जीव जगत का वर्गीकरण | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

जीव जगत का वर्गीकरण – this guide gives you a concise, exam-ready overview of जीव जगत का वर्गीकरण from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
पाँच प्रमुख जगतों के लक्षण
पाँच जगत वर्गीकरण में जीवों को उनके कोशिका प्रकार, कोशिका भित्ति, केंद्रक की उपस्थिति, काय संरचना, पोषण की विधि और प्रजनन की विधि के आधार पर पाँच प्रमुख जगतों में बांटा गया है। तालिका 2.1 में इन जगतों के प्रमुख लक्षणों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है।
मौनेरा जगत के जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं, जिनकी कोशिका भित्ति सेल्युलोज रहित होती है और केंद्रक अनुपस्थित होता है। इनके पोषण में स्वपोषी (रसायन संश्लेषी एवं प्रकाश संश्लेषी) तथा परपोषी दोनों प्रकार होते हैं। प्रोटिस्टा जगत के जीव यूकैरियोटिक होते हैं, जिनमें केंद्रक उपस्थित होता है और कुछ में कोशिका भित्ति भी पाई जाती है। ये स्वपोषी तथा परपोषी दोनों हो सकते हैं। फंजाई जगत के जीव यूकैरियोटिक होते हैं, जिनकी कोशिका भित्ति काइटिन से बनी होती है और ये मुख्यतः परपोषी होते हैं। प्लांटी जगत के जीव यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय और स्वपोषी होते हैं, जिनकी कोशिका भित्ति सेल्युलोज से बनी होती है। एनिमेलिया जगत के जीव यूकैरियोटिक, बहुकोशिकीय और परपोषी होते हैं, जिनकी कोशिका भित्ति अनुपस्थित होती है।
प्रजनन की विधि भी जगतों में भिन्न होती है, जैसे मौनेरा में संयुग्मन, प्रोटिस्टा में युग्मक संलयन एवं संयुग्मन, फंजाई, प्लांटी और एनिमेलिया में निषेचन होता है। यह वर्गीकरण जीवों के बीच समानताओं और भिन्नताओं को समझने में सहायक है।
📊 Diagram: Table on page 2 (8×6)
🔗 Connection: यह खंड पाँच जगतों के विस्तृत विवरण के लिए आधार तैयार करता है, जैसे कि अगला खंड मौनेरा जगत का विस्तार से अध्ययन करता है।
Table on page 2 (8×6)
| लक्षण | पाँच जगत | ||||
|---|---|---|---|---|---|
| मौनेरा | प्रोटिस्टा | फंजाई | प्लांटी | एनिमेलिया | |
| कोशिका प्रकार | प्रोकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक |
| कोशिका भित्ति | सेल्युलोज रहित (बहुशार्कराइड) + एमीनो अम्ल | कुछ में उपस्थित | उपस्थित (सेल्युलोस रहित) काइटिन युक्त | उपस्थित (सेल्युलोस सहित) | अनुपस्थित |
| केंद्रक (झिल्ली) | अनुपस्थित | उपस्थित | उपस्थित | उपस्थित | उपस्थित |
| काय संरचना | कोशिकीय | कोशिकीय | बहुकोशिक/ अदृढ़ ऊतक | ऊतक/अंग ऊतकतंत्र | ऊतक/अंग/ अंग तंत्र |
| पोषण की विधि | स्वपोषी (रसायन संश्लेषी एवं प्रकाशसंश्लेषी) तथा परपोषी (मृतपोषी एवं परजीवी) | स्वपोषी (प्रकाशसंश्लेषी) तथा परपोषी | परपोषी (मृतपोषी एवं परजीवी) | स्वपोषी (प्रकाशसंश्लेषी) | परपोषी (प्राणि समभोजी, मृतपोषी इत्यादि) |
| प्रजनन की विधि | संयुग्मन | युग्मक संलयन एवं संयुग्मन | निषेचन | निषेचन | निषेचन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्रिसोफाइट्स डाइनोफ्लैगलेट्स से अलग होते हैं -
ख़) कोशिका की दीवारें दो पतली अतिव्यापी गोले बनाती हैं
आर्कबैक्टीरिया में यूबैक्टेरिया से भिन्न होता है
क) कोशिका की दीवार की संरचना
वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए।
वर्गीकरण की पद्धतियाँ समय के साथ विकसित हुई हैं क्योंकि जीवों के बारे में हमारी जानकारी बढ़ी है। प्रारंभ में जीवों को केवल उनके बाहरी लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था। बाद में संरचनात्मक, आनुवंशिक, विकासात्मक और आणविक स्तर पर अध्ययन के आधार पर वर्गीकरण किया जाने लगा। आधुनिक वर्गीकरण में जीवों के डीएनए अनुक्रम, प्रोटीन संरचना और आनुवंशिक संबंधों को ध्यान में रखा जाता है। इस प्रकार, समय के साथ वर्गीकरण की पद्धतियाँ सरल से जटिल और अधिक वैज्ञानिक होती गईं।
निम्नलिखित के बारे में आर्थिक दृष्टि से दो महत्वपूर्ण उपयोगों को लिखें: (क) परपोषी बैक्टीरिया (ख) आद्य बैक्टीरिया
(क) परपोषी बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये मिट्टी में नाइट्रोजन को फिक्स करके पौधों के लिए उपयोगी बनाते हैं, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है। 2. दही, पनीर, दही आदि दुग्ध उत्पादों के निर्माण में उपयोगी होते हैं।
(ख) आद्य बैक्टीरिया के आर्थिक उपयोग: 1. ये किण्वन प्रक्रिया में सहायक होते हैं, जैसे शराब, सिरका, और एंटीबायोटिक्स के उत्पादन में। 2. जैव प्रौद्योगिकी में इनका उपयोग जैव ईंधन और औषधि निर्माण में किया जाता है।
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