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चुनावी राजनीति का दौर | Class 12 Political Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

चुनावी राजनीति का दौर | Class 12 Political Science Notes

चुनावी राजनीति का दौर – this guide gives you a concise, exam-ready overview of चुनावी राजनीति का दौर from Class 12 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

एक दल के प्रभुत्व का दौर

स्वतंत्र भारत का जन्म अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच हुआ। राष्ट्र-निर्माण की चुनौती के बाद लोकतंत्र स्थापित करना भी एक बड़ी चुनौती थी। कई अन्य देशों के नेताओं ने राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देते हुए लोकतंत्र अपनाने में देरी की, क्योंकि वे मानते थे कि लोकतंत्र मतभेद और संघर्ष को बढ़ावा देगा। कई उपनिवेश से आजाद हुए देशों में इसी कारण अलोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था कायम हुई। भारत के नेताओं ने इसके विपरीत लोकतंत्र को अपनाने का कठिन रास्ता चुना। उन्होंने राजनीति को समस्या नहीं, बल्कि समस्या के समाधान का उपाय माना। संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और इसके तहत लोकतांत्रिक शासन स्थापित करने के लिए चुनाव आयोग का गठन किया गया। भारत के आकार, जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक विविधता को देखते हुए पहला आम चुनाव कराना एक विशाल और चुनौतीपूर्ण कार्य था। मतदाता सूची बनाना, मतदान के लिए उपयुक्त व्यवस्था करना, और चुनाव कर्मियों को प्रशिक्षित करना बड़ी चुनौतियाँ थीं। इस चुनाव में लगभग 17 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से केवल 15% साक्षर थे। इस कारण मतदान की प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाना आवश्यक था। इस कठिन परिस्थिति में भी भारत ने 1951-52 में पहला आम चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराया, जो विश्व के लोकतंत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

📊 Diagram: See figure_1: साभार: शॉकर; See figure_2: 121320480; See figure_3: हमारे लोकतंत्र में ही ऐसी कौन-सी खूबी है? आखिर देर-सबेर हर देश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपना ही लिया है। है न?; See figure_4: यह एक सही फ़ैसला था। लेकिन ऐसे लोगों का क्या किया जाए जो अभी भी औरतों को किसी की पत्नी के रूप में देखने के आदी हैं। इस तरह के व्यवहार से लगता है, मानो एक स्त्री का कोई नाम ही न हो।; See figure_5: 1951 में कांग्रेस द्वारा पार्टी उम्मीदवार चुनने के लिए बनाई गई चुनाव समिति पर कार्टूनिस्ट का एक नज़रिया। समिति में नेहरू के अलावा मोरारजी देसाई, रफ़ी अहमद किदवई, डॉ. बी.सी. रॉय, कामराज नाडार, राजगोपाल

🧪 Activity: अपने परिवार और पड़ोस के बुजुर्गों से पूछिए कि क्या उन्होंने पहले या दूसरे आम चुनाव में भाग लिया था। उनसे जानिए कि उन्होंने किसे वोट दिया और क्यों।

🔗 Connection: यहाँ से हम मतदान की प्रक्रिया और उसके बदलते तरीकों की चर्चा करेंगे, जिससे चुनावी राजनीति की समझ और गहरी होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वतंत्र भारत में लोकतंत्र स्थापित करने की सबसे बड़ी चुनौती क्या थी?

एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव-प्रणाली स्थापित करना

भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे?

सुकुमार सेन

1952 के पहले आम चुनाव में कुल कितने मतदाता थे?

17 करोड़

भारत में मतदाता सूची तैयार करते समय महिलाओं के नाम दर्ज करने में किस प्रकार की समस्या सामने आई?

महिलाओं के नाम उनके पति या पिता के नाम से दर्ज किए गए

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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