पुष्पी पादपों की आकारिकी | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

पुष्पी पादपों की आकारिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पुष्पी पादपों की आकारिकी from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
5.1 मूल
पुष्पी पादपों में मूल (Root) पौधे का वह भाग होता है जो मिट्टी में स्थित रहता है और पौधे को स्थिरता प्रदान करता है। अधिकांश द्विबीजपत्री पौधों में, बीज अंकुरित होने पर मूलांकुर (Primary root) विकसित होता है जो मिट्टी में लंबा होता है और प्राथमिक मूल बनाता है। इस प्राथमिक मूल से पाश्विक शाखाएँ निकलती हैं जिन्हें द्वितीयक और तृतीयक मूल कहा जाता है। ये शाखाएँ मिलकर मूसला मूल तंत्र (Tap root system) बनाती हैं, जैसे सरसों का पौधा।
एकबीजपत्री पौधों में प्राथमिक मूल अल्पायु होता है और उसकी जगह तने के आधार से अनेक मूल निकलते हैं जिन्हें झकड़ा मूल तंत्र (Fibrous root system) कहते हैं, जैसे गेहूँ। कुछ पौधों में मूल मूलांकुर की बजाय पौधे के अन्य भागों से निकलती हैं, जिन्हें अपस्थानिक मूल (Adventitious roots) कहा जाता है, जैसे घास और बरगद।
मूल तंत्र का मुख्य कार्य मिट्टी से जल और खनिज लवणों का अवशोषण करना, पौधे को मिट्टी में स्थिर करना, खाद्य पदार्थों का संचय करना तथा पादप हार्मोन का संश्लेषण करना होता है।
मूल के शीर्ष भाग को मूल गोप (Root cap) कहते हैं जो अंगुली के आकार का होता है और कोमल शीर्ष मेरिस्टेम की रक्षा करता है। इसके ऊपर दीर्घकरण क्षेत्र (Elongation zone) होता है जहाँ कोशिकाएँ लंबाई में बढ़ती हैं। इसके बाद परिपक्व क्षेत्र (Maturation zone) आता है जहाँ कोशिकाएँ परिपक्व होती हैं और मूलरोम (Root hairs) विकसित होते हैं जो जल और खनिजों के अवशोषण में सहायक होते हैं।
📊 Diagram: चित्र 5.1 पुष्पी पादप के भाग; चित्र 5.2 विभिन्न प्रकार की जड़ें (अ) मूसला मूल (ब) तंतुक मूल (स) अपस्थानिक मूल; चित्र 5.3 मूल शीर्ष के क्षेत्र
🧪 Activity: मूल के विभिन्न प्रकारों को पौधों में पहचानने के लिए विभिन्न पौधों की जड़ें उखाड़कर उनका अवलोकन करें।
🔗 Connection: यह मूल की संरचना और कार्यों की समझ तने की संरचना और कार्यों के अध्ययन के लिए आधार प्रदान करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीज का टेस्टा किससे विकसित होता है
(घ) बाहरी पूर्णांक
....... के फूलों में रेडियल समरूपता पाई जाती है
घ) ब्रासिका
———— एक फूल के गैर जरूरी हिस्से हैं
क) पुंकेसर और स्त्रीकेसर
1. एक पिच्छाकार संयुक्त पत्ती हस्ताकार संयुक्त पत्ती से किस प्रकार भिन्न है?
पिच्छाकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही रेखा के दोनों ओर क्रमबद्ध होती हैं, जैसे मटर की पत्ती। इसे पिच्छाकार (पिनेट) संयुक्त पत्ती कहते हैं।
हस्ताकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही बिंदु से निकलती हैं, जैसे गुलमोहर की पत्ती। इसे हस्ताकार (पामेट) संयुक्त पत्ती कहते हैं।
अतः भिन्नता यह है कि पिच्छाकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक मध्य रेखा पर क्रमबद्ध होती हैं जबकि हस्ताकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही बिंदु से निकलती हैं।
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