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जीव जगत का वर्गीकरण | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

जीव जगत का वर्गीकरण | Class 11 Biology Notes

जीव जगत का वर्गीकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जीव जगत का वर्गीकरण from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

विषाणु (वाइरस), वाइराइड, प्रोसेक (प्रिओन) तथा लाइकेन

व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित पाँच जगत वर्गीकरण में विषाणु (वाइरस), वाइराइड, प्रोसेक (प्रिओन) और लाइकेन को शामिल नहीं किया गया है क्योंकि ये जीवों की परंपरागत कोशिका संरचना से भिन्न हैं।

वाइरस अकोशिक जीव हैं जिनमें प्रोटीन का आवरण (कैप्सिड) होता है और आनुवंशिक पदार्थ आरएनए या डीएनए होता है। ये मेजबान कोशिका के अंदर जाकर अपनी प्रतिकृति बनाते हैं और मेजबान को नुकसान पहुंचाते हैं। वाइरस बैक्टीरिया से भी छोटे होते हैं और कई रोगों जैसे मम्प्स, चेचक, हर्पीज, इंफ्लूएंजा, एड्स आदि के कारण होते हैं।

वाइराइड आरएनए के संक्रामक अणु होते हैं जिनमें प्रोटीन आवरण नहीं होता। ये पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं।

प्रोसेक (प्रिओन) असामान्य फोल्डेड प्रोटीन होते हैं जो संक्रामक न्यूरोलॉजिकल रोगों का कारण बनते हैं, जैसे मवेशियों में मेडकाऊ रोग और मनुष्यों में क्रूजफेल्ट-जैकब रोग।

लाइकेन शैवाल और कवक के सहजीवी होते हैं। शैवालांश स्वपोषी होता है और कवकांश परपोषी। दोनों एक-दूसरे के लिए भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं। लाइकेन प्रदूषण के अच्छे संकेतक होते हैं क्योंकि वे प्रदूषित क्षेत्रों में नहीं उगते।

📊 Diagram: चित्र 2.6 (अ) टोबैको मोजैक वाइरस (टीएमबी) (ब) जीवाणु भोजी

🔗 Connection: यह खंड जीवों के वर्गीकरण की आधुनिक प्रणाली के अतिरिक्त जीवों का परिचय देता है, जिससे जीव विज्ञान की व्यापक समझ होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रिसोफाइट्स डाइनोफ्लैगलेट्स से अलग होते हैं -

ख़) कोशिका की दीवारें दो पतली अतिव्यापी गोले बनाती हैं

आर्कबैक्टीरिया में यूबैक्टेरिया से भिन्न होता है

क) कोशिका की दीवार की संरचना

वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।

वर्गीकरण की पद्धतियाँ समय के साथ विकसित हुई हैं क्योंकि जीवों के बारे में हमारी जानकारी बढ़ी है। प्रारंभ में जीवों को केवल उनके बाहरी लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था। बाद में संरचनात्मक, आनुवंशिक, विकासात्मक और आणविक स्तर पर अध्ययन के आधार पर वर्गीकरण किया जाने लगा। आधुनिक वर्गीकरण में जीवों के डीएनए अनुक्रम, प्रोटीन संरचना और आनुवंशिक संबंधों को ध्यान में रखा जाता है। इस प्रकार, समय के साथ वर्गीकरण की पद्धतियाँ सरल से जटिल और अधिक वैज्ञानिक होती गईं।

निम्नलिखित के बारे में आर्थिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण उपयोगों को लिखें: (क) परपोषी बैक्टीरिया (ख) आद्य बैक्टीरिया

(क) परपोषी बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये मिट्टी में नाइट्रोजन को फिक्स करके पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है। 2. दही, पनीर, दही आदि दुग्ध उत्पादों के निर्माण में उपयोगी होते हैं।

(ख) आद्य बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये किण्वन प्रक्रिया में सहायक होते हैं, जैसे शराब, सिरका, और एंटीबायोटिक्स के उत्पादन में। 2. जैव प्रौद्योगिकी में इनका उपयोग जैव ईंधन और औषधि निर्माण में किया जाता है।

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