पुष्पी पादपों की आकारिकी | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

पुष्पी पादपों की आकारिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पुष्पी पादपों की आकारिकी from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
5.5.1 पुष्प के भाग
पुष्प के चार मुख्य चक्र होते हैं: केलिक्स, कोरोला, पुमंग और जायांग।
1. केलिक्स (Calyx): यह पुष्प का सबसे बाहरी चक्र होता है। इसके अंगों को बाह्य दल (sepals) कहते हैं जो प्रायः हरे रंग के होते हैं और फूल की कली की रक्षा करते हैं। केलिक्स संयुक्त (connate) या पृथक (free) हो सकते हैं।
2. कोरोला (Corolla): यह दलों (petals) का चक्र होता है जो रंगीन और आकर्षक होते हैं। ये परागण के लिए कीटों को आकर्षित करते हैं। कोरोला भी संयुक्त या पृथक हो सकता है। इसकी आकृति नलिकाकार, घंटाकार, कीप के आकार की या चक्राकार हो सकती है।
पुष्पदल विन्यास (Phyllotaxy of petals) पुष्पकली में दलों के सापेक्ष स्थान को कहते हैं। इसके चार प्रकार होते हैं:
- कोरस्पर्शी (Valvate): दल एक-दूसरे के किनारों को स्पर्श करते हैं, जैसे केलोट्रोपिस।
- व्यावर्तित (Twisted): एक दल का किनारा अगले दल के ऊपर अतिव्याप्त होता है, जैसे गुड़हल।
- कोरछादी (Imbricate): दल एक-दूसरे पर अतिव्याप्त होते हैं पर कोई निश्चित दिशा नहीं होती, जैसे केसिया।
- वैक्जीलरी (Vexillary): पाँच दलों में से एक बड़ा (मानक), दो पाश्वर्षी (पंख) और दो अग्र दल (कूटक) होते हैं, जैसे मटर।
3. पुमंग (Stamens): ये नर जनन अंग होते हैं। प्रत्येक पुंकेसर में एक तंतु (filament) और एक परागकोष (anther) होता है। परागकोष में परागकण बनते हैं। पुंकेसर मुक्त या जुड़े हो सकते हैं। पुंकेसरों के बंडल भी हो सकते हैं जैसे गुड़हल (एकसंधी) या मटर (द्विसंधी)।
4. जायांग (Carpel): यह मादा जनन अंग होता है जो एक या अधिक अंडपों से बना होता है। अंडप के तीन भाग होते हैं: अंडाशय (ovary), वर्तिका (style), वर्तिकाग्र (stigma)। अंडाशय में बीजांड (ovules) होते हैं। अंडप मुक्त (एपोकार्पस) या जुड़े (सिनकार्पस) हो सकते हैं।
बीजांडन्यास (Placentation) अंडाशय में बीजांड के स्थान को कहते हैं। इसके प्रकार हैं: सीमांत, स्तंभीय, भित्तीय, आधारी, केंद्रीय, मुक्त स्तंभीय।
📊 Diagram: चित्र 5.11 पुष्पदल विन्यास के विभिन्न प्रकार (अ) कोरस्पर्शी (ब) व्यावर्तित (स) कोरछादी (द) वैक्जीलेरी; चित्र 5.12 बीजांडन्यास के प्रकार (अ) सीमांत (ब) स्तंभीय (स) भित्तीय (द) मुक्तस्तंभीय (य) आधारी
🧪 Activity: विभिन्न पुष्पों में पुष्पदल विन्यास और बीजांडन्यास का अध्ययन करें।
🔗 Connection: पुष्पीय अंगों के बाद फल और बीज की संरचना का अध्ययन किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीज का टेस्टा किससे विकसित होता है
(घ) बाहरी पूर्णांक
....... के फूलों में रेडियल समरूपता पाई जाती है
घ) ब्रासिका
———— एक फूल के गैर जरूरी हिस्से हैं
क) पुंकेसर और स्त्रीकेसर
1. एक पिच्छाकार संयुक्त पत्ती हस्ताकार संयुक्त पत्ती से किस प्रकार भिन्न है?
पिच्छाकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही रेखा के दोनों ओर क्रमबद्ध होती हैं, जैसे मटर की पत्ती। इसे पिच्छाकार (पिनेट) संयुक्त पत्ती कहते हैं।
हस्ताकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही बिंदु से निकलती हैं, जैसे गुलमोहर की पत्ती। इसे हस्ताकार (पामेट) संयुक्त पत्ती कहते हैं।
अतः भिन्नता यह है कि पिच्छाकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक मध्य रेखा पर क्रमबद्ध होती हैं जबकि हस्ताकार संयुक्त पत्ती में पत्तिकाएँ एक ही बिंदु से निकलती हैं।
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