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स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा | Class 10 Hindi Notes

स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा – this guide gives you a concise, exam-ready overview of स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

परिचय : स्वयं प्रकाश

स्वयं प्रकाश का जन्म सन् 1947 में इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक औद्योगिक प्रतिष्ठान में नौकरी की। उनका बचपन और नौकरी का बड़ा हिस्सा राजस्थान में बीता। स्वयं प्रकाश वसुधा पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे। वे आठवें दशक में उभरे और समकालीन हिंदी कहानी के महत्वपूर्ण लेखक माने जाते हैं। उनके तेरह कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें 'सूरज कब निकलेगा', 'आएँगे अच्छे दिन भी', 'आदमी जात का आदमी' और 'संधान' उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त उनके उपन्यास 'विनय' और 'ईंधन' भी चर्चित रहे। उन्हें पहल सम्मान, बनमाली पुरस्कार, राजस्थान साहित्य अकादेमी पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया। उनका निधन 2019 में हुआ।

स्वयं प्रकाश की कहानियाँ मध्यवर्गीय जीवन की सूक्ष्म झलक प्रस्तुत करती हैं। उनकी कहानियों में वर्ग-शोषण के विरुद्ध चेतना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। साथ ही जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर हो रहे भेदभाव के खिलाफ उनकी कहानियों में प्रतिकार का स्वर भी सुनाई देता है। उनकी कहानियाँ रोचक किस्सागोई शैली में लिखी गई हैं, जो हिंदी की वाचिक परंपरा को समृद्ध करती हैं।

📊 Diagram: 1055CH10; 7; चारों ओर सीमाओं से घिरे भूभाग का नाम ही देश नहीं होता। देश बनता है उसमें रहने वाले सभी नागरिकों, नदियों, पहाड़ों, पेड़-पौधों, वनस्पतियों, पशु-पक्षियों से और इन सबसे प्रेम करने तथा इनकी समृद्धि के लिए

🧪 Activity: कहानी के लेखक स्वयं प्रकाश के जीवन और कृतित्व पर चर्चा करें।

🔗 Connection: अगले खंड में 'नेताजी का चश्मा' कहानी का प्रारंभिक परिचय दिया गया है, जो देशभक्ति और नागरिकों के योगदान पर आधारित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मूर्ति बनाने का काम किसे सौंपा गया ?

ड्राइंग मास्टर को

‘‘नहीं साब! वो लँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में। पागल है, पागल।’’ किसने कहा ?

पानवाले ने

हलदार साहब भावुक क्यों हो गए ?

मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा देखकर

‘नेता जी का चश्मा’ एक कहानी है-

भाव प्रधान

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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