जीव जगत का वर्गीकरण | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

जीव जगत का वर्गीकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जीव जगत का वर्गीकरण from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
कवक (फंजाई) जगत
फंजाई जगत के जीव यूकैरियोटिक होते हैं और इनकी कोशिका भित्ति काइटिन नामक पदार्थ से बनी होती है, जो सेल्युलोज से भिन्न है। ये मुख्यतः परपोषी होते हैं, जो मृत जैव पदार्थों को अपघटित करके पोषण प्राप्त करते हैं। फंजाई तंतुमयी होते हैं, जिनके तंतु कवक जाल (माइसीलियम) बनाते हैं। कुछ फंजाई एककोशिकीय भी होते हैं, जैसे यीस्ट।
फंजाई में जनन अलौगिक (कायिक-खंडन, विखंडन, मुकुलन, कोनिडिया द्वारा) और लैंगिक (प्लैन्शोगैमी, केंद्रक संलयन, मिऑसिस) दोनों प्रकार से होता है। लैंगिक जनन में युग्मकों का संलयन, केंद्रकों का संलयन और अगुणित बीजाणु का निर्माण होता है।
फंजाई जगत के चार प्रमुख वर्ग हैं:
1. फाइकोमाइसिटीज: जलीय आवासों में पाए जाते हैं, कवक जाल अपटीय और बहुकेंद्रकित होता है। उदाहरण: म्यूकर, राइजोपस।
2. ऐस्कोमाइसिटीज: थैली फंजाई, एककोशिकीय (यीस्ट) और बहुकोशिकीय (पेनिसिलियम) होते हैं। अलौगिक बीजाणु कोनिडिया होते हैं, लैंगिक बीजाणु ऐस्कस में बनते हैं। उदाहरण: ऐस्पर्जिलस, न्यूरोस्पोरा।
3. बेसिडियोमाइसिटीज: मशरूम, ब्रेक्टफंजाई, पफबॉल आदि इसमें आते हैं। लैंगिक बीजाणु बेसिडियम में बनते हैं। उदाहरण: ऐगैरिकस (मशरूम)।
4. ड्यूटिरोमाइसिटीज: अपूर्ण कवक, केवल अलौगिक जनन ज्ञात है। उदाहरण: आल्टरनेरिया, ट्राईकोडर्मा।
फंजाई का आर्थिक महत्व भी है, जैसे प्रतिजैविकों का उत्पादन, खाद्य पदार्थों का निर्माण, और पौधों तथा जंतुओं के रोग।
📊 Diagram: चित्र 2.5 फंजाई: (अ) म्यूकर (ब) ऐश्पर्जिलस (स) एगेरिकस
🔗 Connection: फंजाई के बाद पादप जगत (प्लांटी किंगडम) का अध्ययन होगा, जिसमें स्वपोषी यूकैरियोटिक जीव आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिसोफाइट्स डाइनोफ्लैगलेट्स से अलग होते हैं -
ख़) कोशिका की दीवारें दो पतली अतिव्यापी गोले बनाती हैं
आर्कबैक्टीरिया में यूबैक्टेरिया से भिन्न होता है
क) कोशिका की दीवार की संरचना
वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
वर्गीकरण की पद्धतियाँ समय के साथ विकसित हुई हैं क्योंकि जीवों के बारे में हमारी जानकारी बढ़ी है। प्रारंभ में जीवों को केवल उनके बाहरी लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था। बाद में संरचनात्मक, आनुवंशिक, विकासात्मक और आणविक स्तर पर अध्ययन के आधार पर वर्गीकरण किया जाने लगा। आधुनिक वर्गीकरण में जीवों के डीएनए अनुक्रम, प्रोटीन संरचना और आनुवंशिक संबंधों को ध्यान में रखा जाता है। इस प्रकार, समय के साथ वर्गीकरण की पद्धतियाँ सरल से जटिल और अधिक वैज्ञानिक होती गईं।
निम्नलिखित के बारे में आर्थिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण उपयोगों को लिखें: (क) परपोषी बैक्टीरिया (ख) आद्य बैक्टीरिया
(क) परपोषी बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये मिट्टी में नाइट्रोजन को फिक्स करके पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है। 2. दही, पनीर, दही आदि दुग्ध उत्पादों के निर्माण में उपयोगी होते हैं।
(ख) आद्य बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये किण्वन प्रक्रिया में सहायक होते हैं, जैसे शराब, सिरका, और एंटीबायोटिक्स के उत्पादन में। 2. जैव प्रौद्योगिकी में इनका उपयोग जैव ईंधन और औषधि निर्माण में किया जाता है।
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