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सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था | Class 12 Economics Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था | Class 12 Economics Notes

सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था from Class 12 Economics, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

पूँजीगत लेखा

सरकारी बजट में व्यय को दो भागों में बाँटा जाता है: राजस्व व्यय और पूंजीगत व्यय।

1. राजस्व व्यय: यह वह व्यय है जो सरकार के सामान्य कार्यों, सेवाओं, ऋण ब्याज अदायगी, अनुदान आदि पर होता है। यह व्यय सरकार की भौतिक या वित्तीय संपत्तियों के सृजन से संबंधित नहीं होता। राजस्व व्यय को योजनागत और गैर-योजनागत व्यय में बाँटा जाता है। गैर-योजनागत व्यय में ब्याज अदायगी, रक्षा व्यय, वेतन, पेंशन आदि शामिल हैं।

2. पूंजीगत व्यय: यह व्यय सरकार की संपत्तियों के निर्माण या वित्तीय दायित्वों में कमी के लिए किया जाता है, जैसे भूमि अधिग्रहण, भवन निर्माण, मशीनरी खरीद, निवेश आदि। पूंजीगत व्यय भी योजनागत और गैर-योजनागत व्यय में वर्गीकृत होता है।

बजट केवल प्राप्तियों और व्ययों का विवरण नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक नीतियों का प्रतिबिंब भी है। वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003 के तहत बजट के साथ मध्यावधि वित्तीय नीति विवरण, राजकोषीय नीति संबंधी विवरण और समष्टि अर्थशास्त्रीय रूपरेखा विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है। तालिका 5.1 में वर्ष 2024-25 के लिए केंद्र सरकार की प्राप्तियाँ और व्यय का विस्तृत विवरण दिया गया है।

📊 Diagram: Table on page 6 (2×2); Table on page 6 (1×2); Table on page 6 (2×2); Table on page 6 (1×2)

🧪 Activity: इस खंड में कोई विशेष गतिविधि नहीं दी गई है।

🔗 Connection: यह खंड व्ययों के प्रकारों को समझाता है, जो अगले खंड में संतुलित, अधिशेष एवं घाटा बजट की चर्चा से जुड़ता है।

Table on page 6 (2×2)

(सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में)

| 1. राजस्व प्राप्तियाँ (a + b)

Table on page 6 (1×2)

3. राजस्व घाटा (2 – 1)2.6

| 4. पूँजीगत प्राप्तियाँ (a+b+c) जिसका

Table on page 6 (2×2)

5. पूँजीगत व्यय3.2
6. गैर-ऋण प्राप्तियाँ [1 + 4(a) + 4(b)]9.4

| 7. कुल व्यय [2 + 5 = 7(a) + 7(b)]

Table on page 6 (1×2)

8. राजकोषीय घाटा [7 – 1 – 4(a) – 4(b)]5.6
9. प्राथमिक घाटा [8 – 2 = (a)]2.0

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वह शर्त जिसके तहत आय का वर्तुल प्रवाह दो क्षेत्रकों की अर्थव्यवस्था में अनिश्चित काल तक जारी रहेगा-

जब बचत = निवेश

निवल ऋणदाता का चयन करता है -

परिवार

1. सार्वजनिक वस्तु सरकार के द्वारा ही प्रदान की जानी चाहिए, क्यों? व्याख्या कीजिए।

सार्वजनिक वस्तुएँ वे होती हैं जिनका उपभोग सभी लोग कर सकते हैं और जिनका उपभोग एक व्यक्ति द्वारा करने से दूसरे का उपभोग कम नहीं होता। निजी क्षेत्र द्वारा इन वस्तुओं का उत्पादन लाभकारी नहीं होता क्योंकि वे वस्तुएँ लाभकारी व्यवसाय के रूप में संचालित नहीं हो पातीं। इसलिए सरकार को ही सार्वजनिक वस्तुओं का उत्पादन और वितरण करना चाहिए ताकि समाज के सभी वर्गों को समान लाभ मिल सके। उदाहरण के लिए, सड़कें, प्रकाश व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा आदि।

2. राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में भेद कीजिए।

राजस्व व्यय वे व्यय होते हैं जो सरकार की दिनचर्या की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और जिनसे कोई स्थायी संपत्ति प्राप्त नहीं होती, जैसे वेतन, भत्ते, सब्सिडी आदि। पूँजीगत व्यय वे व्यय होते हैं जो स्थायी संपत्ति के निर्माण या अधिग्रहण में किए जाते हैं, जैसे सड़क निर्माण, भवन निर्माण, मशीनरी खरीद आदि। राजस्व व्यय सरकार के खर्चों का वह भाग है जो वर्तमान वर्ष में ही समाप्त हो जाता है, जबकि पूँजीगत व्यय भविष्य में भी लाभ प्रदान करता है।

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