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एक टोोकरीी भर मि�ट्टीी | Class 8 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

एक टोोकरीी भर मि�ट्टीी | Class 8 Hindi Notes

एक टोोकरीी भर मि�ट्टीी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of एक टोोकरीी भर मि�ट्टीी from Class 8 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

एक टोकरी भर मिट्टी

यह पाठ 'एक टोकरी भर मिट्टी' कक्षा 8 हिंदी की NCERT पुस्तक का छठा अध्याय है। इस कहानी में लेखक माधवराव सप्रे ने एक गरीब, अनाथ वृद्धा और एक जमींदार के बीच की घटना को बड़ी संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। कहानी की शुरुआत एक जमींदार के महल के पास एक वृद्धा की झोंपड़ी से होती है, जिसे जमींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए हटाना चाहता है। वृद्धा ने कई बार मना किया क्योंकि वह अपनी झोंपड़ी से गहरा लगाव रखती थी। उसकी झोंपड़ी में उसके पति, पुत्र और पतोहू की यादें जुड़ी थीं। वृद्धा की पोती, जो पाँच वर्ष की थी, झोंपड़ी के हटने के बाद खाना-पीना छोड़ देती है। वृद्धा जमींदार से अनुमति लेकर झोंपड़ी की मिट्टी की एक टोकरी लेकर जाती है ताकि उसी मिट्टी से चूल्हा बनाकर पोती को रोटी खिलाए। जब जमींदार स्वयं टोकरी उठाने की कोशिश करता है तो वह असफल रहता है, जिससे उसे अपनी गलती का एहसास होता है। अंत में जमींदार पश्चाताप करता है और वृद्धा को उसकी झोंपड़ी वापस दे देता है। यह कहानी सामाजिक अन्याय, मानवीय संवेदनाओं और न्याय की महत्ता को दर्शाती है।

📊 Diagram: किसी श्रीमान् जमींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी। जमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज

🧪 Activity: कहानी के पात्रों और घटनाओं पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देना और चर्चा करना।

🔗 Connection: यह परिचय कहानी के भाव और पात्रों को समझने के बाद, अगले खंड में कहानी के पात्रों और उनके भावों की गहराई से चर्चा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अब इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे— ‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।’ अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15–20 शब्द हो सकते हैं। 1. एक झोंपड़ी थी। 2. श्रीमान् टहल रहे थे। 3. वह खाने लगेगी। 4. वृद्धा भीतर गई। 5. आगे बढ़े।

1. एक झोंपड़ी थी जो गाँव के किनारे एक पुराने पेड़ के नीचे बनी हुई थी, जहाँ वृद्धा रहती थी। 2. श्रीमान् अपने बगीचे में टहल रहे थे, सोच में डूबे हुए और कुछ सोच रहे थे। 3. वह खाने लगेगी क्योंकि उसे भूख लग रही थी और खाना उसके लिए आराम का समय था। 4. वृद्धा भीतर गई, धीरे-धीरे झोंपड़ी के अंदर कदम रखते हुए, थकान से चूर। 5. आगे बढ़े, सभी लोग मिलकर उस समस्या का समाधान खोजने के लिए आगे बढ़े।

(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। जमींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए। (ख) कल्पना कीजिए कि जमींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए। ## उदाहरण— - मित्र — इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है? 😊 - जमींदार — 😊 मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।

(क) फोन पर बातचीत उदाहरण— जमींदार: "पोतिया, जिद मत करो, खाना खा लो, तुम्हारे लिए अच्छा होगा।" पोतिया: "मैं नहीं खाऊंगी, यह मेरा घर है।" जमींदार: "समझो, सब ठीक हो जाएगा, जिद छोड़ दो।" पोतिया: "मैं अपने घर को नहीं छोड़ूंगी।"

(ख) मोबाइल संदेशों की कल्पना— मित्र: "झोंपड़ी मत हड़पना, इससे विवाद बढ़ेगा। 🙏" जमींदार: "पर मुझे वह चाहिए, मैं सोच रहा हूँ। 🤔" मित्र: "धैर्य रखो, सही रास्ता अपनाओ। 🙂" जमींदार: "ठीक है, मैं सोचता हूँ। 🤝"

(क) कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए। (ख) मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए— मेरी दैनंदिनी 2 मई — आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया...

(क) जिलाधिकारी को पत्र उदाहरण— आदरणीय जिलाधिकारी महोदय,

सविनय निवेदन है कि मेरा परिवार वर्षों से इस झोंपड़ी में रहता है। यह हमारा घर है और हमें इसे खोना नहीं चाहिए। कृपया हमारी मदद करें ताकि हमें न्याय मिले और हमारा घर सुरक्षित रहे।

धन्यवाद। आपकी आज्ञाकारी, [आपका नाम]

(ख) दैनंदिनी का उदाहरण— 2 मई — आज दादी घर आईं, वह बहुत दुखी थीं। उन्होंने बताया कि जमींदार हमारे घर को छीनना चाहता है। मैं बहुत चिंतित हूँ। मैं अपने घर को बचाने के लिए कुछ करना चाहती हूँ।

(क) कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए। (ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए। (ग) कहानी में जमींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला? (घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?

(क) मेरे घर से मेरा गहरा लगाव है क्योंकि यहाँ मेरी बचपन की यादें जुड़ी हैं।

(ख) हाँ, मुझे अपने स्कूल के पुराने दोस्तों से इतना लगाव था कि स्कूल छोड़ना मुश्किल लगा।

(ग) मैंने देखा है कि एक मित्र ने गलती की और बाद में बहुत पछताया। उसने माफी मांगी और सुधार किया, जिससे संबंध बेहतर हुए।

(घ) हाँ, मैंने गुस्से में कुछ कहा था, बाद में माफी मांगी और शांत रहने की कोशिश की। इससे मैंने धैर्य रखना सीखा।

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