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आत्म एवं व्यक्तित्व | Class 12 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

आत्म एवं व्यक्तित्व | Class 12 Psychology Notes

आत्म एवं व्यक्तित्व – this guide gives you a concise, exam-ready overview of आत्म एवं व्यक्तित्व from Class 12 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

मनोगतिक उपागम

मनोगतिक उपागम व्यक्तित्व को मन के आंतरिक प्रकारों और द्वंद्वों के रूप में समझता है। सिगमंड फ्रायड ने इस उपागम की नींव रखी, जिसमें उन्होंने चेतना के तीन स्तरों - चेतन, पूर्वचेतन और अचेतन - का वर्णन किया। फ्रायड के अनुसार, अचेतन मन में दबे हुए विचार, इच्छाएँ और आवेग होते हैं जो व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। व्यक्तित्व की संरचना में इड (मूलप्रवृत्तिक ऊर्जा), अहं (वास्तविकता-सिद्धांत पर आधारित तर्कसंगत भाग) और पराहम् (नैतिक शाखा) शामिल हैं। अहं रक्षा युक्तियों के माध्यम से दुष्टिचता से बचाव करता है। फ्रायड ने व्यक्तित्व विकास के पाँच मनोलैंगिक अवस्थाओं का वर्णन किया, जिनमें मौखिक, गुदीय, लैंगिक, कामप्रसुप्ति और जननांगीय अवस्थाएँ शामिल हैं। पश्च-फ्रायडवादी सिद्धांतकारों ने फ्रायड के सिद्धांतों का विस्तार करते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों पर बल दिया।

📊 Diagram: चित्र 2.2 फ्रायड के सिद्धांत में व्यक्तित्व की संरचना

🔗 Connection: यह अनुभाग व्यवहारवादी उपागम की ओर ले जाता है, जहाँ व्यक्तित्व को पर्यावरण के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रियाओं के रूप में समझा जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आत्म और व्यक्तित्व की अवधारणा में क्या संबंध होता है?

आत्म व्यक्तित्व का मूल रूप होता है

आत्म की धारणा कब विकसित होती है और किन कारकों से प्रभावित होती है?

आत्म की धारणा बाल्यावस्था में विकसित होती है। यह धारणा सामाजिक अंतःक्रिया, अनुभवों और महत्वपूर्ण लोगों जैसे माता-पिता, मित्रों एवं शिक्षकों के प्रभाव से प्रभावित होती है। उदाहरण के लिए बच्चे की आत्म की समझ उसके परिवार और सामाजिक वातावरण से बनती है।

निम्नलिखित में से कौन सा वाक्य 'व्यक्तिगत अनन्यता' को दर्शाता है?

मैं एक मेहनती विद्यार्थी हूँ

आत्मगत और वस्तुगत आत्म में क्या भेद है? एक उदाहरण सहित समझाइए।

आत्मगत आत्म वह है जो कुछ करता है, जैसे मैं एक नर्तक हूँ। वस्तुगत आत्म वह है जिस पर कुछ किया जाता है, जैसे मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसे आसानी से आहत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, जब कोई कहता है 'मैं जानता हूँ कि मैं कौन हूँ', तो वह आत्मगत और वस्तुगत दोनों रूपों का वर्णन करता है।

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