वन-भ्रमण | Class 6 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 6 मिनट का पठन

वन-भ्रमण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वन-भ्रमण from Class 6 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शब्दों के अर्थ
इस खंड में कविता में प्रयुक्त कुछ शब्दों के अर्थ और संदर्भ दिए गए हैं। जैसे 'जसोदा' का अर्थ है यशोदा माता, 'पहर' समय मापने की इकाई है, 'लकुटि कमरिया' एक गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल है जो खाने-पीने की वस्तुओं को कुत्ते-बिल्ली से बचाने के लिए छत से लटकाया जाता है। 'बंसीवट' वट वृक्ष है, जिसके नीचे श्रीकृष्ण गायों को पुकारते थे। 'मधुबन' यमुना के किनारे का वन क्षेत्र है। 'छीको' गाय पालने वालों के बच्चे हैं। 'ग्वाल-बाल' भी गाय चराने वाले बच्चे हैं। इस प्रकार शब्दों के अर्थ जानने से कविता की समझ और भी स्पष्ट होती है।
📊 Diagram: Table 9.1 शब्द और उनके अर्थ या संदर्भ
🧪 Activity: छात्रों को कविता में आए शब्दों के अर्थ खोजने और उन्हें अपने शब्दों में समझाने के लिए प्रोत्साहित करें।
🔗 Connection: यह खंड पंक्तियों पर चर्चा से जुड़ता है जहाँ कविता की पंक्तियों का भावार्थ समझाया जाता है।
Table on page 4 (9×2)
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | 1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)। |
| 2. पहर | 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।) |
| 3. लकुटि कमरिया | 3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे— दूध, दही आदि) को कुत्ते, बिल्ली आदि न पा सकें। |
| 4. बंसीवट | 4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 5. मधुबन | 5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 6. छीको | 6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी। |
| 7. माता | 7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 8. ग्वाल-बाल | 8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं। (क) “भोर भयो गैयन के पाछे” इस पंक्ति में ‘पाछे’ शब्द आया है। इसके लिए ‘पीछे’ शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए। - परे - छोटो - बिधि - भोरी - कछु - लै - नहिं (ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए— | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | | --- | --- | | 1. उपज | 1. मुसकाई, हँसी | | 2. जानि | 2. उपजना, उत्पन्न होना | | 3. जायो | 3. जानकर, समझकर | | 4. जिय | 4. विश्वास किया, सच माना | | 5. पठायो | 5. बाँह, हाथ, भुजा | | 6. पतियायो | 6. प्रकार, भाँति, रीति | | 7. बहियन | 7. मन, जी | | 8. बिधि | 8. जन्मा | | 9. बिहँसि | 9. मला, लगाया, पोता | | 10. भटक्यो | 10. इधर-उधर घूमा या भटका | | 11. लपटायो | 11. भेज दिया |
(क) शब्दों के बोलचाल के रूप:
- परे → परे
- छोटो → छोटा
- बिधि → विधि
- भोरी → भोली
- कछु → कुछ
- लै → ले
- नहिं → नहीं
(ख) मिलान: 1. उपज → 2. उपजना, उत्पन्न होना 2. जानि → 3. जानकर, समझकर 3. जायो → 4. विश्वास किया, सच माना 4. जिय → 8. जन्मा 5. पठायो → 11. भेज दिया 6. पतियायो → 6. प्रकार, भाँति, रीति 7. बहियन → 5. बाँह, हाथ, भुजा 8. बिधि → 7. मन, जी 9. बिहँसि → 1. मुसकाई, हँसी 10. भटक्यो → 10. इधर-उधर घूमा या भटका 11. लपटायो → 9. मला, लगाया, पोता
वर्ण-परिवर्तन “तू माता मन की अति भोरी” ‘भोरी’ का अर्थ है ‘भोली’। यहाँ ‘ल’ और ‘र’ वर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भी ‘ल’ या ‘ड़’ और ‘र’ में वर्ण-परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
इस पद में वर्ण-परिवर्तन के उदाहरण हैं:
- भोरी (भोली)
- अन्य पदों में भी ‘ल’ और ‘र’ के बीच परिवर्तन होता है जैसे ‘माखन’ और ‘माखर’ (कल्पना स्वरूप), ‘पाछे’ और ‘पीछे’ आदि।
छात्रों को अपने लेखन पुस्तिका में ऐसे शब्दों को लिखना चाहिए जो बोलचाल में ‘ल’ और ‘र’ के स्थान पर एक-दूसरे के रूप में उपयोग होते हैं।
पंक्ति से पंक्ति नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए गए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए— | स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | | --- | --- | | 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | 1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? | | 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | 2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया। | | 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | 3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो। | | 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | 4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। | | 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। | | 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | 6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
सही मिलान इस प्रकार है: 1 → 4 2 → 5 3 → 1 4 → 6 5 → 3 6 → 2
व्याख्या:
- पंक्ति 1 का भाव है कि सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
- पंक्ति 2 का भाव है कि चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
- पंक्ति 3 का भाव है कि मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
- पंक्ति 4 का भाव है कि ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
- पंक्ति 5 का भाव है कि माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
- पं
“मैया मैं नहिं माखन खायो” यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।
यह प्रश्न विद्यार्थियों से उनके व्यक्तिगत अनुभव साझा करने के लिए है। वे अपने जीवन की ऐसी घटना लिख सकते हैं जब उन्हें किसी गलत आरोप से बचाव करना पड़ा हो। उन्होंने अपने तर्क, प्रमाण या समझाइश के माध्यम से अपनी बात सिद्ध की होगी।
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