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रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत | Class 10 Hindi Notes

रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत – this guide gives you a concise, exam-ready overview of रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

बालगोबिन भगत

बालगोबिन भगत का चरित्र लेखक रामवृक्ष बेनीपुरी ने एक विलक्षण व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया है, जो मनुष्यता, लोक संस्कृति और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। वे बाह्य वेशभूषा या अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि जीवन के मानवीय सरोकारों से संन्यासी थे। यह पाठ सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार करता है और ग्रामीण जीवन की सजीव झाँकी प्रस्तुत करता है।

बालगोबिन भगत मंझोले कद के गोरे-चिट्टे व्यक्ति थे, जिनकी उम्र साठ वर्ष से ऊपर थी। उनके बाल सफेद थे, दाढ़ी या जटाजूट नहीं रखते थे, परंतु उनका चेहरा सफेद बालों से जगमगाता रहता था। वे कमर में लंगोटी और सिर पर कबीरपंथियों की कनफटी टोपी पहनते थे। जाड़े में काली कमली ओढ़ते थे। मस्तक पर रामानंदी चंदन लगा रहता था और गले में तुलसी की जड़ों की माला होती थी।

वे गृहस्थ थे, खेतीबारी करते थे, परिवार के सदस्य थे, लेकिन उनकी जीवनशैली और आचार-व्यवहार साधु की तरह था। वे कबीर को 'साहब' मानते थे और उनके आदेशों का पालन करते थे। वे कभी झूठ नहीं बोलते थे, किसी की चीज बिना पूछे नहीं लेते थे, और अपने व्यवहार में सादगी रखते थे। खेत में जो भी उपज होती, उसे पहले साहब के दरबार में भेंट करते और फिर प्रसाद के रूप में घर लाते थे।

उनका मधुर गान कबीर के पदों का था, जो वे खेतों में काम करते हुए गाते थे। उनका संगीत पूरे गाँव के वातावरण को मंत्रमुग्ध कर देता था। वे अपनी खंजड़ी बजाते और गाते हुए इतने मस्त हो जाते कि पूरा आँगन नृत्य और संगीत से भर जाता।

उनकी संगीत साधना का चरम उत्कर्ष तब हुआ जब उनका इकलौता बेटा मर गया। वे अपने दुख को गीतों के माध्यम से व्यक्त करते थे और मृत्यु को जीवन का एक सत्य मानते थे। उन्होंने बेटे की मृत्यु के बाद भी जीवन के प्रति अपनी आस्था नहीं खोई और अपने निर्णयों में अटल रहे।

बालगोबिन भगत की मृत्यु भी उनकी जीवनशैली के अनुरूप हुई। वे हर वर्ष गंगा स्नान के लिए पैदल जाते थे, रास्ते में गाते और खंजड़ी बजाते थे। वृद्धावस्था में भी वे नेम-ब्रत नहीं छोड़ते थे। अंततः एक दिन भोर में उनका निधन हो गया।

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🧪 Activity: पाठ में बालगोबिन भगत के जीवन के विभिन्न पहलुओं का वर्णन है, जिससे विद्यार्थी ग्रामीण जीवन और साधु जीवनशैली के बीच के अंतर को समझ सकते हैं।

🔗 Connection: यह खंड बालगोबिन भगत के व्यक्तित्व और जीवनशैली की गहराई में जाता है, जो आगे उनके सामाजिक दृष्टिकोण और जीवन के संघर्षों से जुड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘तारों के दीपक न बुझने’ का क्या आशय है ?

आसमान में तारे चमक रहे थे

भगत किस प्रकार का जीवन जीते थे ?

सादा जीवन

‘बालगोबिन भगत’ पाठ के लेखक का नाम बताएँ ।

रामवृक्ष बेनीपुरी

‘मुसाफिर जाग जरा’ गीत की इस पंक्ति में मुसाफिर किसे कहा गया है ?

संसार के लोगों को

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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