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मंगलेश डबराल – संगतकार | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

मंगलेश डबराल – संगतकार | Class 10 Hindi Notes

मंगलेश डबराल – संगतकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मंगलेश डबराल – संगतकार from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

संगतकार

यह कविता मुख्य गायक और उसके संगतकार के बीच के संबंध को दर्शाती है। मुख्य गायक का स्वर भारी और चट्टान जैसा होता है, जबकि संगतकार की आवाज़ कमजोर, काँपती हुई और सुंदर होती है। संगतकार मुख्य गायक का छोटा भाई, शिष्य या दूर का कोई रिश्तेदार हो सकता है जो पैदल चलकर सीखने आया हो।

मुख्य गायक जब अंतरे की जटिल तानों के जंगल में खो जाता है या अपने ही सरगम को लाँघकर भटकता हुआ एक अनहद में चला जाता है, तब संगतकार स्थायी को सँभाले रहता है। वह मुख्य गायक के पीछे छूटा हुआ सामान समेटता है, उसे उसके बचपन की याद दिलाता है जब वह नौसिखिया था।

जब मुख्य गायक का स्वर तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर बिखरने लगता है, तब संगतकार उसका ढाँढ़स बँधाता है और कहीं से उसका स्वर आकर उसे अकेला नहीं छोड़ता। कभी-कभी संगतकार यों ही उसका साथ देता है यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है और फिर से गाया जा सकता है।

🔗 Connection: अगले खंड में कविता के भावों की व्याख्या और संगतकार की भूमिका पर प्रश्नोत्तरी दी गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायक स्थायी-स्वर छोड़कर किस जंगल में जाता है ?

जटिल तानों के जंगल में

“वह आवाज सुन्दर, कमजोर, कांपती हुई थी ।“ पंक्ति में 'सुन्दर, कमजोर, कांपती हुई' पदबंध क्या है ?

विशेषण पदबंध

तारसप्तक से क्या तात्पर्य है ?

मध्य सप्तक से ऊपर की ध्वनि

'संगतकार' कविता किस युग की है ?

आधुनिक युग की

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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