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अपचयापचय अभिक्रियाएँ | Class 11 Chemistry Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

अपचयापचय अभिक्रियाएँ | Class 11 Chemistry Notes

अपचयापचय अभिक्रियाएँ – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अपचयापचय अभिक्रियाएँ from Class 11 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में अपचयोपचय अभिक्रियाएँ

अपचयोपचय अभिक्रियाओं को इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, सोडियम के क्लोरीन, ऑक्सीजन और सल्फर के साथ अभिक्रियाएँ आयनिक यौगिकों के निर्माण के रूप में होती हैं, जिनमें सोडियम इलेक्ट्रॉन खोकर Na⁺ आयन बनता है और क्लोरीन, ऑक्सीजन या सल्फर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनते हैं। इस प्रक्रिया को दो अर्द्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित किया जा सकता है: एक में इलेक्ट्रॉन का निष्कासन (ऑक्सीकरण) और दूसरी में इलेक्ट्रॉन की प्राप्ति (अपचयन)। उदाहरण के लिए, सोडियम क्लोराइड के निर्माण में—

2Na(s) → 2Na⁺(g) + 2e⁻ (ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया) Cl₂(g) + 2e⁻ → 2Cl⁻(g) (अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया)

इन अर्द्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ने पर पूरी अभिक्रिया संतुलित होती है। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण की अवधारणा से अपचयोपचय अभिक्रियाओं को समझना सरल हो जाता है। इसके अतिरिक्त, धातुओं के बीच भी ऐसी अभिक्रियाएँ होती हैं, जैसे जिंक की पट्टी को कॉपर सल्फेट के विलयन में डालने पर जिंक का ऑक्सीकरण और कॉपर का अपचयन होता है। इस प्रकार की अभिक्रियाओं में धातु सक्रियता श्रेणी का निर्धारण किया जाता है, जो बताती है कि कौन सी धातु किस धातु के आयनों को विस्थापित कर सकती है।

📊 Diagram: सुविधा के लिए उपरोक्त अभिक्रियाओं को दो चरणों में लिखा जा सकता है। एक में इलेक्ट्रॉनों का निष्कासन तथा दूसरे में इलेक्ट्रॉनों की प्राप्ति होती है। दृष्टांत रूप में सोडियम क्लोराइड के संभवन को अधिक परिष्कृत रूप में इस प्रकार भी लिखा जा सकता है।; चित्र 7.1 बीकर में रखे कॉपर नाइट्रेट तथा जिंक के बीच होनेवाली अपचयोपचय अभिक्रिया; अब हम समीकरण 7.15 द्वारा दर्शाई गई अभिक्रिया की साम्यावस्था का अध्ययन करेंगे। इसके लिए हम कॉपर धातु की पट्टी को जिंक सल्फेट के घोल में डुबोकर रखते हैं। कोई भी प्रतिक्रिया दिखलाई नहीं देती और न ही Cu²⁺ का वह परीक्षण सफल होता है, जिसमें विलयन में H₂S गैस प्रवाहित करने पर क्युपरिक सल्फाइड CuS अवक्षेप का काला रंग मिलता है। यह परीक्षण बहुत संवेदनशील है, परंतु फिर भी Cu²⁺ आयन का बनना नहीं देखा जा सकता है।; चित्र 7.2 एक बीकर में कॉपर धातु व सिल्वर नाइट्रेट के जलीय विलयन के बीच होने वाली अपचयोपचय अभिक्रिया; (7.16); (7.17)

🧪 Activity: जिंक की पट्टी को कॉपर नाइट्रेट के विलयन में डालकर अभिक्रिया का अवलोकन करें। जिंक की पट्टी पर कॉपर की परत जमने और विलयन के रंग में परिवर्तन को नोट करें।

🔗 Connection: यह अनुभाग अपचयोपचय अभिक्रियाओं की इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण प्रक्रिया को समझाता है, जो आगे ऑक्सीकरण-संख्या की अवधारणा से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित अणुओं में से, ब्रोमीन किसमें अधिकतम ऑक्सीकरण संख्या दिखाता है?

(ग) KBrO 4

प्रश्न -निम्नलिखित में से किस यौगिक में आयोडीन की ऑक्सीकरण संख्या भिन्नात्मक होती है?

ख) I 3

प्रश्न . OsO 4 में ऑस्मियम (Os) का ऑक्सीकरण संख्या है

घ) +8

प्रश्न . CH 3 COOH में कार्बोक्जिलिक कार्बन का ऑक्सीकरण संख्या

(घ) +3

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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