरा भाग दर्शाता है कि वादे पूरे नहीं होते।
यह चित्र चुनावी वायदों और उनकी पूर्ति के बीच के अंतर को दर्शाता है। अधिकांश नेता चुनावों में वादे करते हैं, लेकिन वे सभी वादे चुनाव के बाद पूरा नहीं करते। इससे मतदाताओं में निराशा होती है और चुनावी राजनीति की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं।
लोकतंत्र में चुनाव का महत्व क्या है? चुनावों के बिना लोकतंत्र कैसे प्रभावित होता है?
लोकतंत्र में चुनाव का महत्व इसलिए है क्योंकि यह जनता को शासन में भागीदारी का अधिकार देता है। चुनावों के बिना सरकार जनता की इच्छा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। चुनाव सरकार को जवाबदेह बनाते हैं और सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित करते हैं। उदाहरण के लिए, चुनावों के बिना तानाशाही शासन बन सकता है।
नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है कि लोकतंत्र के लिए चुनाव क्यों जरूरी हैं, लेकिन गैर-लोकतांत्रिक देशों के शासकों को भी चुनाव कराने की जरूरत क्यों पड़ती है? चित्र विवरण: एक चित्र जिसमें लोकतंत्र और गैर-लोकतांत्रिक देशों के चुनावों के कारणों की तुलना की गई है।
यह चित्र दर्शाता है कि लोकतंत्र में चुनाव जनता को शासन में भागीदारी का अधिकार देते हैं, जबकि गैर-लोकतांत्रिक देशों में चुनावों का आयोजन सत्ता की वैधता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने के लिए होता है। इसलिए गैर-लोकतांत्रिक देशों में चुनाव होते हैं लेकिन वे पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं होते।
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