Economicsकक्षा 12सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्थाहिंदी

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था | Class 12 Economics Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था | Class 12 Economics Notes

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था from Class 12 Economics, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

बॉक्स 5.1 राजकोषीय नीति

राजकोषीय नीति वह नीति है जिसके माध्यम से सरकार अपने व्यय और कराधान के द्वारा अर्थव्यवस्था के निर्गत और रोजगार के स्तर को स्थिर करती है। कीन्ज की 'द जेनरल थ्योरी ऑफ इम्प्लॉयमेंट इंटरेस्ट एंड मनी' में यह प्रतिपादित किया गया कि सरकार को व्यय और करों में परिवर्तन कर आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना चाहिए।

राजकोषीय नीति के तीन मुख्य उद्देश्य हैं: आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना, रोजगार सृजन करना, और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना। सरकार दो मुख्य तरीकों से समष्टि आय पर प्रभाव डालती है: सरकारी खरीद (G) और कर (T)।

सरकारी व्यय में वृद्धि से समस्त माँग बढ़ती है, जिससे उत्पादन और आय में वृद्धि होती है। इसका गुणक प्रभाव होता है, जो आय में वृद्धि को कई गुना बढ़ा देता है। दूसरी ओर, करों में वृद्धि से प्रयोज्य आय घटती है, जिससे उपभोग और समस्त माँग कम होती है। कर गुणक ऋणात्मक होता है और इसका प्रभाव सरकारी व्यय के गुणक से कम होता है।

संतुलित बजट गुणक सिद्धांत के अनुसार, यदि सरकार व्यय और करों दोनों में समान वृद्धि करती है, तो आय में वृद्धि व्यय की वृद्धि के बराबर होती है। आनुपातिक करों के साथ उपभोग की प्रवृत्ति कम हो जाती है, जिससे गुणक प्रभाव कम होता है। इस प्रकार, राजकोषीय नीति के माध्यम से सरकार आर्थिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर सकती है।

📊 Diagram: राजकोषीय नीति अपने तीन मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने की कैसे कोशिश करती है?; उच्चतर सरकारी व्यय का प्रभाव; रेखाचित्र 5.2; सरकार और समस्त माँग (आनुपातिक कर समस्त माँग (AD) अनुसूची को अपेक्षाकृत सपाट बनाता है।); सरकारी व्यय में वृद्धि (आनुपातिक करों से); रेखाचित्र 5.5

🧪 Activity: इस खंड में उदाहरण 5.1, 5.2 और 5.3 के माध्यम से गुणक सिद्धांत की व्याख्या की गई है।

🔗 Connection: यह खंड राजकोषीय नीति के सिद्धांतों को समझाता है, जो अगले खंड में सरकारी ऋण, घाटे और उनके प्रभावों की चर्चा से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वह शर्त जिसके तहत आय का वर्तुल प्रवाह दो क्षेत्रकों की अर्थव्यवस्था में अनिश्चित काल तक जारी रहेगा-

जब बचत = निवेश

निवल ऋणदाता का चयन करता है -

परिवार

1. सार्वजनिक वस्तु सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए, क्यों? व्याख्या कीजिए।

सार्वजनिक वस्तुएँ वे होती हैं जिनका उपभोग सभी लोग कर सकते हैं और जिनका उपभोग एक व्यक्ति द्वारा करने से दूसरे का उपभोग कम नहीं होता। निजी क्षेत्र द्वारा इन वस्तुओं का उत्पादन लाभकारी नहीं होता क्योंकि वे वस्तुएँ लाभकारी व्यवसाय के रूप में संचालित नहीं हो पातीं। इसलिए सरकार को ही सार्वजनिक वस्तुओं का उत्पादन और वितरण करना चाहिए ताकि समाज के सभी वर्गों को समान लाभ मिल सके। उदाहरण के लिए, सड़कें, प्रकाश व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि।

2. राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में भेद कीजिए।

राजस्व व्यय वे व्यय होते हैं जो सरकार की दिनचर्या की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और जिनसे कोई स्थायी संपत्ति प्राप्त नहीं होती, जैसे वेतन, भत्ते, सब्सिडी आदि। पूँजीगत व्यय वे व्यय होते हैं जो स्थायी संपत्ति के निर्माण या अधिग्रहण में किए जाते हैं, जैसे सड़क निर्माण, भवन निर्माण, मशीनरी खरीद आदि। राजस्व व्यय सरकार के खर्चों का वह भाग है जो वर्तमान वर्ष में ही समाप्त हो जाता है, जबकि पूँजीगत व्यय भविष्य में भी लाभ प्रदान करता है।

इस अध्याय में महारत हासिल करें

पूरा सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था अध्याय — इंटरैक्टिव नोट्स, चित्र, हल किए गए प्रश्न, पोल्स और मुफ़्त अभ्यास क्विज़ — ConceptScroll ऐप में।

ConceptScroll में खोलें →

ConceptScroll के साथ स्मार्ट पढ़ें

रोज़ाना एनसीईआरटी रील्स, एआई डाउट सॉल्विंग और अध्याय क्विज़ — सब मुफ़्त।

मुफ़्त सीखना शुरू करें
#cbse notes#class 12#economics#ncert

और पढ़ें