भारत की विदेश नीति | Class 12 Political Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

भारत की विदेश नीति – this guide gives you a concise, exam-ready overview of भारत की विदेश नीति from Class 12 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
भारत के विदेश संबंध
भारत 1947 में आजाद हुआ तब विश्व एक जटिल और चुनौतीपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में था। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही से पूरी दुनिया उबर रही थी और एक नई विश्व व्यवस्था के निर्माण के प्रयास चल रहे थे। उपनिवेशवाद के अंत के कारण विश्व के नक्शे पर नए-नए देश उभर रहे थे, जिनके सामने लोकतंत्र स्थापित करने और अपनी जनता की भलाई करने की बड़ी चुनौती थी। भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद अपनी विदेश नीति में इन वैश्विक और स्थानीय दोनों प्रकार की चुनौतियों को ध्यान में रखा।
भारत के विदेश संबंधों का प्रारंभिक संदर्भ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक राजनीतिक स्थिति से जुड़ा था। उस समय विश्व दो बड़े सैन्य-राजनीतिक खेमों में बंट रहा था: एक अमेरिका नेतृत्व वाला पश्चिमी खेमा और दूसरा सोवियत संघ नेतृत्व वाला पूर्वी खेमा। भारत ने इस दोध्रुवीय विश्व व्यवस्था में किसी भी खेमे का हिस्सा बनने से बचते हुए गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई। यह नीति भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की वैश्विक सोच और उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष की विरासत से प्रेरित थी।
भारत की विदेश नीति पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के कारकों का प्रभाव पड़ा। विकासशील देशों के रूप में भारत को आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र में शक्तिशाली देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे उसकी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखने की जरूरत थी। भारत ने शांति और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान किया और अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रयासरत रहा।
भारत की विदेश नीति के प्रारंभिक वर्षों में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना, परमाणु हथियारों का विकास, चीन में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना, और उपनिवेशवाद का अंत जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाक्रम हुए। इन घटनाओं ने भारत के विदेश संबंधों को आकार दिया। भारत ने नव-स्वतंत्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाया और अफ्रीका एवं एशिया के देशों के साथ एकता का प्रयास किया।
📊 Diagram: यह तस्वीर अक्तूबर 1960 में न्यूयार्क में गुटनिरपेक्ष देशों की एक संगोष्ठी की है। इसमें जवाहरलाल नेहरू घाना के एनक्रूमा, मिस्र के नासिर, इंडोनेशिया के मुकर्णों और युगोस्लाविया के टीटो के साथ नजर आ रहे; EZTZZONIA
🧪 Activity: विद्यार्थियों से चर्चा कराएं कि भारत के स्वतंत्रता के समय विश्व की राजनीतिक स्थिति कैसी थी और भारत ने किन कारणों से गुटनिरपेक्षता अपनाई।
🔗 Connection: यह अनुभाग भारत की संवैधानिक विदेश नीति के सिद्धांतों की चर्चा के लिए आधार तैयार करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अवधारणा- बांग्लादेश युद्ध 1971 शिमला समझौता निम्नलिखित में से किन देशों के बीच हुआ था?
भारत-पाकिस्तान
अवधारणा -भारत की परमाणु नीति भारत ने किस वर्ष में सर्वप्रथम परमाणु परीक्षण किया?
मई 1974
अवधारणा -बांग्लादेश युद्ध 1971 शिमला समझौता निम्नलिखित में से किन देशों के बीच हुआ था?
भारत-पाकिस्तान
अवधारणा -एफ्रो एशियाई एकता निम्नलिखित कथनों पर विचार करें 1 इंडोनेशिया के प्रसिद्ध शहर बांडुंग में हुए सम्मेलन में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव पड़ी थी। 2 गुट निरपेक्ष आंदोलन का पहला सम्मेलन 1961 के सितंबर मैं बेलग्रेड में संपन्न हुआ था। 3 गुटनिरपेक्ष आंदोलन स्थापना में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उपरोक्त कथनों में से कौन सा /से कथन सत्य नहीं है?
उपरोक्त में से कोई नहीं
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